'सियासी जीत नहीं, दर्द पर मरहम चाहिए': 5वीं बार PDP चीफ बनकर भावुक हुईं महबूबा मुफ्ती

'सियासी जीत नहीं, दर्द पर मरहम चाहिए': 5वीं बार PDP चीफ बनकर भावुक हुईं महबूबा मुफ्ती

जम्मू और कश्मीर की राजनीति के इतिहास में एक और बड़ा संगठनात्मक अध्याय जुड़ गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के आंतरिक चुनावों में पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर सर्वसम्मति से अपनी सबसे वरिष्ठ और प्रमुख नेता महबूबा मुफ्ती पर भरोसा जताया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को लगातार पांचवीं बार पीडीपी का अध्यक्ष चुना गया है। श्रीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण चुनावी बैठक में कश्मीर और जम्मू दोनों संभागों से पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पार्टी की कमान दोबारा मिलने की घोषणा के तुरंत बाद कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती अपने पिता और पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद की विरासत को याद करते हुए काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में राजनीति केवल चुनाव जीतने या सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की आवाम के दिलों पर लगे गहरे जख्मों पर मरहम लगाने का एक बेहद नाजुक जरिया है।

राजनीतिक मोड़ पर जम्मू-कश्मीर की वास्तविक स्थिति: 'हमे चुनावी नतीजों से ज्यादा आवाम के दर्द की फिक्र है'

अपने अध्यक्षीय भाषण में महबूबा मुफ्ती ने घाटी के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों ने जिस दौर को देखा है, उसने हर वर्ग के इंसान को प्रभावित किया है। युवाओं में बेरोजगारी, राजनीतिक अनिश्चितता, विकास की जमीनी हकीकत और नागरिकों की आवाज को सुने जाने की जरूरत आज सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। महबूबा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य महज चुनावी सीटों की संख्या बढ़ाना या राजनीतिक जीत हासिल करना नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब तक घाटी के आम इंसान, माताओं और बहनों को सुकून महसूस नहीं होता और उनके जख्मों पर राहत का मरहम नहीं लगता, तब तक किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया को मुकम्मल नहीं माना जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं, उनकी पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के सिद्धांतों और पार्टी के 'सेल्फ रूल' एजेंडे पर अडिग रहने का किया संकल्प

पीडीपी चीफ के तौर पर अपनी नई पारी की शुरुआत करते हुए महबूबा मुफ्ती ने अपनी पार्टी के वैचारिक आधार को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि पीडीपी की नींव स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू और कश्मीर के लोगों को एक सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन देने के उद्देश्य से रखी थी। पार्टी हमेशा से भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद, सीमाओं के पार व्यापार की बहाली और 'सेल्फ रूल' (Self-Rule) के जरिए शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पक्षधर रही है। महबूबा ने कहा कि बदलते राजनीतिक माहौल के बावजूद पीडीपी अपने बुनियादी सिद्धांतों से कभी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे जमीनी स्तर पर जाकर आम लोगों की समस्याओं को समझें, उनके सुख-दुख में सहभागी बनें और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे की भावना को मजबूत करें।

जम्मू और कश्मीर की भावी राजनीति में पीडीपी के नए कार्यकाल और विपक्षी गठबंधन पर नजरें

महबूबा मुफ्ती के लगातार पांचवीं बार अध्यक्ष चुने जाने से न केवल पीडीपी के भीतर सांगठनिक ऊर्जा का संचार हुआ है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के समूचे राजनीतिक हलकों में नई सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी राजनीतिक मोर्चों और विधानसभा समीकरणों के बीच पीडीपी का यह रुख काफी अहम माना जा रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और अन्य स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ पीडीपी के भावी रिश्तों और पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (PAGD) के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं गरम हैं। विश्लेषकों का मानना है कि महबूबा मुफ्ती का यह नया कार्यकाल पार्टी को पुनर्जीवित करने, नए युवा चेहरों को आगे लाने और जमीनी आधार को मजबूत करने के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी चुनौती और अवसर दोनों साबित होगा।