अंशुल कंबोज के मुरीद हुए कप्तान शुभमन गिल; ईडन पार्क में जीत के बाद तारीफ में पढ़े कसीदे

अंशुल कंबोज के मुरीद हुए कप्तान शुभमन गिल; ईडन पार्क में जीत के बाद तारीफ में पढ़े कसीदे

ऑकलैंड: न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने 5 विकेट से शानदार जीत दर्ज कर पांच मैचों की द्विपक्षीय सीरीज में 1-0 की मजबूत बढ़त बना ली है। इस मुकाबले में भले ही विराट कोहली के आक्रामक 74 रनों और अर्शदीप सिंह के 4 विकेटों ने मुख्य सुर्खियां बटोरी हों, लेकिन मैच के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल की जुबान पर जिस खिलाड़ी का नाम सबसे ज्यादा रहा, वह हैं युवा तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज। न्यूजीलैंड की उछाल भरी और तेज पिच पर कंबोज ने जिस अनुशासन, नियंत्रण और परिपक्वता के साथ गेंदबाजी की, उसने टीम प्रबंधन और कप्तान का दिल पूरी तरह जीत लिया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कप्तान शुभमन गिल बेहद खुश नजर आए और उन्होंने खुलकर कहा कि 'अंशुल की गेंदबाजी वास्तव में शानदार थी।' गिल ने रेखांकित किया कि किसी युवा तेज गेंदबाज के लिए विदेशी धरती पर अपने शुरुआती दौर में इस तरह का धैर्य और लाइन-लेंथ बनाए रखना बेहद दुर्लभ होता है।

ईडन पार्क में दिखा अंशुल कंबोज का जलवा, लाइन और लेंथ से बांधा कीवी बल्लेबाजों को

टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी भारतीय टीम के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल थीं, लेकिन ऑकलैंड का ईडन पार्क अपनी छोटी बाउंड्रीज और अजीबोगरीब कोणों के कारण किसी भी गेंदबाज के लिए आसान नहीं माना जाता। यहां थोड़ी सी भी दिशाहीन गेंद आसानी से सीमा रेखा के पार चली जाती है। ऐसे दबाव भरे माहौल में अंशुल कंबोज को जब पहली बार गेंद थमाई गई, तो उन्होंने पहली ही गेंद से अपनी ताकत यानी सटीक 'गुड लेंथ' पर टप्पा खिलाना शुरू किया। कंबोज ने कीवी बल्लेबाजों को न तो आगे झुककर ड्राइव लगाने की खुली जगह दी और न ही इतना छोटा फेंका कि वे बैकफुट पर जाकर पुल या कट खेल सकें। उन्होंने लगातार स्टंप-टू-स्टंप और चौथे स्टंप की लाइन पर गेंद को हिट कराया। हवा में लेट-मूवमेंट और पिच से मिलने वाली सीम की मदद से कंबोज ने न्यूजीलैंड के मध्यक्रम के बल्लेबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। उनके कसे हुए स्पेल का ही नतीजा था कि कीवी बल्लेबाज रनों के लिए तरस गए और अंततः बड़े शॉट खेलने के चक्कर में अपना धैर्य खो बैठे।

'उसकी गेंदबाजी वास्तव में शानदार थी': कप्तान शुभमन गिल ने खोलकर की तारीफ

मैच के बाद जब पत्रकारों ने कप्तान शुभमन गिल से टीम के गेंदबाजी प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा, तो गिल ने बिना किसी हिचकिचाहट के अंशुल कंबोज की जमकर पीठ थपथपाई। गिल ने कहा कि एक कप्तान के रूप में जब आप किसी युवा गेंदबाज को गेंद सौंपते हैं, तो आप केवल विकेट की उम्मीद नहीं करते, बल्कि यह चाहते हैं कि वह मैच की योजना पर अडिग रहे और विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखे। गिल ने कहा, "अंशुल ने ठीक वही किया जो टीम मीटिंग में तय हुआ था। उसकी गेंदबाजी वास्तव में शानदार थी। उसने परिस्थितियों को बहुत जल्दी भांपा और बिना किसी घबराहट के अपनी बुनियादी ताकतों पर भरोसा किया। जब कोई गेंदबाज एक ही टप्पे पर लगातार छह गेंदें फेंकने का अनुशासन दिखाता है, तो विरोधी टीम के लिए साझेदारियां बनाना नामुमकिन हो जाता है।" गिल ने यह भी जोड़ा कि कंबोज का यह आत्मविश्वास ड्रेसिंग रूम के माहौल को बेहद सकारात्मक बना रहा है और इससे पूरी बॉलिंग यूनिट का हौसला कई गुना बढ़ जाता है।

