'बोले जा रहा है कुछ भी...': मंच पर दिग्गज गायक दलेर मेहंदी को मंत्री जी ने सरेआम लगाई फटकार

'बोले जा रहा है कुछ भी...': मंच पर दिग्गज गायक दलेर मेहंदी को मंत्री जी ने सरेआम लगाई फटकार

भारतीय पॉप संगीत के बेताज बादशाह और अपनी बुलंद आवाज से दुनिया भर में पंजाबी संगीत का परचम लहराने वाले मशहूर गायक दलेर मेहंदी के साथ एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच पर कुछ ऐसा घटा, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। एक बड़े सांस्कृतिक एवं राजकीय समारोह के उद्घाटन सत्र के दौरान जब दलेर मेहंदी मुख्य अतिथि और विशिष्ट वक्ता के रूप में दर्शकों को संबोधित कर रहे थे, तभी मंच पर आसीन मंत्री महोदय का धैर्य जवाब दे गया। गायक अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाए थे कि मंत्री जी ने माइक की ओर इशारा करते हुए बेहद तल्ख लहजे में उन्हें बीच में ही टोक दिया और सरेआम फटकार लगा दी। मंत्री के मुंह से यह तक निकल गया कि 'यह कुछ भी बोले जा रहा है, इसे रोको।' भरे पंडाल और हजारों दर्शकों के सामने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के फनकार के साथ हुए इस अप्रत्याशित दुर्व्यवहार ने वहां मौजूद हर किसी को सन्न कर दिया। मंच पर एक पल के लिए गहरा सन्नाटा पसर गया और हमेशा खिलखिलाते रहने वाले दलेर मेहंदी के चेहरे पर भी साफ तौर पर असहजता और निराशा तैरती दिखाई दी।

'बोले जा रहा है कुछ भी...': क्या था पूरा वाकया जिसने खड़ा किया विवाद

प्रत्यक्षदर्शियों और कार्यक्रम के वायरल वीडियो के अनुसार, यह पूरी घटना उस वक्त घटी जब औपचारिक दीप प्रज्वलन और स्वागत समारोह के बाद गणमान्य अतिथियों के संबोधन का दौर चल रहा था। दलेर मेहंदी जब पोडियम पर पहुंचे, तो उन्होंने पारंपरिक अंदाज में 'तुनक तुनक तुन' और 'बोलो ता रा रा' के दौर को याद करते हुए भारतीय लोक संगीत, संस्कृति और युवाओं में अनुशासन के महत्व पर बोलना शुरू किया। वह श्रोताओं के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना रहे थे और अपनी जिंदगी के संघर्षों की कुछ प्रेरणादायक बातें साझा कर रहे थे। इसी बीच मंच पर बैठे मंत्री जी बार-बार अपनी घड़ी देखने लगे और उनके चेहरे पर खीझ साफ नजर आने लगी। इसके बाद जब दलेर मेहंदी का वक्तव्य कुछ मिनट लंबा खिंच गया, तो मंत्री जी ने पास बैठे प्रशासनिक अधिकारी को इशारा किया और फिर खुद ही तैश में आकर तल्ख टिप्पणी कर दी। उनके तीखे शब्दों की गूंज माइक के आसपास लगे स्पीकरों में भी हल्की सुनाई दे गई, जिसके बाद दलेर मेहंदी को अपनी बात बीच में ही समेट कर माइक छोड़ना पड़ा।

कैमरे में कैद हुआ मंत्री जी का बर्ताव, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग और दर्शकों के मोबाइल कैमरों में कैद हुआ यह छोटा-सा क्लिप जैसे ही इंटरनेट पर अपलोड हुआ, देखते ही देखते जंगल की आग की तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया। एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो ट्रेंड करने लगा और लाखों लोगों ने इसे देखना शुरू कर दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे दलेर मेहंदी पूरी शालीनता से बात कर रहे थे और मंत्री जी का बर्ताव कितना अहंकारी और गैर-जिम्मेदाराना था। सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत इस क्लिप को री-शेयर करते हुए मंत्री महोदय और आयोजकों की क्लास लगानी शुरू कर दी। यूजर्स ने लिखा कि जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश का नाम दुनिया में रोशन किया, उसके साथ सत्ता के नशे में चूर नेताओं द्वारा ऐसा सुलूक किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

