पंजाब कांग्रेस की कमान संभालते ही एक्शन में सचिन पायलट: श्री हरिमंदिर साहिब में टेकेंगे माथा, क्या खत्म होगी गुटबाजी?

पंजाब कांग्रेस की कमान संभालते ही एक्शन में सचिन पायलट: श्री हरिमंदिर साहिब में टेकेंगे माथा, क्या खत्म होगी गुटबाजी?

पंजाब की सियासत में कांग्रेस पार्टी को पुनर्जीवित करने और अंदरूनी कलह पर लगाम लगाने के मकसद से कांग्रेस आलाकमान ने युवा और आक्रामक नेता सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। जिम्मेदारी संभालते ही सचिन पायलट ने पंजाब का रुख करने का फैसला कर लिया है। वे जल्द ही अपने पहले आधिकारिक राज्य दौरे पर पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पायलट अपने इस महत्वपूर्ण सियासी मिशन की शुरुआत पवित्र गुरुनगरी अमृतसर स्थित सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में नतमस्तक होकर और अरदास करके कर सकते हैं। पायलट की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने और लंबे समय से खींचतान का शिकार रही पंजाब कांग्रेस को एक मंच पर लाने की जोरदार कोशिश करेंगे।

गुरुनगरी से शुरुआत कर पंथिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को साधने की रणनीति

सचिन पायलट का पहला पड़ाव अमृतसर होना रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। श्री हरिमंदिर साहिब में शीश नवाने के साथ-साथ वे दुर्गियाना मंदिर और जलियांवाला बाग जाकर शहीदों को नमन कर सकते हैं। पंजाब की राजनीति में कोई भी बड़ा राजनीतिक सफर शुरू करने से पहले राज्य के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों का आशीर्वाद लेना एक स्थापित परंपरा रही है। पायलट इस शुरुआत के जरिए राज्य के लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि वे जमीनी हकीकत, जनभावनाओं और पंजाबियत के सम्मान के साथ आगे बढ़ेंगे।

अंदरूनी गुटबाजी और बगावती तेवरों पर नकेल कसना सबसे बड़ी चुनौती

पंजाब कांग्रेस के नए कप्तान के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द पार्टी के भीतर फैली अंतर्कलह और वरिष्ठ नेताओं के बीच का अहं का टकराव है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही पार्टी कई गुटों में बंटी नजर आती रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू, प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे दिग्गज नेताओं के समर्थक अक्सर अलग-अलग सुर अलापते दिखे हैं।

ऐसे में सचिन पायलट के लिए सभी वरिष्ठ नेताओं को एक मेज पर बिठाना और यह भरोसा दिलाना कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, सबसे कठिन परीक्षा होगी। चूंकि पायलट खुद राजस्थान में सत्ता और संगठन के लंबे संघर्षों से तपकर निकले हैं, इसलिए वे अंदरूनी सियासत की पेचीदगियों को बखूबी समझते हैं। उनका रुख कड़ा लेकिन सुलह-सफाई वाला रहने की उम्मीद है।

ग्राउंड लेवल पर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद, मैराथन बैठकों का खाका

प्रभारी के रूप में अपने इस दौरे के दौरान सचिन पायलट केवल वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरों में बैठकें नहीं करेंगे, बल्कि जिला स्तर के कार्यकर्ताओं, ब्लॉक अध्यक्षों और यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों से भी सीधा फीडबैक लेंगे। कांग्रेस मुख्यालय चंडीगढ़ में प्रदेश कार्यकारिणी, सांसदों, पूर्व विधायकों और 2022 के प्रत्याशियों के साथ विस्तृत मैराथन बैठकों का दौर चलेगा। पायलट का मुख्य फोकस संगठन में निष्क्रिय पड़े पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जमीनी स्तर पर संघर्ष करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर रहेगा। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद पंजाब कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल और नई जिम्मेदारियों का बंटवारा भी देखने को मिल सकता है।

'आप' सरकार की विफलताओं और भाजपा के विस्तार को रोकने का चक्रव्यूह

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है और मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार विपक्षी दलों पर हमलावर रहते हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी पंजाब में अपने पैर पसारने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और अकाली दल के साथ गठबंधन की अटकलें भी तेज हैं। ऐसे त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबले में कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल के रूप में जनता की पहली पसंद बनाए रखना पायलट का प्रमुख लक्ष्य होगा। वे कानून-व्यवस्था, नशा मुक्ति, किसानों के मुद्दों, बेरोजगारी और बढ़ते कर्ज जैसे ज्वलंत मुद्दों पर मौजूदा मान सरकार को सड़क से लेकर विधानसभा तक घेरने की ठोस रणनीति तैयार करेंगे।

क्या पायलट का 'राजस्थान मॉडल' पंजाब में ला पाएगा एकजुटता?

सचिन पायलट जब राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने बिखरी हुई पार्टी को एकजुट कर पांच साल के कड़े संघर्ष के बाद सत्ता तक पहुंचाया था। पंजाब के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि पायलट अपनी उसी संगठनात्मक क्षमता, युवाओं में लोकप्रियता और आक्रामक भाषण शैली से पंजाब कांग्रेस में भी नई जान फूंकेंगे। अब देखना यह होगा कि अमृतसर से शुरू होने वाले इस दौरे के बाद क्या पंजाब के दिग्गज क्षत्रप अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक झंडे तले खड़े होते हैं, या फिर गुटबाजी का जिन्न आने वाले दिनों में पायलट की राह में भी रोड़े अटकाता रहेगा।