2 करोड़ की 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर हिलाई फिल्म इंडस्ट्री: वीकडेज में यश की 800 करोड़ी 'टॉक्सिक' को पछाड़ा

2 करोड़ की 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर हिलाई फिल्म इंडस्ट्री: वीकडेज में यश की 800 करोड़ी 'टॉक्सिक' को पछाड़ा

भारतीय बॉक्स ऑफिस के इतिहास में कभी-कभार ऐसा चमत्कार घटित होता है जो फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े पंडितों, दिग्गज निर्माताओं और कॉरपोरेट स्टूडियोज के बने-बनाए गणित को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। मंगलवार और कामकाजी दिनों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने समूची भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां कन्नड़ सुपरस्टार यश की 500 से 800 करोड़ रुपये के महा-बजट में बनी गैंगस्टर ड्रामा 'टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' पहले वीकेंड के बाद वीकडेज में सिंगल डिजिट कलेक्शन के लिए संघर्ष करती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड के कैंची धाम और उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित विख्यात संत बाबा नीम करोली महाराज के जीवन व चमत्कारों पर आधारित महज 2 करोड़ रुपये की छोटी सी फिल्म 'हनुमान अंश' ने सिनेमाघरों में बवंडर ला दिया है।

रिलीज के 26वें दिन (मंगलवार) फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 8 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक नेट कारोबार दर्ज किया, जिसके साथ ही इसका कुल घरेलू नेट कलेक्शन 54 से 55 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि हिंदी बेल्ट में इस 2 करोड़ी फिल्म ने यश की मेगास्टारर 'टॉक्सिक' के दैनिक हिंदी कलेक्शन को सीधे तौर पर पछाड़ दिया है। जहां 'टॉक्सिक' के हिंदी वर्जन की कमाई कामकाजी दिनों में गिरकर 4.40 से 5 करोड़ के बीच सिमट गई, वहीं 'हनुमान अंश' ने अकेले हिंदी भाषी क्षेत्रों में 5.50 करोड़ से 8 करोड़ रुपये तक बटोरकर इतिहास रच दिया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा और मथुरा-वृंदावन के सिनेमाघरों में सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों और आम दर्शकों की ऐसी भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसे देखकर थिएटर मालिक भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।

10 लाख की ओपनिंग से 55 करोड़ तक का सफर: बॉक्स ऑफिस पर नीम करोली बाबा का 'दैवीय चमत्कार'

'हनुमान अंश' की बॉक्स ऑफिस यात्रा किसी परिकल्पना या दैवीय चमत्कार से कम नहीं है। 7 अगस्त को जब यह फिल्म देशभर के महज 355 सिनेमाघरों में चुपचाप रिलीज हुई थी, तब न तो इसका कोई करोड़ों का प्रमोशन हुआ था, न कोई बड़ा स्टारकास्ट था और न ही कोई टीवी इंटरव्यू। पहले दिन फिल्म ने देश भर से मात्र 10 लाख रुपये की नाममात्र कमाई की थी। शुरुआती दो हफ्तों में फिल्म का प्रदर्शन इतना ठंडा रहा कि इसने पहले हफ्ते में 1.08 करोड़ और दूसरे हफ्ते में महज 40 लाख रुपये कमाए। सिनेमाघरों के मालिकों ने इसे 'फ्लॉप' मानकर थिएटर्स से उतारना शुरू कर दिया था और शोज की संख्या घटकर लगभग 133 रह गई थी।

लेकिन 15वें दिन के बाद इस फिल्म की तकदीर में वह मोड़ आया जिसने बॉक्स ऑफिस की दुनिया को हिलाकर रख दिया। फिल्म के निर्माताओं ने वितरकों से विनती कर तीसरे हफ्ते में कुछ स्क्रीन्स बनाए रखने का अनुरोध किया। इसके बाद शुरू हुआ जबर्दस्त 'माउथ पब्लिसिटी' (Word of Mouth) का ऐसा चक्रवात जिसने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। जो दर्शक फिल्म देखकर बाहर निकले, उन्होंने अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और मित्रों को इसे देखने के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह हुआ कि तीसरे हफ्ते में फिल्म ने सीधे 10.40 करोड़ रुपये बटोर लिए।

चौथे वीकेंड में तो फिल्म ने कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ डाले। चौथे शुक्रवार को 6.25 करोड़, शनिवार को 9.25 करोड़ और चौथे रविवार को इस फिल्म ने एक दिन में 12.75 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक नेट कलेक्शन कर डाला। पहले दिन के 10 लाख के मुकाबले 24वें दिन 12.75 करोड़ की कमाई 12,650 प्रतिशत की अप्रत्याशित बढ़त थी। 24वें दिन के कलेक्शन के मामले में इसने 'जवान' (9.37 करोड़), 'स्त्री 2' (11 करोड़) और 'छावा' (10.75 करोड़) जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया। मंगलवार यानी 26वें दिन 8 करोड़ के साथ फिल्म का कुल भारत ग्रॉस बिजनेस 63 करोड़ और नेट 54 करोड़ पार कर चुका है, जो इसके 2 करोड़ के बजट के मुकाबले 2400% से अधिक का शुद्ध मुनाफा (ROI) दर्शाता है।

2 करोड़ बनाम 800 करोड़: जब हिंदी बेल्ट में यश की 'टॉक्सिक' पर भारी पड़ा 'हनुमान अंश'

