'दोनों बार उन्होंने मुझ पर ही सीधा हमला किया, लेकिन वाहेगुरु की कृपा से बाल भी बांका नहीं हुआ', नांदेड़ में गुरुद्वारा साहिब के बाहर हुए हमले के बाद पहली बार छलका सुखबीर सिंह बादल का दर्द; साजिश के पीछे छिपे चेहरों पर उठाए गंभीर सवाल

'दोनों बार उन्होंने मुझ पर ही सीधा हमला किया, लेकिन वाहेगुरु की कृपा से बाल भी बांका नहीं हुआ', नांदेड़ में गुरुद्वारा साहिब के बाहर हुए हमले के बाद पहली बार छलका सुखबीर सिंह बादल का दर्द; साजिश के पीछे छिपे चेहरों पर उठाए गंभीर सवाल

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित ऐतिहासिक सिख तीर्थ स्थल 'तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब' के बाहर हुए जानलेवा हमले और धक्का-मुक्की की घटना के बाद पहली बार उनका आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने आया है। गुरु घर में नतमस्तक होने पहुंचे पूर्व उपमुख्यमंत्री के सुरक्षा घेरे को तोड़कर किए गए इस हमले ने देश के राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हड़कंप मचा दिया था। इस सनसनीखेज घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सुखबीर सिंह बादल ने स्पष्ट कहा कि यह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाने की एक गहरी साजिश थी। उन्होंने पिछले हमलों का जिक्र करते हुए भावुक और कड़े लहजे में कहा कि "दोनों बार उनका सीधा निशाना मैं ही था, लेकिन गुरु साहिब की अपार कृपा और वाहेगुरु के आशीर्वाद के चलते हमलावर अपने मंसूबों में नाकाम रहे।" उनके इस बयान के बाद पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक सियासी पारा चढ़ गया है।

'दोनों बार निशाना मैं था': सुखबीर बादल का दर्द और खुला बयान

घटना के बाद पत्रकारों और पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने हमले के पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि एक सच्चा सिख होने के नाते वे केवल गुरु के चरणों में अरदास करने और शीश नवाने के लिए पवित्र तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब पहुंचे थे।

सुखबीर बादल ने कहा, "जब मैं अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब पर सेवादार के रूप में पहरा दे रहा था, तब भी मुझ पर सीधे प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली चलाई गई थी। अब जब मैं नांदेड़ में गुरु साहिब के दर्शन करने आया, तो यहां भी कुछ असामाजिक तत्वों ने सुनियोजित तरीके से मुझ पर हमला करने की कोशिश की। दोनों ही घटनाओं में यह साफ है कि उनका असली निशाना मैं ही था। जो लोग पंजाब का अमन-चैन बिगाड़ना चाहते हैं और पंथ के नाम पर नफरत फैला रहे हैं, वे मुझे रास्ते से हटाना चाहते हैं। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि जब तक गुरु साहिब का हाथ मेरे सिर पर है, तब तक कोई भी ताकत मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।"

नांदेड़ के हजूर साहिब में क्या हुआ था? घटनाक्रम और सुरक्षा चूक

यह घटना उस वक्त घटी जब सुखबीर सिंह बादल अपने निजी व राजनीतिक साथियों के साथ नांदेड़ में गुरुद्वारा लंगर साहिब और तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। जब वे दर्शन करने के बाद बाहर निकल रहे थे, तभी भीड़ में पहले से घात लगाकर खड़े कुछ उपद्रवियों ने काले झंडे लहराते हुए उनके खिलाफ उग्र नारेबाजी शुरू कर दी।

देखते ही देखते विरोध हिंसक रूप में बदल गया। हमलावरों ने सुरक्षा घेरे (Security Cordon) को धता बताते हुए सुखबीर बादल के काफिले पर हमला बोल दिया और उनकी गाड़ी पर डंडे व पत्थर बरसाए। इस दौरान हमलावरों ने बादल के करीब पहुंचकर उन पर शारीरिक हमला करने का भी प्रयास किया।

मौके पर मौजूद सुखबीर बादल के निजी सुरक्षा कमांडोज और जेड-प्लस (Z+) सुरक्षा दल के जवानों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें चारों तरफ से कवर किया और सुरक्षित गाड़ी के भीतर पहुंचाया। इस धक्का-मुक्की में बादल के कुछ निजी सुरक्षाकर्मियों को मामूली चोटें भी आईं। घटना के बाद नांदेड़ पुलिस हरकत में आई और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात करके स्थिति को नियंत्रित किया।

