PU में उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा छावनी बना कैंपस, 24 घंटे खुलने वाली एसी जोशी लाइब्रेरी बंद करने के फरमान पर भड़के छात्र

PU में उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा छावनी बना कैंपस, 24 घंटे खुलने वाली एसी जोशी लाइब्रेरी बंद करने के फरमान पर भड़के छात्र

पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू), चंडीगढ़ में देश के उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के चांसलर के कल प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे में जबरदस्त हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और चंडीगढ़ पुलिस के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पूरे विश्वविद्यालय परिसर को अभेद्य छावनी में तब्दील किया जा रहा है। इस वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी एक विवादास्पद आंतरिक आदेश ने हजारों छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों के बीच असंतोष की आग भड़का दी है। सुरक्षा व्यवस्था की आड़ में विश्वविद्यालय की रीढ़ मानी जाने वाली ऐतिहासिक 'एसी जोशी लाइब्रेरी' (A.C. Joshi Library) और इसके 24 घंटे संचालित होने वाले आउटर रीडिंग हॉल को बंद करने का निर्देश जारी किया गया है। प्रशासन के इस एकतरफा फैसले के सामने आते ही दिन-रात प्रतियोगी परीक्षाओं और रिसर्च में जुटे छात्रों का धैर्य जवाब दे गया है। छात्र संगठनों और शोधार्थियों ने लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और विश्वविद्यालय प्रबंधन से यह सवाल पूछते हुए लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है कि संवैधानिक पदों पर बैठे गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत के नाम पर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके अधिकारों की बलि क्यों चढ़ाई जा रही है।

उपराष्ट्रपति के आगमन पर छावनी बना पंजाब विश्वविद्यालय, एसी जोशी लाइब्रेरी पर लगा ताला

पंजाब विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा उपराष्ट्रपति के कल होने वाले गरिमामयी कार्यक्रम की मेजबानी की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटा हुआ है। उपराष्ट्रपति पंजाब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) भी हैं, इसलिए उनके दौरे को लेकर प्रोटोकॉल अत्यंत संवेदनशील और सख्त रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य प्रवेश द्वारों, वीआईपी रूट, ऑडिटोरियम और प्रशासनिक भवनों का सघन सुरक्षा ऑडिट किया गया है। इसी सुरक्षा ड्रिल के तहत प्रशासन ने एक आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया, जिसमें कहा गया कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से एसी जोशी लाइब्रेरी की सेवाएं कल पूर्ण रूप से निलंबित रहेंगी।

यह आदेश जारी होते ही लाइब्रेरी के मुख्य अध्ययन कक्षों, रीडिंग हॉल और डिजिटाइजेशन सेक्शन में मौजूद हजारों छात्र हैरान रह गए। एसी जोशी लाइब्रेरी केवल एक सामान्य वाचनालय नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में शुमार है, जहां प्रतिदिन तीन से चार हजार विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। विशेष रूप से लाइब्रेरी का आउटर रीडिंग हॉल चौबीसों घंटे खुला रहता है, जहां रातभर छात्र पढ़ाई करते हैं। अचानक बिना किसी अग्रिम सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के लाइब्रेरी के मुख्य गेट पर ताला लगाने का फैसला छात्रों के लिए किसी मानसिक आघात से कम साबित नहीं हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं और शोधार्थियों का फूटा गुस्सा: 'सुरक्षा के नाम पर शिक्षा की बलि क्यों?'

लाइब्रेरी बंद करने के प्रशासनिक तुगलकी फरमान के विरोध में छात्र समुदाय तुरंत लामबंद हो गया। छात्रों का कहना है कि वर्तमान समय विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं का पीक सीजन है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्य परीक्षा, पंजाब व हरियाणा न्यायिक सेवा (PCS Judicial), यूजीसी नेट (UGC NET), गेट और विभिन्न पीएचडी शोध कार्यों के सबमिशन की अंतिम तिथियां सिर पर हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर एक पूरा दिन और रात अध्ययन स्थल से वंचित कर देना सीधे तौर पर छात्रों के करियर से खिलवाड़ करने जैसा है।

प्रदर्शनकारी छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने लाइब्रेरी के बाहर एकत्र होकर मुख्य सुरक्षा अधिकारी और छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) के कार्यालय के सामने तीखा विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि उपराष्ट्रपति विश्वविद्यालय के चांसलर हैं और उनके आने से छात्रों को अकादमिक रूप से गौरवान्वित होना चाहिए, न कि उनके आने पर छात्रों को अपनी ही अध्ययन मेज से खदेड़ दिया जाए। छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल उठाया कि यदि वीआईपी कार्यक्रम लॉ ऑडिटोरियम या यूनिवर्सिटी हॉल में होना है, तो उससे सैकड़ों मीटर दूर स्थित लाइब्रेरी को पूरी तरह सील करने का क्या औचित्य है? छात्रों ने मांग की है कि यदि मुख्य लाइब्रेरी को सुरक्षा कारणों से बंद भी किया जाता है, तो कम से कम आउटर रीडिंग हॉल को सुरक्षित जांच के बाद खुला रखा जाना चाहिए था।

