सलाखों के पीछे सरगना लॉरेंस बिश्नोई तो कौन चला रहा है अंडरवर्ल्ड नेटवर्क

सलाखों के पीछे सरगना लॉरेंस बिश्नोई तो कौन चला रहा है अंडरवर्ल्ड नेटवर्क

गुजरात की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली साबरमती सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी सेल की चारदीवारी में बंद होने के बावजूद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का आतंकी सिंडिकेट किस तरह लगातार सक्रिय बना हुआ है, यह सवाल देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर जानलेवा हमले की हालिया साजिश के खुलासे के बाद एक बार फिर बिश्नोई सिंडिकेट का खौफनाक चेहरा सामने आया है। ऐसे में खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ है कि लॉरेंस के जेल में होने के बावजूद उसके इस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की कमान विदेशों में छिपे 5 प्रमुख गुर्गों की एक संगठित 'शैडो कैबिनेट' संभाल रही है। अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय मुल्कों में सुरक्षित पनाहगाह बनाए बैठे ये हैंडलर्स भारत के विभिन्न राज्यों में फैले अपने स्थानीय शूटरों को निर्देश जारी कर जबरन वसूली, रेकी, हथियारों की सप्लाई और सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिलवा रहे हैं।

विदेशों में छिपे 5 प्रमुख हैंडलर्स की 'शैडो कैबिनेट': भर्ती, लॉजिस्टिक्स और शूटरों का नेटवर्क

टाइम्स ऑफ इंडिया की विशेष जांच रिपोर्ट में उच्च स्तरीय खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट को सुचारू रूप से चलाने के लिए बाकायदा एक गुप्त कैबिनेट यानी 'शैडो कैबिनेट' गठित की गई है। इस पांच सदस्यीय कैबिनेट में मुख्य रूप से टाइसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हरि बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत शामिल हैं। इन पांचों हैंडलर्स के बीच आपराधिक कार्यों का स्पष्ट बंटवारा किया गया है। यह विंग नए बेरोजगार और भटके हुए युवाओं को अपराध की दुनिया में भर्ती करने, उन्हें आधुनिक हथियार मुहैया कराने, सुरक्षित ठिकाने दिलाने और स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स का इंतजाम करने की जिम्मेदारी निभाता है। ये सभी हैंडलर्स अंतरराष्ट्रीय एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और वारदातों से जुड़ी हर सूचना, स्क्रीनशॉट और ऑडियो नोट्स आपस में साझा करते हैं ताकि सिंडिकेट का ऑपरेशन बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

फंडिंग और टारगेट तय करती है दूसरी गुप्त विंग, गोल्डी ढिल्लों एफबीआई के डर से अंडरग्राउंड

सिंडिकेट का ढांचा केवल इन पांच हैंडलर्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके समानांतर एक अन्य गोपनीय कोर विंग भी काम कर रही है जिसमें आरजू बिश्नोई, शुभम लोनकर और रणदीप मलिक जैसे शातिर दिमाग शामिल हैं। इस गुप्त विंग का मुख्य दायित्व बड़े व्यापारियों, फिल्म उद्योग की हस्तियों और विरोधी गैंगस्टरों की सूची तैयार कर नए टारगेट चुनना, उनके ठिकानों की गोपनीय रेकी कराना और अपराध के जरिए जुटाए गए पैसों यानी हवाला फंडिंग का प्रबंधन करना है। इसी रणनीतिक कोर कमेटी का सक्रिय सदस्य गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों भी था, लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के कड़े दबाव और गिरफ्तारी के बढ़ते खतरे के बाद वह पूरी तरह भूमिगत हो गया है। इस विंग के सदस्य पूरी तरह पर्दे के पीछे रहकर सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने का काम करते हैं।

रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ का अब भी सर्वोच्च नियंत्रण, अलग होने का रचा था झूठा नाटक

सुरक्षा एजेंसियों की गहन तफ्तीश में यह बड़ा पर्दाफाश भी हुआ है कि गिरोह के दो सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड—रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़—का सिंडिकेट पर आज भी पूरा दबदबा और नियंत्रण कायम है। कुछ समय पहले सुरक्षा बलों को गुमराह करने और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए दोनों ने लॉरेंस बिश्नोई से अलग होने और अपना स्वतंत्र गिरोह चलाने का झूठा नाटक रचा था। हालांकि खुफिया जांच में यह साबित हो चुका है कि यह केवल जांचकर्ताओं का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी चाल थी। एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने खुलासा किया कि विदेशों में बैठकर सुरक्षित ऑपरेशंस चला रहे ये बड़े सरगना भारत में सक्रिय जमीनी शूटरों को न केवल रणनीतिक दिशा-निर्देश और लाखों की फंडिंग मुहैया कराते हैं, बल्कि वारदात के तुरंत बाद उन्हें फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश से बाहर निकालने और सीमा पार सुरक्षा देने का पूरा इंतजाम भी करते हैं।

अनिल पंडित बना गैंग का मुख्य डिजिटल प्रवक्ता, टाइसन-हरि-हरमन और हिमांशु का खौफ

सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में गैंग की तरफ से जिम्मेदारी लेने और खौफ फैलाने का जिम्मा अनिल पंडित के हाथों में है, जो गिरोह का मुख्य सार्वजनिक प्रवक्ता (माउथपीस) बनकर उभरा है। मूल रूप से हरियाणा के पानीपत का रहने वाला अनिल पंडित मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के करीब एक साल बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कनाडा और फिर वहां से अमेरिका भागने में कामयाब रहा था। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सिंडिकेट के घोषणापत्र जारी करता है और उद्योगपतियों को जबरन वसूली की धमकियां देता है। इसी तरह टाइसन बिश्नोई मशहूर हस्तियों को ऑनलाइन धमकियां देकर फिरौती मांगता है, जबकि हरि बॉक्सर जमीनी स्तर पर जबरन वसूली के नेटवर्क को संचालित करता है और हरमन संधू विदेशी ठिकानों से हथियारों की लॉजिस्टिक्स का समन्वय करता है।

सिग्नल, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए स्थानीय शूटरों तक पहुंच रहे हैं खूनी फरमान

इस सिंडिकेट के अपराध करने के तौर-तरीके पूरी तरह डिजिटल और विकेंद्रीकृत हो चुके हैं। विदेशों में बैठे हैंडलर्स स्थानीय गुर्गों से सीधे कभी नहीं मिलते, बल्कि वे सिग्नल, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर वीपीएन (VPN) और वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल कर निर्देश भेजते हैं। हाल ही में इस गिरोह के हैंडलर हिमांशु ने सोनीपत में हरियाणवी गायक दिलेर खड़किया की लग्जरी रेंज रोवर गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग कराने और 20 अगस्त को हिसार कोर्ट परिसर के बाहर अपने विरोधी गैंगस्टर विनोद काना की दिनदहाड़े हत्या करने की सार्वजनिक जिम्मेदारी ली थी। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और विभिन्न राज्यों की स्पेशल सेल अब इंटरपोल, एफबीआई और कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर विदेशों में बैठे इन पांचों प्रमुख हैंडलर्स और उनके सहयोगियों के प्रत्यर्पण तथा उनकी डिजिटल संपत्तियों को फ्रीज कराने की दिशा में काम कर रही हैं।