परविंदर झोटा हत्याकांड की जांच करेगी CBI: मानसा पहुंचे अमित शाह का बड़ा एलान
पंजाब के मालवा क्षेत्र में स्थित मानसा जिले में नशा विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। पंजाब के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा पहुंचकर दिवंगत परविंदर सिंह झोटा के शोकाकुल परिजनों से व्यक्तिगत मुलाकात की और स्पष्ट रूप से एलान किया कि इस पूरे हत्याकांड की निष्पक्ष और गहन जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जाएगी। गृह मंत्री ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि बुधवार दोपहर 12 बजे तक सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम मानसा में झोटा के घर पहुंचकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करेगी और घटनास्थल का मुआयना कर औपचारिक जांच अपने हाथ में ले लेगी। इसके साथ ही अमित शाह ने एक तय समय-सीमा की घोषणा करते हुए कहा कि सीबीआई अगले 120 दिनों के भीतर इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर केस को पूरी तरह हल करेगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाएगी।
पीड़ित परिवार से 20 मिनट तक मिले अमित शाह, केवल ढिल्लों और सुनील जाखड़ रहे मौजूद
मानसा आगमन से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के सीमावर्ती जिले गुरदासपुर में विक्रमजीत सिंह और संगरूर में गुलजार सिंह के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी थी। इसके पश्चात भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच उनका काफिला सीधे मानसा स्थित परविंदर सिंह झोटा के पैतृक आवास पर पहुंचा। वहां गृह मंत्री ने बंद कमरे में झोटा के बुजुर्ग पिता और अन्य परिजनों के साथ लगभग 20 मिनट तक अत्यंत संवेदनशील माहौल में बातचीत की और घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली। इस अहम बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल सहित पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। परिजनों से बातचीत में अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ निस्वार्थ भाव से आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और केंद्र सरकार इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
गृह मंत्री के दौरे से ठीक पहले सीएम भगवंत मान ने भी की थी CBI जांच की सिफारिश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब आगमन से ठीक पहले राज्य की सियासत में भी इस मुद्दे पर तेज हलचल देखी गई थी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार सुबह अपने आधिकारिक इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने की औपचारिक घोषणा की थी। झोटा के परिजन, स्थानीय नागरिक और विभिन्न सामाजिक संगठन घटना के दिन से ही पंजाब पुलिस की स्थानीय जांच पर अविश्वास जताते हुए मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की मांग पर अड़े हुए थे। मुख्यमंत्री के इस कदम को जनदबाव और केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे से पूर्व एक बड़े राजनीतिक व प्रशासनिक घटनाक्रम के रूप में देखा गया, जिसके बाद गृह मंत्री ने मानसा पहुंचते ही सीधे सीबीआई टीम की रवानगी का समय तय कर दिया।
मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का विरोध करने पर मारी गई थी गोली
मानसा शहर में 13 अक्टूबर 2026 को घटी इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात ने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया था। परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से क्षेत्र में युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने और प्रतिबंधित नशीली दवाओं के अवैध धंधे के खिलाफ मुखर आवाज उठा रहे थे। घटना के दिन वे एक स्थानीय मेडिकल स्टोर पर नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की कथित अवैध बिक्री का कड़ा विरोध कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, इसी विवाद के दौरान उन पर प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोलियां बरसा दी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद मुख्य आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पंजाब पुलिस की विशेष टीम ने पड़ोसी राज्य राजस्थान के सालासर क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी। हालांकि झोटा के समर्थकों का आरोप था कि यह केवल एक व्यक्ति का कृत्य नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित नशा तस्कर गिरोह और उन्हें संरक्षण देने वाले प्रभावशाली लोग शामिल हैं।
CBI जांच के आश्वासन तक अंतिम संस्कार न करने पर अड़े रहे परिजन और समर्थक
वारदात के तुरंत बाद से ही मानसा में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ था। परविंदर सिंह झोटा के परिजनों, किसान जत्थेबंदियों और हजारों समर्थकों ने साफ फैसला ले लिया था कि जब तक केंद्र सरकार द्वारा मामले की सीबीआई जांच की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की जाती और उच्चाधिकारियों पर जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। मानसा के मुख्य चौक पर अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन शुरू हो गया था। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ मामले में लापरवाही बरतने वाले स्थानीय पुलिस अफसरों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गतिरोध को समाप्त करने के लिए पंजाब सरकार ने तीन वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारियों की एक विशेष उच्चस्तरीय समिति भी गठित की थी, लेकिन परिजनों के कड़े रुख के कारण शुरुआती दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी। अब केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से घर पहुंचकर बुधवार से सीबीआई जांच शुरू कराने और 120 दिनों में न्याय दिलाने के वादे के बाद इस लंबे गतिरोध के समाप्त होने की उम्मीद जगी है।