चंडीगढ़ PGI के पास नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी की तो सीधे होगी जब्त! कैपिटल कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा होगी अभेद्य, डीसी ने जारी किए कड़े आदेश

चंडीगढ़ PGI के पास नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी की तो सीधे होगी जब्त! कैपिटल कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा होगी अभेद्य, डीसी ने जारी किए कड़े आदेश

सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उत्तर भारत के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के आसपास लगने वाले भीषण जाम, नो-पार्किंग में खड़े अनधिकृत वाहनों और अवैध अतिक्रमण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने जब्ती अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले सेक्टर-1 स्थित यूनेस्को हेरिटेज 'कैपिटल कॉम्प्लेक्स' की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक व्यापक सुरक्षा योजना (Comprehensive Security Plan) को हरी झंडी दे दी गई है। चंडीगढ़ के जिला उपायुक्त (DC) निशांत कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) की 26वीं उच्चस्तरीय बैठक में ये युगांतरकारी निर्णय लिए गए। इस बैठक में पुलिस, नगर निगम, इंजीनियरिंग विंग और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त समय-सीमा तय की गई है।

पीजीआई के आसपास अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस

सेक्टर-12 स्थित पीजीआई चंडीगढ़ में रोजाना पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हजारों मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। अक्सर देखा जाता है कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वारों, मध्य मार्गों और आसपास की मुख्य सड़कों पर लोग अपने चार-पहिया और दो-पहिया वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े कर देते हैं। इस अनधिकृत पार्किंग और सड़क किनारे फैले अवैध रेहड़ी-पटरी अतिक्रमण के कारण आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी देरी का सामना करना पड़ता है।

जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि पीजीआई के नो-पार्किंग जोन और आसपास के पूरे इलाके में किसी भी प्रकार की अनधिकृत पार्किंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब केवल चालान काटने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ट्रैफिक पुलिस की आधुनिक क्रेनों के जरिए ऐसे वाहनों को मौके से सीधे जब्त (Impound) कर पुलिस लाइन भेजा जाएगा। इसके साथ ही नगर निगम की इनफोर्समेंट विंग को अस्पताल के मुख्य गेटों के आसपास के सभी फुटपाथों और पगडंडियों से अवैध कब्जों को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है, ताकि पैदल चलने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सुगम रास्ता मिल सके।

कैपिटल कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा का नया खाका: कंप्रीहेंसिव सिक्योरिटी प्लान को मंजूरी

बैठक का एक और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव सेक्टर-1 स्थित ऐतिहासिक 'कैपिटल कॉम्प्लेक्स' की सुरक्षा समीक्षा रहा। कैपिटल कॉम्प्लेक्स में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, पंजाब और हरियाणा के सचिवालय तथा दोनों राज्यों की विधानसभाएं स्थित हैं। इस परिसर को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में न्यायाधीश, वरिष्ठ नौकरशाह, राजनेता, अधिवक्ता और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।

समिति ने कैपिटल कॉम्प्लेक्स के लिए तैयार की गई 'व्यापक सुरक्षा योजना' को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस योजना के तहत पूरे कॉम्प्लेक्स के प्रवेश और निकास द्वारों पर ऑटोमेटेड बूम बैरियर, हाई-रिजॉल्यूशन नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे, अत्याधुनिक बैगेज स्कैनर और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान आम नागरिकों और वकीलों के आवागमन में बाधा न आए, इसके लिए अलग ट्रैफिक कॉरिडोर और वैज्ञानिक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।

मटका चौक, धनास ब्रिज और बलटाना टर्न पर लगेंगी स्मार्ट एटीसी लाइट्स

चंडीगढ़ के प्रमुख चौराहों पर पीक आवर्स के दौरान लगने वाले ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। डीसी ने शहर के तीन सबसे व्यस्त और संवेदनशील पॉइंट्स—धनास ब्रिज, मध्य मार्ग स्थित मटका चौक और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1/बलटाना टर्न पर 'एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल' (ATC) सिस्टम लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेंसर्स पर आधारित होता है। यह तकनीक सड़क पर वाहनों के दबाव और कतार की लंबाई को रियल टाइम में मापकर ट्रैफिक सिग्नल के हरे और लाल होने का समय स्वतः निर्धारित करती है। इससे जिस लेन में गाड़ियों की भीड़ अधिक होगी, वहां सिग्नल अपने आप ज्यादा देर तक हरा रहेगा, जिससे चौराहों पर बेवजह रुकने का समय 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।

