Punjab DA Arrears News: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के डीए भुगतान के आदेश पर घिरी 'आप' सरकार, वित्त मंत्री चीमा ने जताई निराशा; विपक्ष ने बोला तीखा हमला

Punjab DA Arrears News: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के डीए भुगतान के आदेश पर घिरी 'आप' सरकार, वित्त मंत्री चीमा ने जताई निराशा; विपक्ष ने बोला तीखा हमला

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक कड़े फैसले के बाद राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि राज्य के लगभग 7 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के रोके गए महंगाई भत्ते (DA) का बकाया भुगतान अगले 15 दिनों के भीतर किया जाए। यदि सरकार इस तय समयसीमा के भीतर भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देना होगा। राज्य के कर्मचारियों का कुल 14,191 करोड़ रुपये का डीए बकाया है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर गर्मा गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष के तीखे हमलों से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का बयान: अदालत का सम्मान, मगर फैसले पर निराशा

हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार न्यायपालिका का पूर्ण सम्मान करती है, लेकिन हाईकोर्ट के इस आदेश में कई महत्वपूर्ण पक्षों की अनदेखी कर दी गई है। चीमा ने कहा कि राज्य सरकार डीए का भुगतान करने को तैयार है, लेकिन सरकार ने पहले ही उच्च न्यायालय में एक 'लिक्विडेशन प्लान' (Liquidation Plan) प्रस्तुत किया था, जिसे डबल बेंच ने स्वीकार भी किया था। उनका कहना है कि इस साल अप्रैल में आए अदायगी के फैसले में उस प्लान और व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

कानूनी अध्ययन और पंजाब में कर्मचारियों के वेतन का जिक्र

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जानकारी दी कि सरकार हाईकोर्ट के इस पूरे आदेश का कानूनी तौर पर बारीकी से अध्ययन करेगी। उन्होंने तर्क दिया कि पंजाब में सरकारी कर्मचारियों का वेतन देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है, जिसके कारण केंद्र सरकार की दरों पर डीए लागू करने से राज्य के खजाने पर भारी-भरकम आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार के वेतन ढांचे के अनुरूप डीए देने की बात है, तो राज्य सरकार इसके लिए असमर्थ नहीं है, बशर्ते वित्तीय स्थितियों को संतुलित रखा जा सके।

पुरानी सरकारों पर मढ़ा सारा ठीकरा: अकाली-भाजपा और कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

इस वित्तीय संकट और डीए के बकाए के लिए वित्त मंत्री ने पिछली सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। चीमा ने आरोप लगाया कि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 'छठे वेतन आयोग' (Sixth Pay Commission) को लागू करने का फैसला अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के समय 2016 में लिया गया था, जिसे बाद में जुलाई 2021 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जनवरी 2016 से लागू किया गया। उन्होंने कहा कि न तो पिछली अकाली-भाजपा सरकार और न ही कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों को समय पर उनका डीए दिया, बल्कि इस भारी-भरकम आर्थिक बोझ का पूरा पहाड़ मौजूदा 'आप' सरकार पर लाद दिया गया।

विपक्षी दलों का हमला: कांग्रेस ने सरकार को घेरा

हाईcourt के इस आदेश के सामने आने के बाद विपक्षी दल आक्रामक मुद्रा में आ गए हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बयान जारी करते हुए कहा कि पंजाब सरकार को हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार 15 दिन के भीतर कर्मचारियों का बकाया डीए हर हाल में देना ही होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार टालमटोल करती है, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक कर्मचारियों के हक और समर्थन में जोरदार संघर्ष करेगी।

वहीं, नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार वास्तव में कर्मचारियों का डीए देना ही नहीं चाहती है। बाजवा ने याद दिलाया कि जब राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी, तब इन्हीं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का स्वागत सचिवालय में फूल बरसाकर किया था, लेकिन आज वही सरकार अपने ही कर्मचारियों के हक का पैसा देने से पीछे हट रही है। चुनाव से ठीक पहले कर्मचारियों और पेंशनरों का यह आक्रोश 'आप' सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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