पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज: 15 विधायकों संग प्रताप सिंह बाजवा पहुंचे दिल्ली, राहुल गांधी से मुलाकात की तैयारी
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के भीतर अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़ों के बीच जारी खींचतान के बीच अब नया मोड़ आ गया है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) प्रताप सिंह बाजवा की अगुवाई में कांग्रेस के करीब 15 विधायकों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर आपात मुलाकात का समय मांगा है। विधायकों का संदेश और मांगें लेकर प्रताप सिंह बाजवा खुद दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे पंजाब की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
वड़िंग और चन्नी गुट में तल्खी: क्यों खड़ा हुआ नया विवाद?
पंजाब कांग्रेस में विवाद की मुख्य वजह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठन पर वर्चस्व, नेतृत्व और टिकटों के बंटवारे को लेकर जारी खींचतान है। एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान द्वारा पंजाब चुनाव समितियों की घोषणा के बाद से ही पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। चन्नी गुट लगातार राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटाने या संगठन में बदलाव की मांग कर रहा है। हाल ही में पंजाब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के 10 दिवसीय पंजाब दौरे के दौरान भी कई विधायक विधानसभा सत्र में व्यस्त होने के कारण उनसे सीधे मुलाकात नहीं कर पाए थे, जिसके बाद अब विधायकों ने सीधे हाईकमान का रुख किया है।
प्रताप सिंह बाजवा के दिल्ली पहुंचने के मायने और हाईकमान की भूमिका
पंजाब विधानसभा सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद प्रताप सिंह बाजवा विधायकों की चिंताओं को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बाजवा सबसे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात करेंगे और पंजाब संगठन के मौजूदा हालात तथा विधायकों की मांगों को उनके समक्ष रखेंगे। इसके बाद संसद के चल रहे मानसून सत्र के बीच या सत्र समाप्त होते ही राहुल गांधी के साथ पंजाब के कांग्रेस विधायकों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा सकती है। विधायकों का मानना है कि पार्टी में जारी गुटबाजी को खत्म करने और चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का सीधा हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो गया है।
चुनावी तैयारियों पर असर और कांग्रेस हाईकमान के सामने चुनौती
पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाने के बजाय कांग्रेस का अपना कुनबा आंतरिक अंतर्विरोधों से जूझ रहा है। प्रदेश में नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद से ही नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। ऐसे में 15 विधायकों द्वारा राहुल गांधी से सीधे मिलने की मांग और बाजवा की दिल्ली में सक्रियता यह दर्शाती है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान और राहुल गांधी पर टिकी हैं कि वे बाजवा और विधायकों की बातें सुनकर पंजाब कांग्रेस में जारी इस अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए क्या कड़ा कदम उठाते हैं।