61 स्थानों पर 195 ब्लिंकर और डिवाइडर पर लगेंगी लोहे की ग्रिल

पैदल यात्रियों की सुरक्षा और रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने एक महीने का विशेष एक्शन प्लान तैयार किया है:

  • 195 ब्लिंकर लाइट्स: शहर की वी-3 (सेक्टर डिवाइडिंग सड़कें), वी-4 (सेक्टर की मुख्य बाजार सड़कें) और वी-5 (आंतरिक रिहायशी सड़कें) पर चिन्हित 61 संवेदनशील स्थानों पर कुल 195 सोलर पावर्ड ब्लिंकर लगाए जाएंगे। इस कार्य को आगामी 30 दिनों के भीतर पूरा करने की डेडलाइन दी गई है।

  • सेक्टर 29/30 मीडियन ग्रिल: सेक्टर-29 और 30 के लाइट पॉइंट के बीच सड़क के मध्य डिवाइडर (Median) पर ऊंची लोहे की ग्रिल लगाने का काम दो महीने में पूरा करने को कहा गया है। यह कदम पैदल यात्रियों द्वारा अचानक सड़क पार करने (Jaywalking) से होने वाले गंभीर हादसों को रोकने के लिए उठाया गया है।

  • एयरपोर्ट लाइट पॉइंट का चौड़ीकरण: शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाले एयरपोर्ट लाइट पॉइंट पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण और री-सर्फेसिंग के काम की समीक्षा करते हुए इसे निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को जाम न मिले।

83 घातक दुर्घटना स्थलों की पड़ताल: सुधारे जा रहे हैं ब्लैक स्पॉट्स

सड़क सुरक्षा समिति ने शहर के उन 83 डेंजरस और जानलेवा दुर्घटना स्थलों (Fatal Accident Blackspots) की भी गहन समीक्षा की, जहां पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। पुलिस और इंजीनियरिंग विंग द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि दो संबंधित सर्किल डिवीजनों के अंतर्गत आने वाले क्रमशः 16 और 26 दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधारात्मक उपाय (जैसे रंबल स्ट्रिप्स, कैट्स आई, हाई-मास्ट लाइट्स, स्पीड टेबल और नए चेतावनी बोर्ड) पूरी तरह लागू किए जा चुके हैं। डीसी ने शेष बचे सभी ब्लैक स्पॉट्स पर अगले 45 दिनों के भीतर आवश्यक सिविल कार्य और सुरक्षा उपाय पूरे करने का सख्त अल्टीमेटम दिया है।

सड़क हादसे के शिकार पीड़ितों के लिए संजीवनी बनी 'पीएम राहत योजना'

सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों की जान बचाने के लिए केंद्र सरकार की 'पीएम राहत योजना' चंडीगढ़ में बेहद कारगर साबित हो रही है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सड़क हादसे के पीड़ितों को 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के तुरंत बाद का पहला घंटा) में बिना किसी अग्रिम भुगतान के कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन इलाज मुहैया कराया जा रहा है।

योजना के तहत संचालित टीएमएस 2.0 (TMS 2.0) पोर्टल पर अब तक शहर भर से 30 मामले पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 21 मामलों में पीड़ितों के उपचार का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है। उपायुक्त ने शहर के सभी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि दुर्घटना पीड़ित के अस्पताल पहुंचते ही बिना किसी कानूनी या कागजी औपचारिकता के तुरंत इलाज शुरू किया जाए।

प्रशासन की अपील: नियमों का पालन करें और जिम्मेदार नागरिक बनें

चंडीगढ़ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन कड़े नियमों का उद्देश्य नागरिकों को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर को देश का सबसे सुरक्षित और व्यवस्थित महानगर बनाना है। यातायात पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें अब रोजाना शहर के प्रमुख अस्पतालों, बाजारों और शिक्षण संस्थानों के आसपास औचक निरीक्षण करेंगी।

प्रशासन ने आम जनता और वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपनी गाड़ियों को केवल अधिकृत पार्किंग स्थलों या मल्टी-लेवल पार्किंग में ही पार्क करें। यदि कोई भी वाहन एम्बुलेंस मार्ग या नो-पार्किंग जोन में खड़ा पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ वाहन जब्ती की सख्त कार्रवाई की जाएगी।