चंडीगढ़ निकाय चुनाव से पहले गरमाई सियासत, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के संभावित गठबंधन पर भाजपा का तीखा हमला
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी बीच, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच संभावित चुनावी गठबंधन की चर्चाओं ने शहर की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पंजाब के राजनीतिक मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकने वाले ये दोनों दल यदि चंडीगढ़ के स्थानीय निकाय चुनावों में हाथ मिलाते हैं, तो इसे लेकर विरोधी दलों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। इस संभावित गठबंधन की सुगबुगाहट सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से हमलावर हो गई है और उसने दोनों दलों की नीयत और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की अंदरूनी बैठकों में आप के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन इस सुगबुगाहट ने विपक्षी दलों को एक बड़ा सियासी मुद्दा दे दिया है। भाजपा का कहना है कि यह केवल सत्ता हासिल करने की एक अवसरवादी रणनीति है, जिसका जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा प्रदेश महामंत्री रामवीर भट्टी ने कांग्रेस से मांगा स्पष्टीकरण
चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री रामवीर भट्टी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की से सीधा सवाल किया कि पंजाब और चंडीगढ़ में दोनों दलों की राजनीतिक रणनीतियां इतनी विरोधाभासी क्यों हैं। भट्टी ने कहा कि जब पंजाब में कांग्रेस और आप एक-दूसरे की घोर विरोधी राजनीतिक लड़ाइयां लड़ रही हैं, तो फिर चंडीगढ़ में आकर दोनों में ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी या सांठगांठ बन जाती है कि इन्हें गठबंधन करने की सूझती है।
रामवीर भट्टी ने दावा किया कि हाल ही में चंडीगढ़ कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई थी, जिसमें नगर निगम चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने के प्रस्ताव पर खुलकर चर्चा की गई है। इस बैठक में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सांसद भी मौजूद रहे थे। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस संभावित गठबंधन का वैचारिक और राजनीतिक आधार क्या है।
'लोकसभा चुनाव की तरह फिर हो रहा है राजनीतिक समझौता'
चंडीगढ़ की राजनीति में कांग्रेस और आप के बीच तालमेल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी दोनों दलों ने 'इंडिया' गठबंधन के तहत चंडीगढ़ की इकलौती लोकसभा सीट पर मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी को आम आदमी पार्टी ने अपना समर्थन दिया था, जिसके बाद से ही दोनों दलों के स्थानीय कैडर के बीच भीतरखाने एक तालमेल की चर्चा हमेशा बनी रहती है।
अब एक बार फिर नगर निगम चुनाव के मद्देनजर जब इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं, तो भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस और आप पर वैचारिक पतन का आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि दोनों दल अपनी व्यक्तिगत और दलीय राजनीतिक जमीन बचाने के लिए जनता के साथ छल कर रहे हैं।
'जब दृष्टिकोण अलग है, तो गठबंधन की जरूरत क्यों?'
भाजपा नेता रामवीर भट्टी ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के वैचारिक दृष्टिकोण और नीतियां एक-दूसरे से भिन्न हैं, तो चुनाव के वक्त उन्हें आपस में हाथ मिलाने की क्या आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है और इस तरह के अवसरवादी गठबंधनों का हस्र चुनाव में बहुत बुरा होता है।
भट्टी ने दो टूक कहा कि भारतीय जनता पार्टी आगामी चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी। पार्टी का पूरा जोर संगठन की मजबूती और चंडीगढ़ के स्थानीय विकास के मुद्दों पर होगा। भाजपा ने साफ कर दिया है कि वे चुनाव मैदान में इन दलों के दोहरे चरित्र को जनता के सामने बेनकाब करेंगे। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती हैं और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।