अमृतसर से नांदेड़ तक: पिछले हमलों का जिक्र और साजिश का आरोप

सुखबीर बादल ने अपने बयान में दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) के प्रवेश द्वार पर हुए जानलेवा हमले का विशेष उल्लेख किया। उस समय जब सुखबीर बादल अकाल तख्त द्वारा दी गई धार्मिक सजा (तनखाह) के तहत हाथ में भाला लेकर पहरेदार के रूप में बैठे थे, तब पूर्व आतंकी नारायण सिंह चौड़ा ने उन पर बेहद करीब से रिवॉल्वर से गोली चला दी थी। उस वक्त एक सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी जसबीर सिंह ने अपनी जान पर खेलकर हमलावर का हाथ पकड़ लिया था, जिससे गोली दीवार में जा धंसी थी और बादल बाल-बाल बचे थे।

नांदेड़ की घटना को उसी कड़ी का हिस्सा बताते हुए बादल ने आरोप लगाया कि पंजाब विरोधी ताकतें लगातार उनके पीछे पड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वे धार्मिक पश्चाताप के रास्ते पर हों या आम जनजीवन में, कुछ चरमपंथी तत्व और उनके राजनीतिक आका लगातार उनके जीवन को खतरे में डालने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने मांग की कि नांदेड़ हमले की केवल स्थानीय स्तर पर जांच न हो, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाए।

पंजाब और महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल: राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं

नांदेड़ में हुए इस हमले की खबर मिलते ही पंजाब और महाराष्ट्र के राजनीतिक दलों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है:

  • शिरोमणि अकाली दल का कड़ा रुख: अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और दलजीत सिंह चीमा ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला' करार दिया। मजीठिया ने कहा कि सुखबीर बादल की लोकप्रियता और अकाली दल के पुनरुत्थान से घबराकर कुछ राजनीतिक शक्तियां हताशा में ऐसे कायराना हमलों को प्रायोजित कर रही हैं।

  • महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई: महाराष्ट्र के गृह विभाग ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। नांदेड़ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गुरुद्वारा परिसर के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और सुरक्षा में हुई किसी भी तरह की स्थानीय चूक की विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

  • कांग्रेस और आप की प्रतिक्रियाएं: पंजाब के अन्य राजनीतिक दलों ने भी सार्वजनिक जीवन में हिंसा की कड़ी निंदा की है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं का कहना था कि सुखबीर बादल को राज्य और देश में जहां भी जाना हो, वहां की संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन किसी भी सूरत में हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता।

Z+ सुरक्षा के बावजूद बार-बार चूक पर उठे गंभीर सवाल

सुखबीर सिंह बादल को केंद्र सरकार की ओर से 'जेड-प्लस' (Z+) श्रेणी की शीर्ष सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें एनएसजी/सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के दर्जनों हथियारबंद कमांडो हमेशा तैनात रहते हैं। इसके बावजूद एक साल के भीतर दो बड़े धार्मिक स्थलों—अमृतसर और नांदेड़—पर उनके सुरक्षा घेरे में सेंध लगना केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई वीआईपी धार्मिक स्थलों पर जाता है, तो वहां हथियारों की मौजूदगी और कमांडोज के घेरे को धार्मिक मर्यादा के चलते सीमित करना पड़ता है, जिसका फायदा उपद्रवी उठाते हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने अब दोनों राज्यों की पुलिस से इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और सुखबीर बादल के आगामी दौरों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

'न डरा हूं, न रुकूंगा': सुखबीर बादल का संकल्प

अपने बयान के अंत में सुखबीर सिंह बादल ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे कायरतापूर्ण हमलों से न तो वे डरने वाले हैं और न ही वे पंजाब, सिख पंथ और देश सेवा के अपने मार्ग से पीछे हटेंगे।

सुखबीर बादल ने कहा, "अकाली दल का इतिहास कुर्बानियों का रहा है। हमारे पुरखों ने जुल्म के आगे कभी सिर नहीं झुकाया। मैं भी किसी गोली, लाठी या साजिश से डरकर घर बैठने वाला नहीं हूं। मेरा जीवन गुरु और पंजाब की जनता को समर्पित है।" नांदेड़ की घटना और उसके बाद आए सुखबीर बादल के इस आक्रामक व भावुक बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में सुरक्षा, पंथिक मुद्दे और आपसी टकराव का यह विमर्श और अधिक गर्माने वाला है।