रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार ने 400 रन ठोक रचा इतिहास

रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार ने 400 रन ठोक रचा इतिहास

भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के सत्र में एक ऐसा अद्भुत और दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित हुआ है, जिसने देश भर के क्रिकेट प्रेमियों और विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर दिया है। मिजोरम की ओर से खेलते हुए युवा भारतीय बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ मैराथन पारी खेलते हुए नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में यह केवल दूसरा मौका है जब किसी भारतीय बल्लेबाज ने 400 रनों की अविश्वसनीय सीमा को पार किया हो। सुतार की इस विशालकाय पारी ने भारतीय क्रिकेट के 78 साल पुराने उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की यादें ताजा कर दी हैं, जब वर्ष 1948 में दिग्गज भाऊसाहेब निम्बालकर ने नाबाद 443 रन बनाए थे। हालांकि चिन्मय सुतार का यह चौहरा शतक भारतीय धरती पर तो ऐतिहासिक है, लेकिन जब विश्व पटल पर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी की बात आती है, तो वह रिकॉर्ड आज भी एक ऐसे कैरेबियाई दिग्गज के नाम दर्ज है जिसने अकेले दम पर 501 रनों का ऐसा हिमालयी स्कोर खड़ा किया था जिसे पिछले 32 वर्षों में दुनिया का कोई भी बल्लेबाज छू तक नहीं सका है।

वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा का 501 रनों का महा-कीर्तिमान: 32 साल से अटूट है यह वर्ल्ड रिकॉर्ड

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के संपूर्ण इतिहास में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने का अमर विश्व रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के महानतम बल्लेबाज ब्रायन चार्ल्स लारा के नाम दर्ज है। साल 1994 में इंग्लैंड की प्रतिष्ठित काउंटी चैंपियनशिप के दौरान वारविकशायर (Warwickshire) की ओर से डरहम के खिलाफ खेलते हुए ब्रायन लारा ने नाबाद 501 रनों की ऐसी आतिशी पारी खेली थी जिसने क्रिकेट जगत के तमाम पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया था। उस ऐतिहासिक मुकाबले में लारा की बल्लेबाजी का रौद्र रूप देखने को मिला था, जहां उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की बरसात कर दी थी। लारा ने अपनी उस नाबाद 501 रनों की जादुई पारी में 62 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के जड़े थे, जिसका सीधा मतलब यह है कि उन्होंने 308 रन केवल बाउंड्रीज के जरिए ही जुटा लिए थे। इस ऐतिहासिक पारी के बाद से तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक कोई भी बल्लेबाज उनके इस 501 रनों के शिखर तक नहीं पहुंच पाया है।

सैम एलेक्जेंडर और टेस्ट में लारा का 400: जब-जब इतिहास में लगा चौहरा शतक

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 400 या उससे अधिक रन बनाना दुनिया के सबसे कठिनतम कारनामों में गिना जाता है। पूरे विश्व क्रिकेट में अब तक केवल 12 मौकों पर ही कोई बल्लेबाज 400 के आंकड़े तक पहुंच सका है। ब्रायन लारा द्वारा 1994 में बनाए गए 501 रनों के विश्व रिकॉर्ड के बाद से फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में सिर्फ दो बार ऐसा हुआ है जब किसी बल्लेबाज ने चौहरा शतक ठोका हो। वर्ष 2022 में इंग्लैंड के काउंटी सर्किट में ग्लैमॉर्गन की ओर से खेलते हुए सैम एलेक्जेंडर ने नाबाद 410 रनों की पारी खेली थी और वे लारा के विश्व रिकॉर्ड के सबसे करीब पहुंचने वाले इकलौते आधुनिक बल्लेबाज बने। वहीं अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की बात करें तो वहां चौहरा शतक जड़ने वाले ब्रायन लारा दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं, जिन्होंने साल 2004 में इंग्लैंड के ही खिलाफ एंटीगुआ टेस्ट में वेस्टइंडीज के लिए नाबाद 400 रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर अपने नाम किया था।

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के इतिहास में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर वाले टॉप-5 धुरंधर

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के इतिहास में दर्जनों पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर की सर्वकालिक सूची में शामिल पांच दिग्गज आज भी किंवदंती बने हुए हैं:

  1. ब्रायन लारा (वेस्टइंडीज / वारविकशायर): नाबाद 501 रन (वर्ष 1994)

  2. हनीफ मोहम्मद (पाकिस्तान / कराची): 499 रन (वर्ष 1959)

  3. सर डॉन ब्रैडमैन (ऑस्ट्रेलिया / न्यू साउथ वेल्स): नाबाद 452 रन (वर्ष 1930)

  4. भाऊसाहेब निम्बालकर (भारत / महाराष्ट्र): नाबाद 443 रन (वर्ष 1948)

  5. विलियम पोंसफोर्ड (ऑस्ट्रेलिया / विक्टोरिया): 437 रन (वर्ष 1927)

इस प्रतिष्ठित सूची में पाकिस्तान के 'लिटिल मास्टर' हनीफ मोहम्मद 499 रनों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जो दुर्भाग्यवश 500 के आंकड़े से मात्र 1 रन दूर रन आउट हो गए थे। वहीं क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाज माने जाने वाले ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन 452 रनों के साथ तीसरे पायदान पर काबिज हैं, जबकि भारत के भाऊसाहेब निम्बालकर 443 रनों के साथ चौथे स्थान पर मौजूद हैं।

भारत से केवल 2 नाम: 78 साल पहले निम्बालकर ने रचा था इतिहास, अब चिन्मय सुतार का धमाका

भारतीय फर्स्ट-क्लास और रणजी क्रिकेट के 90 से अधिक वर्षों के समृद्ध इतिहास में 400 रनों की इस दुर्लभ चोटी पर पहुंचने का गौरव केवल दो ही भारतीय बल्लेबाजों को हासिल हो सका है। आजादी के ठीक बाद साल 1948 में महाराष्ट्र के दिग्गज खिलाड़ी भाऊसाहेब निम्बालकर ने काठियावाड़ (जिसे वर्तमान में सौराष्ट्र के नाम से जाना जाता है) के खिलाफ पुणे में खेलते हुए नाबाद 443 रनों की मैराथन पारी खेली थी। उस दौर में विरोधी टीम मैच बीच में छोड़कर चली गई थी, जिसके कारण निम्बालकर डॉन ब्रैडमैन के 452 रनों के तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने से मात्र 10 रन दूर रह गए थे। उसके बाद लगभग आठ दशक तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज इस आंकड़े को छूने में नाकाम रहा। अब रणजी ट्रॉफी में मिजोरम के लिए खेलते हुए चिन्मय सुतार ने नागालैंड के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए 517 गेंदों का सामना किया और अपनी नाबाद 400 रनों की पारी से 78 साल पुराने सूखे को समाप्त कर दिया। सुतार के इस ऐतिहासिक तिहरे-चौहरे पराक्रम के दम पर मिजोरम की टीम ने अपनी पहली पारी 581 रन के विशाल स्कोर पर घोषित की और घरेलू क्रिकेट में एक नया अध्याय जोड़ दिया।