हरिमंदिर साहिब में प्रकाश पर्व की अभूतपूर्व छटा: 50 हजार दीपों और विदेशी फूलों से सजा दरबार
सिख पंथ के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व बड़े ही श्रद्धा, उल्लास और अलौकिक ठाठ-बाट के साथ मनाया जा रहा है। गुरुनगरी अमृतसर में देश-विदेश से लाखों की तादाद में संगत शीश नवाने पहुंची है। अमृत सरोवर के चारों ओर फैली आस्था की लहर, गुरबाणी के गूंजते कीर्तन और रोशनी से सराबोर दरबार साहिब का परिसर एक अलौकिक आनंद का अहसास करा रहा है। सुबह के ब्रह्ममुहूर्त से ही हरिमंदिर साहिब की पवित्र परिक्रमा में श्रद्धालुओं का अथाह सैलाब उमड़ पड़ा। प्रकाश पर्व के इस पावन ऐतिहासिक अवसर पर स्वर्ण मंदिर की भव्य और मनमोहक सजावट ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
50 टन देशी-विदेशी फूलों की महक से महका दरबार साहिब परिसर
इस वर्ष प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और मुख्य दर्शनी ड्योढ़ी को सजाने के लिए करीब 50 टन से अधिक ताजे और सुगंधित फूलों का इस्तेमाल किया गया है। इन फूलों को खास तौर पर भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा थाईलैंड, केन्या, हॉलैंड, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों से विशेष उड़ानों के जरिए मंगवाया गया है।
दिल्ली, मुंबई और पंजाब के करीब 300 से अधिक अनुभवी कारीगरों और सेवादारों ने पिछले कई दिनों की अनवरत सेवा के बाद फूलों की अद्भुत कलाकृतियां, भव्य मेहराब और शानदार तोरणद्वार तैयार किए हैं। ऑर्चिड, कारनेशन, गुलाब, गेंदा, लिलियम और एंथ्यूरियम जैसे दुर्लभ फूलों की लड़ियों से सजी दीवारें और छतें दरबार साहिब की भव्यता में चार चांद लगा रही हैं। फूल बंगले के दर्शन करने के लिए परिक्रमा में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से सजा अलौकिक नगर कीर्तन
प्रकाश पर्व के इस पावन मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की अगुवाई में गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक एक विशाल और भव्य अलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। यह वही ऐतिहासिक मार्ग है जिस पर 1604 ईस्वी में सिखों के पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी ने आदि ग्रंथ की पावन बीड़ को अपने शीश पर रखकर बाबा बुड्ढा जी के साथ पहली बार हरिमंदिर साहिब में प्रतिष्ठित किया था।
पंज प्यारों की रहनुमाई और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में निकले इस नगर कीर्तन में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे। नगर कीर्तन के मार्ग पर विभिन्न धार्मिक सभाओं, सामाजिक संगठनों और संगत ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। गतका दलों के रणबांकुरों ने पारंपरिक सिख युद्धकला के हैरतअंगेज करतब दिखाकर उपस्थित जनसमूह को जोश से भर दिया। पूरे रास्ते में संगत के लिए जगह-जगह लंगर, मिष्ठान और शीतल जल की अटूट छबीलें लगाई गईं।
अमृत सरोवर में आस्था की डुबकी और 'जलौ' (अलौकिक खजाने) के दर्शन
प्रकाश पर्व के दिन अमृत वेले से ही लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र अमृत सरोवर में स्नान कर आत्मिक शांति का अनुभव किया। इस पावन अवसर पर हरिमंदिर साहिब के गर्भगृह, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में ऐतिहासिक और बेशकीमती वस्तुओं का 'जलौ' (विशाल प्रदर्शन) सजाया गया।
इस जलौ में महाराजा रणजीत सिंह और सिख मिसलों के काल के दुर्लभ हीरे, सोने-चांदी के छत्र, जवाहरात, नगीने, सोने के दरवाजे और ऐतिहासिक शस्त्र शामिल हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों और सिखी के गौरवशाली अतीत के साक्षात् दर्शन पाने के लिए परिक्रमा में दूर-दूर तक केवल श्रद्धालुओं के सिर ही नजर आ रहे थे। संगत 'सतनाम वाहेगुरु' का सिमरन करते हुए कतारबद्ध होकर शांतिपूर्वक शीश झुका रही थी।
शाम को दीपमाला और अलौकिक आतिशबाजी से रोशन होगा आसमान
प्रकाश पर्व की शाम को सचखंड परिसर की छटा और भी भव्य व आध्यात्मिक हो जाती है। पूरे परिक्रमा क्षेत्र और अमृत सरोवर की दीवारों पर देसी घी और तेल के 50 हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जा रहे हैं। स्वर्ण मंदिर की सुनहरी आभा पानी के अक्स में मिलकर एक अद्भुत दृश्य रचती है।
इसके साथ ही रहरास साहिब के पाठ के उपरांत रात के समय पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन एवं इको-फ्रेंडली) अलौकिक आतिशबाजी चलाई जा रही है। रंग-बिरंगी रोशनी और डिजिटल लाइटों से नहाया हुआ स्वर्ण मंदिर ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो जमीन पर स्वर्ग उतर आया हो। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा, चिकित्सा, परिक्रमा व्यवस्था और 24 घंटे चलने वाले गुरु के लंगर के विशेष व सुगम इंतजाम किए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाली संगत को किसी प्रकार की असुविधा न हो।