कॉर्पोरेट और घरेलू नौकरी के भीषण दबाव पर बनी फिल्म 'सेल्वी', बुसान फिल्म फेस्टिवल में लहराएगी सफलता का परचम

कॉर्पोरेट और घरेलू नौकरी के भीषण दबाव पर बनी फिल्म 'सेल्वी', बुसान फिल्म फेस्टिवल में लहराएगी सफलता का परचम

आम इंसान की जिंदगी की जद्दोजहद, रोजमर्रा के संघर्षों और नौकरी की चारदीवारी के बीच घुटते मध्यमवर्गीय जीवन की कहानियों ने हमेशा से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। अब एक ऐसी ही बेहद संवेदनशील, मार्मिक और नौकरी के कड़े टाइमिंग-प्रेशर से जुड़ी कहानी अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बहुप्रतीक्षित तमिल ड्रामा फिल्म 'सेल्वी' (Selvi) का प्रतिष्ठित 'बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' (Busan International Film Festival) में वर्ल्ड प्रीमियर होने जा रहा है। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें अभिनय का लोहा मनवा चुकीं नेशनल अवॉर्ड विनर अभिनेत्री मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जिनके सशक्त अभिनय ने फिल्म की कहानी को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

बुसान फिल्म फेस्टिवल में होने वाले इस भव्य प्रीमियर से ठीक पहले निर्माताओं ने फिल्म का एक नया और बेहद इंटेंस पोस्टर रिलीज किया है, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही सनसनी फैला दी है। इस पोस्टर में नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री और फिल्म की मुख्य लीड अंजलि पाटिल एक नर्स की वेशभूषा में गहरी चिंता और मानसिक तनाव से जूझती हुई नजर आ रही हैं। पोस्टर के विजुअल्स से ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म की कहानी कितनी यथार्थवादी और अंदर तक झकझोर देने वाली है। यह फिल्म 31वें बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के बेहद प्रतिष्ठित 'विजन एशिया सेक्शन' के लिए चुनी गई चुनिंदा भारतीय फिल्मों में से एक है, जो दक्षिण कोरिया में 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच आयोजित होने जा रहा है।

होम केयर नर्स की बेरहम जिंदगी और 72 घंटे के वर्क प्रेशर की खौфनाक दास्तान

फिल्म 'सेल्वी' की कहानी एक साधारण मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाली लड़की 'सेल्वी' के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अमीर घरों में होम केयर नर्स के रूप में काम करती है। लेकिन उसकी यह नौकरी किसी अभिशाप से कम नहीं है। फिल्म में उसकी नौकरी की क्रूर वास्तविकताओं को बहुत ही खूबसूरती और बेबाकी से उकेरा गया है। सेल्वी के काम में ऐसी शिफ्ट्स शामिल हैं जो कभी 12 घंटे तो कभी लगातार 72 घंटे तक बिना किसी आराम के चलती रहती हैं। इस अमानवीय वर्क प्रेशर के चलते उसके जीवन में न तो सुकून के लिए कोई वक्त बचता है, न ही अपनी मर्जी से सांस लेने की आजादी और न ही नौकरी की उन चार दीवारों से बाहर निकलकर अपनी खुद की कोई निजी जिंदगी जीने का कोई अवसर।

यह कहानी केवल एक साधारण नर्स के संघर्ष तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, यह माइग्रेशन (प्रवास), महिलाओं के बीच की गहरी दोस्ती और केयर-गिविंग (देखभाल) की छिपी हुई कड़वी सच्चाइयों को उजागर करते हुए एक गहरे और रहस्यमयी मनोवैज्ञानिक मोड़ पर पहुंच जाती है। मूवी की पटकथा याददाश्त (Memory), सर्वाइवल (अस्तित्व की लड़ाई) और इंसान उस नाजुक व गुमनाम जिंदगी को बचाने के लिए किस हद तक जा सकता है, जैसे जटिल पहलुओं को बेहद गहराई से खंगालती है।

सेलैश रत्नाकुमार का निर्देशन और अंजलि पाटिल का दमदार अभिनय

फिल्म के निर्देशन की कमान युवा और प्रतिभाशाली निर्देशक सेलैश रत्नाकुमार ने संभाली है, जिन्होंने शहरी कामकाजी वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य और श्रम शोषण जैसे गंभीर मुद्दे को बहुत ही संवेदनशील तरीके से पर्दे पर उतारा है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही अंजलि पाटिल ने 'सेल्वी' के किरदार में जान फूंक दी है। एक होम केयर नर्स के तौर पर अमीरों की आलीशान हवेलियों में काम करते हुए एक मजदूर वर्ग की महिला जो जिल्लत और बेबसी झेलती है, उसे अंजलि ने अपनी आंखों के भावों और शारीरिक भाषा से जीवंत कर दिया है।

बुसान फिल्म फेस्टिवल के विजन एशिया सेक्शन में इस फिल्म का चयन होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय स्वतंत्र सिनेमा अब वैश्विक स्तर पर मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक वास्तविकताओं को कितनी मजबूती के साथ रख रहा है। सिनेमा प्रेमियों और समीक्षकों की निगाहें अब 6 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ पर टिकी हैं, जहां 'सेल्वी' अपनी अनूठी कहानी के जरिए अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है।