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यश की फिल्म 'टॉक्सिक' और 'हनुमान अंश' के बीच की सीधी टक्कर है। 26 अगस्त को रिलीज हुई 'टॉक्सिक' को भारत भर में 24,579 शोज के विशालकाय कैनवास पर उतारा गया था। पहले दिन 100 करोड़ की ओपनिंग लेने के बावजूद, फिल्म के अत्यधिक हिंसक दृश्यों, ए-सर्टिफिकेट और डार्क स्क्रीनप्ले के कारण सोमवार और मंगलवार को इसके शोज की ऑक्यूपेंसी में भारी गिरावट आई और थिएटर्स ने इसके लगभग 45 प्रतिशत शोज काटकर 13,400 के करीब कर दिए।

इसके ठीक विपरीत, 'हनुमान अंश' जिसके पास शुरुआत में केवल 300-355 शोज थे, दर्शकों की बेकाबू मांग को देखते हुए सिनेमा मालिकों ने इसके शोज बढ़ाकर 7,000 से अधिक कर दिए। मंगलवार को जब दोनों फिल्मों की तुलना की गई, तो 'टॉक्सिक' अपने आधे से भी कम शोज पर चल रही 2 करोड़ की 'हनुमान अंश' के सामने हिंदी मार्केट में पिछड़ गई। फिल्म ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि यह लड़ाई स्टारडम बनाम आस्था और यथार्थवादी कंटेंट की बन चुकी है। 800 करोड़ की फिल्म को अपनी लागत निकालने के लिए जहां 1000 करोड़ कमाने की दरकार है, वहीं 2 करोड़ की फिल्म ने अपने बजट से 25 गुना ज्यादा कमाई करके सिनेमा के पूरे अर्थशास्त्र को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।

51 साल पुराना 'जय संतोषी मां' का रिकॉर्ड टूटा: बिना वीएफएक्स और तामझाम के सादगी की जीत

भारतीय सिनेमा में कम बजट में ऐतिहासिक मुनाफा कमाने का सबसे बड़ा कीर्तिमान साल 1975 में बनी धार्मिक फिल्म 'जय संतोषी मां' के नाम दर्ज था। उस दौर में महज 25 लाख रुपये में बनी 'जय संतोषी मां' ने अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की महा-ब्लॉकबस्टर मल्टीस्टारर 'शोले' के समानांतर चलते हुए 5 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी। उस समय उस फिल्म ने 2000 प्रतिशत का मुनाफा देकर ट्रेड को हिला दिया था। पूरे 51 साल बाद 'हनुमान अंश' ने 2435 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा अर्जित कर 'जय संतोषी मां' के उस पौराणिक रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और तकनीकी तामझाम से दूरी है। आज जब फिल्में 100-200 करोड़ सिर्फ वीएफएक्स (VFX) और सीजीआई (CGI) पर फूंक देती हैं, 'हनुमान अंश' के लेखक और निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी (जो पेशे से पूर्व डॉक्टर हैं और जिनकी पुस्तक 'डिवाइन डिटूर' पर यह फिल्म आधारित है) ने किसी भी प्रकार के कृत्रिम ड्रामे से परहेज किया। फिल्म में एफटीआईआई (FTII) पुणे से प्रशिक्षित अभिनेता शोभिनव सत्या ने बाबा नीम करोली महाराज का किरदार इतनी सहजता, करुणा और दिव्यता के साथ निभाया है कि दर्शक थिएटर के भीतर हाथ जोड़कर बैठ जाते हैं। उनके साथ अभिनेता चंदन के. आनंद, निखिल दुबे, उदय सिंह राजपूत और वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल रस्तोगी ने अपने अभिनय से कहानी के हर दृश्य को जीवंत बना दिया है।

यूपी से कैंची धाम तक आस्था का सैलाब: सिनेमाघर बने आश्रम, लग रहे जयकारे

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जनमानस में बाबा नीम करोली महाराज के प्रति अगाध श्रद्धा है। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग से लेकर भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विराट कोहली और अनुष्का शर्मा तक जिस संत के दर पर शीश नवाते हैं, उनके जीवन पर बनी इस फिल्म ने यूपी के दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया है।

राजधानी लखनऊ के हजरतगंज और गोमतीनगर के मल्टीप्लेक्सों से लेकर कानपुर के साउथ एक्स और उन्नाव के स्थानीय सिनेमाहॉलों में माहौल किसी आश्रम या मंदिर जैसा नजर आ रहा है। लोग अपने पूरे परिवार, बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों के साथ सिनेमाघरों में पहुंच रहे हैं। कई शहरों में तो हिंदू संगठनों और बाबा के भक्तों ने थिएटरों के बाहर बाकायदा हलवे और चने के 'भंडारे' का आयोजन कर दिया है, जहां आने वाले दर्शकों को प्रसाद बांटा जा रहा है। मध्यांतर और क्लाइमेक्स के दौरान थिएटर्स के अंदर 'बजरंग बली की जय' और 'नीम करोली महाराज की जय' के उद्घोष गूंज रहे हैं।

फिल्म ट्रेड के विशेषज्ञों का मानना है कि 'हनुमान अंश' की यह आंधी अभी थमने वाली नहीं है। जिस रफ्तार से फिल्म चौथे हफ्ते के वीकडेज में रोजाना 6 से 8 करोड़ रुपये जोड़ रही है, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि यह फिल्म बहुत जल्द 100 करोड़ के क्लब में कदम रखकर भारतीय सिनेमा में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच देगी। 'हनुमान अंश' ने पूरी मायानगरी को यह कड़ा सबक सिखा दिया है कि फिल्मों की सफलता केवल भारी बजट, विदेशी लोकेशंस और बंदूकों की गूंज से तय नहीं होती; यदि कहानी में दिल को छूने वाली रूहानियत और सच्चाई हो, तो 2 करोड़ की फिल्म भी 800 करोड़ के साम्राज्य को घुटनों पर ला सकती है।