पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी सुलझाने की कवायद तेज; सचिन पायलट से मुलाकातों का दौर जारी

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी सुलझाने की कवायद तेज; सचिन पायलट से मुलाकातों का दौर जारी

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी को खत्म करने के लिए पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट ने कमान पूरी तरह संभाल ली है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव बनाए जाने के बाद पायलट से मिलने के लिए दिल्ली में पंजाब के दिग्गज नेताओं का तांता लगा हुआ है। इसी कड़ी में पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशु ने नई दिल्ली में सचिन पायलट से विस्तृत मुलाकात की।

इस बैठक में आशु के साथ पूर्व विधायक इंदरबीर सिंह बुलारिया और किक्की ढिल्लों भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब में पार्टी के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर साझा रणनीति तैयार करना रहा।

भूपेश बघेल के हटने के बाद पायलट के सामने धड़ों को एकजुट करने की चुनौती

कांग्रेस आलाकमान ने पिछले दिनों अंदरूनी असंतोष को थामने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया था। बघेल के कार्यकाल के दौरान पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कार्यशैली से नाराज चल रहे थे और पार्टी के मंचों पर खींचतान खुलकर सामने आ रही थी:

  • वरिष्ठ नेताओं का समानांतर रुख: पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह और भारत भूषण आशु समेत कई नेताओं का एक धड़ा प्रदेश नेतृत्व के कामकाज के तरीके पर लगातार सवाल उठा रहा था।

  • हाईकमान का हस्तक्षेप: 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के जनाधार को बिखरने से बचाने के लिए आलाकमान ने युवा और लोकप्रिय चेहरे के रूप में सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी, जिनकी स्वीकार्यता सभी गुटों में मानी जाती है।

पायलट के दरबार में पहुंचे प्रदेश के सभी प्रमुख चेहरे

प्रभारी का पद संभालते ही सचिन पायलट ने सभी गुटों के नेताओं से सीधे संवाद की रणनीति अपनाई है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर पायलट से अलग-अलग मुलाकात करने वाले नेताओं में शामिल हैं:

  • चरणजीत सिंह चन्नी (पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर सांसद): जिन्होंने पायलट की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद और ऊर्जा का संचार हुआ है।

  • अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष): जिन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की।

  • प्रताप सिंह बाजवा (नेता प्रतिपक्ष): जिन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरने की रणनीति साझा की।

  • सुखजिंदर सिंह रंधावा (पूर्व उप-मुख्यमंत्री व सांसद): जिन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं की चिंताओं से अवगत कराया।

'सामूहिक नेतृत्व' और धरातल पर एकजुटता का संदेश

भारत भूषण आशु ने बैठक के बाद संकेत दिया कि उनका पूरा जोर संगठन को मजबूत करने और नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने पर है। पायलट ने नेताओं को दो टूक संदेश दिया है कि आपसी मतभेदों को सार्वजनिक करने के बजाय पार्टी फोरम पर रखा जाए और आगामी चुनावों में पार्टी को एकजुट होकर 'सामूहिक नेतृत्व' में आगे बढ़ना होगा।

आशु और उनके साथी नेताओं के साथ हुई इस बैठक को मालवा और माझा क्षेत्र के असंतुष्ट नेताओं को साधने और पंजाब में कांग्रेस को पुनः मुख्य मुकाबले में लाने की दिशा में एक अहम राजनीतिक कदम माना जा रहा है।