'कलाकार का यह अपमान बर्दाश्त नहीं': सोशल मीडिया पर उठी माफी की मांग

इंटरनेट पर यूजर्स का आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है और कमेंट सेक्शन में तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। एक यूजर ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, "दलेर मेहंदी सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि 90 के दशक से लेकर आज तक करोड़ों हिंदुस्तानियों के दिलों की धड़कन हैं। मंत्री जी को शायद यह गलतफहमी हो गई है कि सत्ता की कुर्सी उन्हें किसी भी लीजेंड का अपमान करने का लाइसेंस दे देती है।" वहीं एक अन्य यूजर ने तीखे शब्दों में टिप्पणी की, "जब चुनाव आते हैं तो यही राजनेता कलाकारों की चौखट पर वोट मांगने और भीड़ जुटाने के लिए हाथ जोड़ते हैं, और जब मंच मिल जाता है तो उनकी जुबान इतनी बदतमीज हो जाती है कि 'बोले जा रहा है कुछ भी' जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।" कई संगीत प्रेमियों और फैंस क्लबों ने मुख्यमंत्री और संबंधित राजनीतिक दल के शीर्ष नेतृत्व को टैग करते हुए मांग की है कि मंत्री महोदय को इस अशोभनीय व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से दलेर मेहंदी और उनके प्रशंसकों से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

वीआईपी कल्चर और नेताओं के अहंकार पर छिड़ी तीखी बहस

इस घटना ने भारतीय राजनीति में गहराई से पैठ बना चुके वीआईपी सिंड्रोम और सत्ता के अहंकार पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। समाजशास्त्रीय और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी सार्वजनिक मंच पर किसी सम्मानित हस्ती, वरिष्ठ नागरिक या कलाकार को नेताओं की बेरुखी का शिकार होना पड़ा हो। सत्ता में बैठे कई प्रतिनिधियों को यह लगता है कि मंच केवल उनके भाषणों और जयकारों के लिए है, और अन्य वक्ता केवल औपचारिकता मात्र हैं। यदि कार्यक्रम में समय की कमी थी, तो मंच संचालक या प्रोटोकॉल अधिकारी के जरिए बेहद सम्मानपूर्वक और धीरे से संदेश पहुंचाया जा सकता था। लेकिन भरी महफिल में इस तरह तुनककर अपमानित करना यह दर्शाता है कि सत्ता का नशा शिष्टाचार और अदब को कैसे निगल जाता है। लोगों का कहना है कि अगर एक पद्म स्तर के या वैश्विक ख्याति प्राप्त कलाकार के साथ सत्ताधारी ऐसा बर्ताव कर सकते हैं, तो आम जनता के साथ उनके व्यवहार का अंदाजा लगाना भी मुश्किल नहीं है।

दलेर मेहंदी की गरिमापूर्ण खामोशी ने जीता सबका दिल

इस पूरे विवाद और हंगामे के बीच दलेर मेहंदी के शांत और गरिमामय आचरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह कितने बड़े कलाकार हैं। मंच पर सरेआम टोके जाने और तीखी टिप्पणी के बावजूद दलेर मेहंदी ने न तो कोई तीखी प्रतिक्रिया दी और न ही मंच पर किसी तरह का हंगामा खड़ा किया। उन्होंने बड़े ही धैर्य के साथ दोनों हाथ जोड़े, मंच पर मौजूद सभी का अभिवादन किया और शांति से अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे इस घटना पर सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए मामले को टालने की कोशिश की और कहा कि कलाकारों का धर्म सिर्फ प्यार बांटना और लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना है, वे इन छोटी-मोटी बातों को दिल से नहीं लगाते। उनके इस शालीन और बड़प्पन भरे अंदाज ने लोगों के दिलों में उनके प्रति सम्मान को और कई गुना बढ़ा दिया है।

इंडस्ट्री के साथियों का भी मिला साथ, आयोजकों की भूमिका पर सवाल

दलेर मेहंदी के साथ हुए इस बर्ताव की गूंज अब संगीत जगत के गलियारों में भी सुनाई देने लगी है। कई साथी गायकों, संगीतकारों और कला क्षेत्र से जुड़े दिग्गजों ने दबी जुबान में और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए इस घटना पर गहरा अफसोस जताया है। कलाकारों का कहना है कि सांस्कृतिक आयोजनों में कलाकारों को बुलाकर उनके साथ ऐसा रवैया अपनाना बेहद शर्मनाक है। आयोजकों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रोटोकॉल तय था, तो मंच पर समय प्रबंधन का जिम्मा नेताओं के मूड पर क्यों छोड़ दिया गया? फिलहाल यह वीडियो लगातार वायरल हो रहा है और देखना यह होगा कि चारों तरफ से हो रही चौतरफा फजीहत के बाद क्या संबंधित मंत्री अपनी इस गलती पर कोई खेद व्यक्त करते हैं या फिर राजनीतिक चुप्पी की चादर ओढ़ लेते हैं।