OTT पर 9 एपिसोड की यह सीरीज है एक्शन, सस्पेंस और क्राइम का जबरदस्त डोज; 7 है IMDb रेटिंग, जानें कहां देखें

OTT पर 9 एपिसोड की यह सीरीज है एक्शन, सस्पेंस और क्राइम का जबरदस्त डोज; 7 है IMDb रेटिंग, जानें कहां देखें

ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों क्राइम, सस्पेंस और थ्रिलर जॉनर की वेब सीरीज की भरमार है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करातीं बल्कि देश के अंदरूनी और गंभीर सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को भी रूह कंपा देने वाले अंदाज में पेश करती हैं। अगर आप भी वीकेंड पर किसी ऐसी सीरीज की तलाश में हैं, जिसमें हर एपिसोड के साथ सस्पेंस गहराता जाए, धमाकेदार एक्शन हो और अंत तक यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाए कि असली मोहरा कौन है, तो 9 एपिसोड की वेब सीरीज 'नक्सलबाड़ी' (Naxalbari) आपके लिए एकदम मुफीद साबित हो सकती है। आईएमडीबी (IMDb) पर 7 की मजबूत रेटिंग हासिल करने वाली यह सीरीज नक्सलवाद, कॉरपोरेट लालच और सिस्टम के बीच चलने वाले खूनी संघर्ष का ऐसा कच्चा चिट्ठा खोलती है, जिसे देखकर दर्शक दंग रह जाते हैं।

क्या है 9 एपिसोड की इस सीरीज की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी?

पार्थो मित्रा द्वारा निर्देशित इस सीरीज की पृष्ठभूमि महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली के घने जंगलों पर आधारित है। कहानी की शुरुआत एक दिल दहला देने वाले धमाके से होती है, जहां नक्सली जंगल के रास्ते से गुजर रहे एक स्थानीय विधायक के काफिले को आईईडी ब्लास्ट में उड़ा देते हैं। इस वीभत्स हमले के बाद प्रशासन में हड़कंप मच जाता है और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के काबिल व निडर एजेंट राघव जोशी (राजीव खंडेलवाल) को एक सीक्रेट मिशन पर इस लाल आतंक के खात्मे के लिए गढ़चिरौली भेजा जाता है।

शुरुआत में यह एक सामान्य एंटी-नक्सल ऑपरेशन नजर आता है, लेकिन जैसे-जैसे राघव जंगल के अंदरूनी नेटवर्क और शहरी साजिशों की तह तक पहुंचता है, कहानी बेहद पेचीदा और व्यक्तिगत हो जाती है। राघव को पता चलता है कि जंगल में भड़की इस हिंसा के तार सिर्फ विचारधारा से नहीं, बल्कि FICA नाम की एक बड़ी माइनिंग कंपनी के कॉरपोरेट प्रोजेक्ट से जुड़े हैं, जिसे अंबर केसवानी (आमिर अली) पर्दे के पीछे से संभाल रहा है। आदिवासियों की जमीन, अरबों का कॉरपोरेट मुनाफा, नेताओं की सांठगांठ और नक्सली विद्रोहियों के बीच फंसा यह मिशन राघव के बचपन के दर्दनाक अतीत और उस इलाके से जुड़े उसके गहरे राज़ों को बाहर निकाल लाता है। 9 एपिसोड्स के दौरान धोखे, घात-प्रतिघात और रणनीतिक चालों के बाद कहानी एक रोंगटे खड़े कर देने वाले क्लाइमेक्स पर जाकर खत्म होती है।

राजीव खंडेलवाल की दमदार अदाकारी और मजबूत स्टारकास्ट

सीरीज की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी कास्टिंग और उनका स्वाभाविक अभिनय है। एसटीएफ एजेंट राघव जोशी के रूप में राजीव खंडेलवाल ने अपने करियर का वन ऑफ द बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है। वर्दी के अनुशासन, एक्शन और अपने अंदर चल रहे भावनात्मक द्वंद्व को उन्होंने पर्दे पर बड़ी संजीदगी से उतारा है।

राजीव खंडेलवाल के अलावा सीरीज में टीवी और सिनेमा के कई मंझे हुए कलाकार नजर आते हैं। अभिनेत्री टीना दत्ता (केतकी), श्रीजिता डे (प्रकृति), आमिर अली (केसवानी), सत्यदीप मिश्रा (पाहन) और शक्ति आनंद ने अपने-अपने किरदारों को पूरी शिद्दत से निभाया है। आमिर अली ने एक कॉर्पोरेट विलेन के रूप में सधा हुआ काम किया है, तो वहीं श्रीजिता डे नक्सली कमांडर के रूप में बेहद इंटेंस लगी हैं।

मध्य प्रदेश के जंगलों से गोवा शिफ्ट हुई थी शूटिंग, कोविड की चुनौतियों के बीच बनी

इस सीरीज की मेकिंग से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि मेकर्स पहले इसकी रियल लोकेशन शूटिंग मध्य प्रदेश के घने जंगलों में करने वाले थे। लेकिन साल 2020 में अचानक कोविड-19 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण शूटिंग बीच में ही रोकनी पड़ी। लॉकडाउन के बाद जब पाबंदियों में ढील मिली, तो क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे सेटअप को गोवा के सुदूर जंगलों और अंदरूनी इलाकों में शिफ्ट किया गया, जहां कड़े प्रोटोकॉल के साथ इसका निर्माण पूरा हुआ। स्क्रीन पर जंगलों के विजुअल्स और सिनेमैटोग्राफी इतनी रियलिस्टिक लगती है कि दर्शक खुद को गढ़चिरौली के बीहड़ में महसूस करने लगते हैं।

ओटीटी पर कहां और कैसे देख सकते हैं यह सीरीज?

यदि आप सस्पेंस, ट्विस्ट और गंभीर ड्रामा से भरपूर यह 9 एपिसोड की क्राइम थ्रिलर देखना चाहते हैं, तो यह मशहूर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 (जी5) पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। 7/10 की आईएमडीबी रेटिंग वाली इस सीरीज के हर एपिसोड की लंबाई करीब 30 से 35 मिनट है, जिसे एक या दो सिटिंग में आसानी से बिंज-वॉच किया जा सकता है। अगर आप 'पाताल लोक' या 'मिर्जापुर' जैसे देसी और डार्क क्राइम थ्रिलर देखना पसंद करते हैं, तो 'नक्सलबाड़ी' आपकी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल होनी चाहिए।