वीआईपी प्रोटोकॉल बनाम छात्र अधिकार: प्रशासन की दलील और सुरक्षा व्यवस्था का ब्लूप्रिंट

छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच पंजाब विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। प्रशासन का तर्क है कि देश के उपराष्ट्रपति को 'जेड प्लस' (Z-Plus) और विशिष्ट वीआईपी सुरक्षा कवच प्राप्त होता है। जब भी किसी अति-विशिष्ट अतिथि का दौरा शैक्षणिक संस्थान में होता है, तो केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस द्वारा 'ब्लू बुक' (Blue Book) के नियमों के अनुसार पूरे क्षेत्र का 'एंटी-सबोटेज चेक' और रूट सैनिटाइजेशन किया जाता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार एसी जोशी लाइब्रेरी विश्वविद्यालय के मध्य भाग में स्थित है और यह वीआईपी रूट के बिल्कुल निकट पड़ती है। लाइब्रेरी में प्रतिदिन बाहरी छात्रों, पूर्व विद्यार्थियों और शोधार्थियों की अनियंत्रित आवाजाही रहती है, जिससे सुरक्षा जांच में गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि किसी भी संभावित सुरक्षा चूक को टालने और कैंपस में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन लाइब्रेरी परिसर को खाली कराने और अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, अधिकारी यह स्वीकार करने से कतरा रहे हैं कि इस निर्णय से पहले छात्रों के साथ कोई संवाद स्थापित नहीं किया गया और न ही उनके लिए किसी अन्य वैकल्पिक शांत स्थान की व्यवस्था की गई।

उत्तर भारत के छात्रों का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र: पंजाब, हरियाणा से लेकर यूपी तक के युवा प्रभावित

पंजाब विश्वविद्यालय केवल चंडीगढ़ के स्थानीय छात्रों का संस्थान नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर भारत की बौद्धिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। यहां पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए हजारों छात्र हॉस्टलों और पीजी में रहकर अपनी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उत्तर प्रदेश के उन्नाव, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और पश्चिमी यूपी से आने वाले सैकड़ों छात्र विशेष रूप से एसी जोशी लाइब्रेरी के समृद्ध और वातानुकूलित वातावरण में घंटों अध्ययन करते हैं क्योंकि हॉस्टल के कमरों में भीषण गर्मी और उमस के बीच अध्ययन की ऐसी अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं।

हॉस्टलों में रहने वाले शोधार्थियों का कहना है कि उनके शोध पत्र, लैपटॉप, संदर्भ ग्रंथ और रिसर्च नोट्स लाइब्रेरी के अंदर उनके आवंटित कैरल्स (Study Carrels) में रखे हुए हैं। अचानक लाइब्रेरी बंद हो जाने से उनका पूरा दैनिक अध्ययन चक्र और समय सारिणी ध्वस्त हो गई है। कई ऐसे छात्र हैं जो लाइब्रेरी के कैंटीन और लॉन पर निर्भर रहते हैं। अंतर्राज्यीय छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य शिक्षण और शोध है, और जब संस्थान अपने प्राथमिक उद्देश्य को ही दरकिनार कर वीआईपी संस्कृति को प्राथमिकता देने लगे, तो इससे पूरे देश में शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा पर नकारात्मक संदेश जाता है।

वैकल्पिक व्यवस्था की उठी मांग, छात्र संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

एसी जोशी लाइब्रेरी को बंद करने के आदेश के बाद कैंपस में तनाव की स्थिति बनी हुई है। विभिन्न छात्र संगठनों ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा है। इस ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि इस अनुचित आदेश को तुरंत संशोधित किया जाए। यदि मुख्य लाइब्रेरी ब्लॉक की सुरक्षा अति संवेदनशील है, तो जिमनेजियम हॉल, बॉटनिकल गार्डन ऑडिटोरियम या विश्वविद्यालय के किसी अन्य सुसज्जित सेमिनार हॉल में तत्काल प्रभाव से अस्थायी रीडिंग रूम स्थापित किया जाए, जहां जेनरेटर बैकअप, इंटरनेट और पेयजल की समुचित व्यवस्था हो।

छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने छात्रों की जायज मांगों पर शीघ्र लिखित स्पष्टीकरण जारी नहीं किया और अध्ययन की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, तो वे उपराष्ट्रपति के आगमन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी तख्तियों के साथ लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराएंगे। छात्रों का कहना है कि वे किसी वीआईपी कार्यक्रम का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी बुनियादी शैक्षिक सुविधाओं को छीने जाने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। प्रशासन अब इस बात को लेकर पशोपेश में है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की कठोर शर्तों और छात्रों के मुखर होते आंदोलन के बीच संतुलन कैसे साधा जाए, ताकि कल होने वाला उच्चस्तरीय कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।