विराट कोहली का सुपरमैन कैच और कंबोज की योजनाबद्ध गेंदबाजी का तालमेल

इस मुकाबले का सबसे रोमांचक और चर्चित लम्हा तब देखने को मिला जब अंशुल कंबोज की एक चतुराई भरी गेंद पर दिग्गज विराट कोहली ने हवा में उड़ते हुए एक हाथ से अविश्वसनीय कैच लपका। न्यूजीलैंड की पारी के दौरान कीवी ऑलराउंडर नाथन स्मिथ क्रीज पर टिककर पारी को संभालने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। कंबोज ने स्मिथ की कमजोरी को भांपते हुए ऑफ स्टंप के बाहर बैक ऑफ लेंथ गेंद डाली, जिस पर बल्लेबाज ने बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने का प्रयास किया। गेंद में अतिरिक्त उछाल थी जिसके कारण शॉट बल्ले के ऊपरी हिस्से से टकराया। बैकवर्ड पॉइंट पर मुस्तैद 38 वर्षीय विराट कोहली ने चीते जैसी फुर्ती दिखाते हुए दाईं ओर हवा में छलांग लगाई और एक हाथ से सनसनीखेज कैच लपक लिया। इस विकेट का श्रेय जहां कोहली की सुपरमैन जैसी फिटनेस को जाता है, वहीं इसकी पूरी पटकथा कंबोज की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। विकेट गिरने के बाद कोहली ने भी दौड़कर कंबोज को गले लगाया और उनकी सटीक योजना की दाद दी।

घरेलू क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी से भारतीय टीम तक: कंबोज का संघर्ष और उभार

अंशुल कंबोज का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चमकता प्रदर्शन कोई तुक्का या रातों-रात मिली सफलता नहीं है, बल्कि यह भारतीय घरेलू क्रिकेट की भट्टी में तपकर निकली शुद्ध प्रतिभा का परिणाम है। हरियाणा के करनाल से ताल्लुक रखने वाले कंबोज ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अपनी धारदार गेंदबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक ही पारी में सभी 10 विकेट झटकने का ऐतिहासिक कारनामा करके कंबोज पहले ही पूरे देश में तहलका मचा चुके थे। इसके अलावा दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और भारत-ए के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने लगातार साबित किया कि उनके पास लाल और सफेद दोनों गेंदों से बल्लेबाजों को छकाने का हुनर है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में मुंबई इंडियंस और अन्य फ्रेंचाइजी के लिए खेलते हुए दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी करने के अनुभव ने उनके स्वभाव को बेहद शांत और जुझारू बना दिया है। यही घरेलू अनुभव आज विदेशी दौरों पर उनके सबसे बड़े हथियार के रूप में सामने आ रहा है।

जसप्रीत बुमराह और शमी के वर्कलोड के बीच भारत को मिला भरोसेमंद सीम गेंदबाज

भारतीय क्रिकेट टीम प्रबंधन इस समय सीनियर तेज गेंदबाजों के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर बेहद सतर्क है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाजों को लंबे टेस्ट सत्रों और आईसीसी इवेंट्स के लिए तरोताजा रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में भारतीय टीम को ऐसे तेज गेंदबाजों की सख्त जरूरत है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई और पुरानी गेंद से निरंतरता दिखा सकें। अंशुल कंबोज की सबसे बड़ी खासियत उनका मजबूत और संतुलित सीम प्रेजेंटेशन (Seam Presentation) है। जब गेंद पिच पर गिरती है, तो उनकी सीम हमेशा सीधी और ऊपर की ओर रहती है, जिसके कारण गेंद को दोनों तरफ मूवमेंट मिलता है। भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर और गेंदबाजी कोच लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत के पास पेस अटैक में ऐसा बैकअप पूल होना चाहिए जो किसी भी समय मैदान पर उतरकर मैच जिता सके। कंबोज ने ईडन पार्क में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने यह साबित कर दिया है कि वे भारतीय तेज गेंदबाजी के भविष्य के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं।

2027 वर्ल्ड कप के विजन में अंशुल कंबोज की भूमिका और आगे की राह

भारतीय टीम इस समय साल 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप की लंबी तैयारी के रोडमैप पर काम कर रही है। दक्षिण अफ्रीका की तेज और उछाल भरी पिचों पर कंबोज जैसे 'हिट द डेक' (पिच पर गेंद को तेजी से पटकने वाले) गेंदबाज बेहद घातक साबित हो सकते हैं। कप्तान शुभमन गिल ने अपने बयान में परोक्ष रूप से यह संकेत भी दिया कि टीम प्रबंधन युवा गेंदबाजों को लगातार मौके देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाना चाहता है ताकि वे बड़े टूर्नामेंट्स के दबाव को झेलने के लिए पूरी तरह परिपक्व हो सकें। पांच मैचों की इस सीरीज के बाकी बचे मुकाबलों में भी कंबोज से इसी तरह के अनुशासित प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। अगर कंबोज अपने इस फॉर्म को बरकरार रखते हैं, तो न केवल वे वनडे टीम में अपनी जगह पक्की कर लेंगे, बल्कि टेस्ट प्रारूप में भी उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे बहुत जल्द खुल सकते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम युवाओं की प्रतिभा पर पूरा भरोसा जता रही है और अंशुल कंबोज उस भरोसे की कसौटी पर पूरी तरह खरे उतर रहे हैं।