कभी ढाबे पर ₹150 में धोए बर्तन, आज सादगी से गांव पहुंचे संजय मिश्रा हैं ₹150 करोड़ के मालिक

कभी ढाबे पर ₹150 में धोए बर्तन, आज सादगी से गांव पहुंचे संजय मिश्रा हैं ₹150 करोड़ के मालिक

बॉलीवुड के सबसे मंझे हुए और स्वाभाविक अभिनेताओं में शुमार संजय मिश्रा हाल ही में जब बिना किसी तामझाम, बॉडीगार्ड्स या वीआईपी काफिले के केवल एक साधारण लुंगी और टी-शर्ट पहनकर बिहार के दरभंगा स्थित अपने पैतृक गांव नारायणपुर पहुंचे, तो उनके सादे अंदाज ने पूरे देश का दिल जीत लिया। गांव के घर के बरामदे में जमीन पर बैठकर सगे-संबंधियों से बतियाते संजय मिश्रा को देखकर किसी के लिए भी यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि सामने बैठा यह शख्स करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। मीडिया रिपोर्ट्स और वित्तीय आकलनों के अनुसार, तीन दशकों से अधिक के अभिनय करियर के बाद आज संजय मिश्रा की कुल नेटवर्थ लगभग 149 से 150 करोड़ रुपये आंकी गई है।

जब ₹150 की दिहाड़ी पर ढाबे में धोए थे बर्तन

संजय मिश्रा की यह अकूत दौलत किसी विरासत की देन नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष, धैर्य और अद्वितीय अभिनय प्रतिभा का प्रतिफल है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय सीखने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था। हालांकि, जीवन में एक ऐसा भयावह दौर भी आया जब गंभीर बीमारी और पिता के अचानक निधन ने उन्हें भावनात्मक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे फिल्मों की चकाचौंध छोड़कर ऋषिकेश चले गए थे और वहां गंगा किनारे एक ढाबे पर ऑमलेट बनाने और बर्तन धोने का काम करने लगे थे, जहां उन्हें रोजाना मात्र 150 रुपये मेहनताना मिलता था। बाद में निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें तलाश कर फिल्म 'ऑल द बेस्ट' से दोबारा सिनेमा के पर्दे पर वापसी कराई, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मुंबई में सी-फेसिंग अपार्टमेंट और लोनावला में ऑर्गेनिक फार्महाउस

संजय मिश्रा ने अपनी कमाई को सुरक्षित और टिकाऊ संपत्तियों में निवेश किया है:

  • मुंबई में आलीशान सी-फेसिंग घर: मुंबई के पॉश मड आइलैंड इलाके में उनका एक लग्जरी सी-फेसिंग अपार्टमेंट है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.95 करोड़ रुपये है।

  • लोनावला में एग्रो-टूरिज्म फार्महाउस: महाराष्ट्र के लोनावला (तिस्करी गांव) में उनका एक बड़ा ऑर्गेनिक फार्महाउस है, जहां वे खुद खेती करते हैं और प्रकृति के करीब समय बिताते हैं। इस फार्महाउस में उन्होंने एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण भी कराया है।

  • पटना और पैतृक संपत्तियां: बिहार के पटना में भी उनका अपना करोड़ों का आवास और पैतृक जमीनें मौजूद हैं।

फिल्मों की फीस और कमाई के प्रमुख स्रोत

संजय मिश्रा आज चरित्र अभिनेताओं में सबसे ज्यादा मांग वाले सितारों में गिने जाते हैं।

  • फिल्म फीस: वे प्रति फिल्म लगभग 70 से 85 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं। 'भूल भुलैया 3' और अन्य बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ गंभीर सिनेमा में उनकी लगातार उपस्थिति रहती है।

  • सालाना आय: फिल्मों, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, थिएटर और चुनिंदा टीवी विज्ञापनों (ब्रांड एंडोर्समेंट्स) के जरिए उनकी सालाना कमाई लगभग 10 से 15 करोड़ रुपये के आसपास रहती है।

  • कार कलेक्शन: उनके पास टोयोटा फॉर्च्यूनर, इनोवा क्रिस्टा, बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज और महिंद्रा/जीप जैसी मजबूत और आरामदायक गाड़ियों का काफिला मौजूद है।

राष्ट्रीय पुरस्कार की उपलब्धि और मिट्टी से जुड़ाव

फिल्म 'भक्षक' में अपने उत्कृष्ट अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर) का गौरव हासिल करने के बाद संजय मिश्रा सबसे पहले अपने पैतृक गांव कुलदेवी का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। ₹150 करोड़ की संपत्ति और राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बावजूद उनका यह जमीन से जुड़ा व्यवहार यह साबित करता है कि इंसान की असली पहचान उसके बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों और जमीन से जुड़े रहने के जज्बे से होती है।