कर्मचारी की मौत के बाद GPF का पैसा किसे मिलेगा? सरकार ने साफ किए नियम; जानें नॉमिनी, परिवार और किन सदस्यों को नहीं मिलेगा फंड
नई दिल्ली: सरकारी कर्मचारियों के सेवाकाल के दौरान या सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद होने वाले असामयिक निधन की स्थिति में जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) के अंतिम निपटारे को लेकर सरकार ने दिशा-निर्देश और नियम पूरी तरह स्पष्ट कर दिए हैं। अक्सर मृतक कर्मचारी के परिवार में यह विवाद खड़ा हो जाता है कि जीपीएफ खाते में जमा राशि पर पहला अधिकार किसका होगा—नॉमिनी (नामित व्यक्ति) का या कानूनी उत्तराधिकारियों का? इस पर पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण मंत्रालय (DoP&PW) ने जनरल प्रोविडेंट फंड (सेंट्रल सर्विसेज) रूल्स, 1960 के तहत विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि यदि कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य वैध नॉमिनी है, तो उसे तय हिस्से के अनुसार भुगतान होगा, लेकिन जहां वैध नामांकन मौजूद नहीं है, वहां जीपीएफ की पूरी रकम पात्र परिवार के सदस्यों में बराबर बांटी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिवार के कौन से सदस्य इस फंड से स्वतः बाहर रहेंगे।
1. जब कर्मचारी ने परिवार के सदस्य को वैध नॉमिनी बनाया हो
सरकारी नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के पास परिवार है, तो वह केवल अपने 'परिवार के सदस्य' को ही जीपीएफ का नॉमिनी बना सकता है।
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यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय परिवार के किसी सदस्य के पक्ष में किया गया वैध नामांकन (Valid Nomination) मौजूद है, तो जीपीएफ की पूरी रकम उस नॉमिनी को ही दी जाएगी।
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यदि एक से अधिक नॉमिनी बनाए गए हैं और नामांकन पत्र में प्रत्येक का हिस्सा (प्रतिशत) तय किया गया है, तो उसी अनुपात में सभी नॉमिनी को भुगतान किया जाएगा।
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शादी के बाद पुराना नामांकन रद्द: सुप्रीम कोर्ट और जीपीएफ नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी ने अविवाहित रहते हुए अपने माता-पिता के पक्ष में नामांकन किया था और बाद में उसका विवाह हो गया, तो वह पुराना नामांकन स्वतः अमान्य हो जाता है। ऐसी स्थिति में नए सिरे से नामांकन न होने पर राशि पत्नी और आश्रितों में नियमानुसार समान रूप से बांटी जाती है।
2. जब कोई वैध नॉमिनी न हो: परिवार में कैसे बंटेगा पैसा?
यदि सरकारी कर्मचारी ने अपने सेवाकाल में कोई नामांकन नहीं किया था या किया गया नामांकन नियमों के तहत अमान्य (Invalid) हो चुका था, तो जीपीएफ का पैसा परिवार के जीवित पात्र सदस्यों में समान अनुपात (Equal Shares) में बांटा जाएगा:
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कर्मचारी की विधवा पत्नी (या पति, यदि महिला कर्मचारी हो)।
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नाबालिग बच्चे (नाबालिग बेटे और अविवाहित बेटियां)।
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दिवंगत बेटे की विधवा और उसके नाबालिग बच्चे (उन्हें वह हिस्सा मिलेगा जो जीवित रहने पर उस बेटे को मिलता)।
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माता-पिता (यदि वे पूरी तरह मृतक कर्मचारी पर आश्रित रहे हों)।
3. परिवार के किन सदस्यों को नहीं मिलेगा GPF का पैसा? (Excluded Members)
मंत्रालय के स्पष्टीकरण में उन पारिवारिक सदस्यों की सूची विशेष रूप से रेखांकित की गई है जो जीपीएफ राशि के दावेदार नहीं बन सकते। यदि कर्मचारी ने इनके पक्ष में विशेष नामांकन नहीं किया है और सामान्य उत्तराधिकार का नियम लागू होता है, तो निम्नलिखित सदस्यों को बाहर रखा जाएगा:
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वयस्क बेटे (Adult Sons): ऐसे बेटे जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं (मेजर हो चुके हैं)।
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दिवंगत बेटे के वयस्क पुत्र: मृत बेटे के वे पुत्र जो बालिग हो चुके हैं।
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विवाहित बेटियां: ऐसी बेटियां जिनका विवाह हो चुका है और उनके पति जीवित हैं।
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दिवंगत बेटे की विवाहित बेटियां: मृत बेटे की ऐसी बेटियां जिनका विवाह हो चुका है और पति जीवित हैं।
अपवाद: यदि किसी वयस्क बेटे या विवाहित बेटी के पक्ष में कर्मचारी ने अपनी सेवाकाल के दौरान स्पष्ट रूप से वैध नामांकन दर्ज कराया था, तो उन्हें नामांकन के अनुसार राशि मिलेगी। लेकिन बिना नामांकन वाले मामलों में इन्हें परिवार के बंटवारे से बाहर रखा जाएगा।
4. क्या जीपीएफ से कर्मचारी की देनदारियां या कर्ज वसूला जा सकता है?
जीपीएफ नियमों का एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान यह है कि प्रोविडेंट फंड में जमा कर्मचारी की रकम को किसी भी प्रकार की सरकारी रिकवरी या कोर्ट अटैचमेंट से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त है।
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यदि कर्मचारी पर सरकार का कोई कर्ज, विभागीय देनदारी या किसी बैंक का लोन बकाया है, तो भी विभाग जीपीएफ खाते से एक भी रुपये की कटौती या वसूली नहीं कर सकता।
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किसी दीवानी अदालत (Civil Court) का आदेश भी जीपीएफ खाते को कुर्क (Attach) नहीं कर सकता।
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जीपीएफ की पूरी रकम बिना किसी कटौती के आश्रितों या नॉमिनी को सौंपी जाती है।
5. क्लेम का सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया
मंत्रालय ने सभी विभागों, आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) और लेखा अधिकारियों (Accounts Officers) को निर्देश दिया है कि मृत्यु के मामलों में दावों का निपटारा त्वरित गति से किया जाए:
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रिकॉर्ड की जांच: संबंधित विभाग सबसे पहले कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड और जीपीएफ लेजर का सत्यापन करेगा।
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नामांकन की वैधता: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिकॉर्ड में दर्ज नामांकन वैध है या कर्मचारी के पारिवारिक स्थिति बदलने (जैसे विवाह) के कारण उसमें बदलाव की आवश्यकता है।
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दस्तावेज: दावेदार को कर्मचारी का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारी/परिवार प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), और दावेदार के बैंक खाते का विवरण (कैंसिल चेक/पासबुक) प्रस्तुत करना होता है।
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सत्यापन पूरा होते ही लेखा अधिकारी पात्र आश्रितों के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर (DBT/NEFT) के जरिए पूरी राशि ब्याज सहित हस्तांतरित कर देते हैं।