BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रभारियों संग हाई-लेवल बैठक में बनी आक्रामक रणनीति

BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रभारियों संग हाई-लेवल बैठक में बनी आक्रामक रणनीति

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नवनियुक्त प्रभारियों और सह-प्रभारियों के साथ एक बेहद अहम और मैराथन संगठनात्मक बैठक की अध्यक्षता की। 23 सितंबर को देश भर के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारियों की ताजपोशी के बाद आयोजित यह पहली औपचारिक समन्वय बैठक थी, जिसमें आगामी विधानसभा चुनावों, संगठनात्मक मजबूती और देश के युवाओं यानी 'जेन-जी' (Gen Z) को पार्टी से जोड़ने के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि किसी भी नेता की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा पार्टी के सामूहिक हित से ऊपर नहीं हो सकती।

नितिन नवीन ने नवनियुक्त प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे केवल कागजी बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि अपने आवंटित राज्यों के धरातल पर लगातार सक्रिय नजर आएं। खासकर जिन राज्यों में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां प्रभारियों को नियमित रूप से प्रवास करने और समाज के हर तबके—विशेषकर किसानों, वंचितों, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं—के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का टास्क सौंपा गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि बूथ प्रबंधन ही पार्टी की जीत की असली धुरी है, इसलिए प्रभारियों को जिले से लेकर मंडल और बूथ स्तर तक की समीक्षा बैठकें अनिवार्य रूप से करनी होंगी।

'सरकार और संगठन के बीच खत्म करें मतभेद': प्रभारियों को सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को साधने का टास्क

बैठक के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण एजेंडे पर चर्चा करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जहां भी पार्टी की सरकारें हैं, वहां संगठन और सत्ता के बीच शत-प्रतिशत तालमेल दिखना चाहिए। प्रभारियों और सह-प्रभारियों से कहा गया कि वे अपने-अपने राज्यों के दौरे के दौरान स्थानीय सांसदों, विधायकों, जिला स्तर के पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें करें और उनकी जमीनी शिकायतों व सुझावों को धैर्यपूर्वक सुनें। पार्टी अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि यदि सरकार और संगठन के बीच किसी भी स्तर पर संवादहीनता या मतभेद की स्थिति है, तो प्रभारी उसे तत्काल मध्यस्थता कर दूर करें ताकि जनता के बीच एक सकारात्मक और एकजुट संदेश पहुंचे।

नितिन नवीन ने कहा कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रभारियों का दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान में कोई कमी न आए। इसके अलावा विपक्षी दलों द्वारा गढ़े जा रहे नकारात्मक आख्यानों और राजनीतिक हमलों का स्थानीय स्तर पर तथ्यों के साथ आक्रामक जवाब देने के लिए भी समन्वय तंत्र को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया गया।

37 प्रदेशों में Gen-Z को साधने के लिए चलेंगे विशेष अभियान, सीधे हाईकमान को जाएगी ग्राउंड रिपोर्ट

बदलते जनसांख्यिकीय परिवेश और डिजिटल क्रांति के दौर में बीजेपी ने देश की युवा पीढ़ी यानी 'Gen Z' को अपने पाले में लाने के लिए एक विशेष रणनीति का खाका खींचा है। नितिन नवीन ने सभी 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप हब्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय युवाओं के साथ सीधे संवाद के लिए निरंतर कार्यक्रम आयोजित करें। पार्टी का मानना है कि 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के युवा मतदाता आज देश की दिशा तय कर रहे हैं, इसलिए उनकी आकांक्षाओं, करियर की जरूरतों और राष्ट्र-निर्माण की सोच को पार्टी के विजन के साथ जोड़ना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रभारियों को यह भी हिदायत दी गई है कि वे इन युवा संवाद कार्यक्रमों और बूथ स्तर के अभियानों की नियमित वास्तविक रिपोर्ट (फीडबैक) तैयार कर सीधे केंद्रीय नेतृत्व और आलाकमान को भेजें। इस फीडबैक के आधार पर ही पार्टी भविष्य के चुनावी अभियानों और घोषणापत्रों की रूपरेखा तय करेगी। संगठन को डिजिटल रूप से अधिक सक्रिय बनाने और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का जिम्मा भी राज्य इकाइयों को सौंपा गया है।

स्मृति ईरानी, राम माधव, विनोद तावड़े समेत दिग्गज रहे मौजूद; 23 सितंबर को बंटी थीं बड़ी जिम्मेदारियां

इस महाबैठक में पार्टी के सभी शीर्ष संगठनात्मक चेहरे मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव, बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा और डॉ. भारती प्रवीण पवार ने शिरकत की। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों में स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, हरीश द्विवेदी, सतीश पूनिया, बिप्लब कुमार देब और राज्यसभा सांसद तरुण चुग प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इन सभी वरिष्ठ नेताओं ने राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य पर अपने-अपने विचार रखे और प्रभारियों के साथ अनुभव साझा किए।

गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने 23 सितंबर को एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल के तहत सभी राज्यों के प्रभारी घोषित किए थे। इसके तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे दो बेहद अहम राज्यों की कमान सौंपी गई है। पार्टी के कद्दावर रणनीतिकार और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का दायित्व सौंपा गया है, जहां पार्टी दक्षिण में विस्तार और पर्वतीय राज्य में स्थिरता पर काम कर रही है। वहीं राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। इस पहली बैठक के साथ ही सभी प्रभारियों को तत्काल अपने-अपने राज्यों के दौरे शुरू करने और मिशन 2026-2027 के लिए चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने का बिगुल फूंक दिया गया है।