सेंसर बोर्ड की कैंची: आयुष्मान खुराना की 'उड़ता तीर' से हटाया गया यह विवादित सीन
बॉलीवुड में लीक से हटकर और सामाजिक मुद्दों पर तीखा व्यंग्य करने वाली फिल्में बनाने के लिए मशहूर अभिनेता आयुष्मान खुराना की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'उड़ता तीर' रिलीज से पहले ही चर्चा के केंद्र में आ गई है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म की समीक्षा के बाद निर्माताओं को इसमें कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों और संवादों पर कैंची चलाने का निर्देश दिया है। सेंसर बोर्ड की जांच समिति ने फिल्म के व्यंग्यात्मक टोन को तो सराहा, लेकिन सार्वजनिक प्रदर्शन के मानकों को ध्यान में रखते हुए कुछ आपत्तिजनक और संवेदनशील अंशों में फेरबदल करने के बाद ही फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र जारी करने की हरी झंडी दी है।
कौन सा मुख्य सीन हटाया गया?
सेंसर रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म के सेकेंड हाफ में दर्शाए गए एक लंबे और विवादास्पद सीक्वेंस पर बोर्ड ने मुख्य रूप से आपत्ति जताई थी। इस सीन में नायक अनजाने में एक स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक विवाद में उलझ जाता है, जहां एक सार्वजनिक सभा के दौरान तीखी कहासुनी और कुछ प्रतीकात्मक इशारे दिखाए गए थे। जांच समिति का मानना था कि यह दृश्य किसी खास वर्ग या संस्था की भावनाओं को आहत कर सकता है और अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है। निर्माताओं ने किसी भी कानूनी अड़चन या विवाद से बचने के लिए बोर्ड की सिफारिश को स्वीकार करते हुए उस पूरे प्रसंग को फिल्म से हटा (Delete) दिया है।
संवादों और अपशब्दों पर भी चली कैंची: 'म्यूट' और बदले गए शब्द
मुख्य सीन को हटाने के अलावा, सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कुछ तीखे और अनफिल्टर्ड संवादों पर भी संशोधन सुझाए हैं:
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गालियों और आपत्तिजनक शब्दों पर म्यूट: फिल्म के कुछ दृश्यों में किरदारों द्वारा बोले गए आपत्तिजनक स्थानीय अपशब्दों को या तो ऑडियो से 'म्यूट' कर दिया गया है या फिर उनकी जगह सभ्य और स्वीकार्य वैकल्पिक शब्दों को डब कराया गया है।
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राजनीतिक संदर्भों में संशोधन: संवादों में प्रयुक्त कुछ ऐसे संदर्भ, जो किसी वास्तविक दल या जीवित राजनीतिक शख्सियत की ओर सीधा इशारा कर रहे थे, उनमें बदलाव कराकर उन्हें काल्पनिक स्वरूप दिया गया है।
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संशोधित डिस्क्लेमर का जोड़ना: फिल्म के शुरुआती क्रेडिट्स में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को और अधिक स्पष्ट और प्रमुखता से दिखाने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह साफ रहे कि फिल्म की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं है।
फिल्म के रनटाइम पर क्या पड़ा असर?
इन सभी कटों और संशोधनों के बाद फिल्म के कुल रनटाइम में लगभग दो से तीन मिनट की कमी आई है। संपादन प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म की गति (Pacing) और अधिक चुस्त हो गई है। मेकर्स का कहना है कि इन बदलावों से फिल्म की मूल आत्मा, उसके तीखे संदेश और हास्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है, बल्कि अब यह फिल्म पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में देखने के लिए और अधिक मुफीद हो गई है।
अनचाही मुसीबतों में फंसने की दिलचस्प कहानी है 'उड़ता तीर'
'उड़ता तीर' की कहानी एक ऐसे आम और सीधे-सादे इंसान के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो दूसरों के पचड़ों और मामलों में टांग अड़ाने की अपनी पुरानी आदत के चलते हर बार एक नई और बड़ी मुसीबत मोल ले लेता है। हिंदी मुहावरे 'उड़ता तीर कमान से छूटना' की तर्ज पर गढ़ी गई इस व्यंग्य प्रधान फिल्म में आयुष्मान खुराना एक बार फिर अपने चिर-परिचित देसी और हल्के-फुल्के अंदाज में सामाजिक विद्रूपताओं पर करारा कटाक्ष करते नजर आएंगे। सेंसर बोर्ड से औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब मेकर्स फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर और रिलीज डेट के व्यापक प्रमोशन की तैयारी में जुट गए हैं।