'शोले' महान नहीं, सिर्फ एक मजेदार फिल्म थी: दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के इस बयान पर मचा था बवाल

'शोले' महान नहीं, सिर्फ एक मजेदार फिल्म थी: दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के इस बयान पर मचा था बवाल

हिंदी सिनेमा के इतिहास और ब्लॉकबस्टर फिल्मों की जब भी फेरबहिस्ता खोली जाती है, तो निर्देशक रमेश सिप्पी की साल 1975 में रिलीज हुई कल्ट फिल्म 'शोले' (Sholay) का नाम सबसे सर्वोच्च पायदान पर लिया जाता है। सलीम-जावेद की जोड़ी द्वारा लिखी गई यह कहानी, इसके अमर संवाद और जय-वीरू तथा गब्बर सिंह जैसे किरदार आज भी भारतीय जनमानस के दिलों पर राज करते हैं। रिलीज के 51 साल बीत जाने के बाद भी इस फिल्म का जादू कम नहीं हुआ है। लेकिन बॉलीवुड में एक ऐसे दिग्गज और बेबाक कलाकार भी मौजूद हैं, जो इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की 'महान' फिल्म मानने से सिरे से इनकार करते हैं। हम बात कर रहे हैं अपने बेबाक और तीखे बयानों के लिए मशहूर मंझे हुए अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की, जिन्होंने सालों पहले 'शोले' को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दिया था जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में हंगामा खड़ा कर दिया था।

नसीरुद्दीन शाह अपनी शानदार एक्टिंग के साथ-साथ अपने मुखर और बेधड़क विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। आज से कुछ साल पहले दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने रमेश सिप्पी की इस मास्टरपीस फिल्म की आलोचना करते हुए इसे ओवररेटेड करार दिया था। उनके उस बयान ने उस वक्त सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी गलियारों तक में एक लंबी बहस छेड़ दी थी, क्योंकि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ी इस फिल्म पर सवाल उठाना किसी बड़े झटके से कम नहीं था। आइए जानते हैं कि आखिर नसीरुद्दीन शाह ने उस इंटरव्यू में क्या कुछ कहा था और क्यों उन्होंने इस क्लासिक फिल्म को खारिज कर दिया था।

'यह कोई महान फिल्म नहीं, सिर्फ एक मजेदार मूवी है': जब नसीरुद्दीन शाह ने शोले पर उठाए थे सवाल

साल 2016 में एक जाने-माने मीडिया प्लेटफॉर्म 'ग्लेमशैम' को दिए गए इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने बॉलीवुड के पारंपरीक मानदंडों पर खुलकर बात की थी। बातचीत के दौरान जब 'शोले' फिल्म का जिक्र आया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखी। अभिनेता ने दो टूक शब्दों में कहा था कि वे व्यक्तिगत रूप से 'शोले' को एक महान फिल्म नहीं मानते हैं।

नसीरुद्दीन शाह ने उस इंटरव्यू में कहा था, "यह फिल्म बेशक कई लोगों के लिए बहुत बड़ी और महान हो सकती है, लेकिन मेरे लिए बिल्कुल नहीं। हां, इसे एक मनोरंजक और मजेदार मूवी जरूर कहा जा सकता है, जिसे लोग बैठकर एन्जॉय कर सकते हैं। लेकिन अगर कोई यह कहे कि यह भारतीय सिनेमा की सबसे महान कृति है, तो मैं इससे कतई सहमत नहीं हूं। इसे किसी भी एंगल से एक ग्रेट फिल्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।" उनके इस बयान के सामने आते ही शोले के फैंस और फिल्म मेकर्स के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, क्योंकि रमेश सिप्पी के निर्देशन और कलाकारों की मेहनत पर इस तरह की टिप्पणी की किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की एक्टिंग पर भी उठाए थे सवाल, कहा था- प्रभावित नहीं हुआ

नसीरुद्दीन शाह का विवाद यहीं नहीं थमा था। उस चर्चित इंटरव्यू में उन्होंने केवल फिल्म की पटकथा या मेकिंग पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि फिल्म के मुख्य नायक और सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन की अभिनय शैली पर भी निशाना साधा था। अमिताभ बच्चन के स्टारडम और उनके अभिनय कौशल पर बात करते हुए नसीरुद्दीन ने कहा था कि वे उन्हें उस दौर के संदर्भ में कोई ऐसा 'अभूतपूर्व महानायक' नहीं मानते जिनकी कला से वे बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हों।

शाह ने कहा था कि उन्होंने अमिताभ बच्चन की ऐसी कोई विशेष फिल्म नहीं देखी है, जिसके हर दृश्य ने उन्हें एक अभिनेता के रूप में अंदर से झकझोर दिया हो या प्रभावित किया हो। हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब नसीरुद्दीन शाह ने मुख्यधारा के सिनेमा या स्थापित सुपरस्टार्स पर इस तरह की टिप्पणी की हो। वे अक्सर व्यावसायिक सिनेमा की चकाचौंध से परे यथार्थवादी और कलात्मक सिनेमा की वकालत करते नजर आते हैं, जिसके चलते उनके विचार कई बार मुख्यधारा के दर्शकों और कलाकारों से मेल नहीं खाते।

सिनेमा जगत में मचा था भारी बवाल, आज भी प्रासंगिक है यह वैचारिक बहस

नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाहर आते ही उस दौर के फिल्मी अखबारों और पत्रिकाओं में भूचाल आ गया था। एक तरफ जहां शोले के चाहने वालों और ट्रेड एनालिस्ट्स ने इसे पब्लिसिटी पाने का तरीका या पुरानी फिल्मों के प्रति अनदर बताया था, वहीं दूसरी तरफ कला फिल्मों के समर्थकों का एक वर्ग ऐसा भी था जो मानता था कि हर दर्शक या कलाकार को अपनी पसंद और कसौटी के आधार पर किसी कलाकृति का मूल्यांकन करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।

बहरहाल, विवादों से परे नसीरुद्दीन शाह भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने और बेहद सम्मानीय अभिनेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने 'स्पर्श', 'जाने भी दो यारों', 'मासूम' और 'इजाजत' जैसी फिल्मों के जरिए अभिनय के सर्वोच्च मानक गढ़े हैं। उनके हालिया वर्कफ्रंट की बात करें तो वे निर्देशक इम्तियाज अली की आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के साथ-साथ साउथ सुपरस्टार धनुष और दिग्गज अभिनेता ममूटी के साथ बहुप्रतीक्षित फिल्म 'ओम- चैप्टर वन' में अपनी दमदार अदाकारी का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।