'वैभव सूर्यवंशी जैसा खिलाड़ी पाकिस्तान को भी चाहिए': वसीम अकरम ने PCB को लगाई लताड़, भारत की युवा प्रतिभा देख कही बड़ी बात

'वैभव सूर्यवंशी जैसा खिलाड़ी पाकिस्तान को भी चाहिए': वसीम अकरम ने PCB को लगाई लताड़, भारत की युवा प्रतिभा देख कही बड़ी बात

भारतीय क्रिकेट के घरेलू ढांचे और प्रतिभा तराशने के मजबूत सिस्टम ने एक बार फिर सीमा पार पाकिस्तान के क्रिकेट पंडितों को आईना दिखा दिया है। बिहार के समस्तीपुर से निकले महज 13 साल के बाएं हाथ के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के विस्फोटक प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही तारीफों के बीच 'स्विंग के सुल्तान' कहे जाने वाले पाकिस्तान के महान पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम (Wasim Akram) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की कार्यशैली पर जमकर भड़ास निकाली है। वसीम अकरम ने भारत के जमीनी क्रिकेट स्ट्रक्चर की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान को भी वैभव सूर्यवंशी जैसी निडर और आक्रामक युवा प्रतिभा की सख्त दरकार है, लेकिन पीसीबी की लचर नीतियों और घरेलू क्रिकेट की अनदेखी के चलते वहां ऐसी प्रतिभाएं उभरने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।

सिर्फ 13 साल की उम्र में रचा इतिहास: क्यों पूरी दुनिया में हो रही वैभव की चर्चा?

वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट में बेहद कम उम्र में जो मुकाम हासिल किया है, उसने क्रिकेट जगत के दिग्गजों को हैरान कर दिया है। रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने से लेकर भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे तेज युवा शतक ठोकने तक, वैभव का बल्ला हर जगह बोला है। आईपीएल की मेगा नीलामी में जब राजस्थान रॉयल्स ने इस 13 वर्षीय लड़के पर करोड़ों की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया, तो वे आईपीएल इतिहास के सबसे युवा अनुबंधित खिलाड़ी बन गए। मैदान पर उनका फुटवर्क, गेंद को टाइम करने की कला और 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंदों पर बेखौफ पुल व कट शॉट खेलने का अंदाज उन्हें अपनी उम्र के अन्य खिलाड़ियों से कोसों आगे खड़ा करता है।

'हमारे यहां टैलेंट को कुर्सी की राजनीति खा रही': वसीम अकरम का पीसीबी पर वार

एक स्पोर्ट्स चैनल के टॉक शो में बोलते हुए वसीम अकरम ने भारत और पाकिस्तान के मौजूदा क्रिकेट स्तर की तुलना करते हुए पीसीबी को जमकर आड़े हाथों लिया। अकरम ने कहा कि भारत लगातार ऐसे युवा खिलाड़ियों को सामने ला रहा है जो 13 से 18 साल की उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार दिखते हैं।

अकरम ने तल्ख लहजे में कहा, "वैभव सूर्यवंशी को देखिए, वह महज 13 साल का है लेकिन जब वह क्रीज पर उतरता है, तो उसके खेल में किसी मंझे हुए अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज जैसी परिपक्वता और निडरता दिखती है। पाकिस्तान को भी ऐसे ही वैभव सूर्यवंशी जैसे निडर और आक्रामक खिलाड़ियों की सख्त जरूरत है। लेकिन हमारे यहां सिस्टम का हाल यह है कि हर छह महीने में पीसीबी का चेयरमैन बदल जाता है, चयनकर्ता बदल जाते हैं और घरेलू क्रिकेट का ढांचा ही तबाह कर दिया गया है। जब आपके पास जमीनी स्तर पर युवाओं को निखारने का कोई रोडमैप ही नहीं होगा, तो नए सितारे कहां से पैदा होंगे?"

बीसीसीआई के ग्रासरूट मॉडल और राहुल द्रविड़-एनसीए की तारीफ

वसीम अकरम ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के ग्रासरूट डेवलपमेंट प्रोग्राम, नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) और घरेलू टूर्नामेंटों की संरचना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में अंडर-16, अंडर-19, कूच बिहार ट्रॉफी, वीनू मांकड़ ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी का कैलेंडर इतना व्यवस्थित है कि किसी भी असाधारण प्रतिभा को छिपने की जगह नहीं मिलती।

अकरम ने रेखांकित किया कि राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों ने वर्षों तक अंडर-19 और भारत 'ए' टीमों के साथ काम करके जो पाइपलाइन तैयार की है, उसी का नतीजा है कि यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल और अब वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी सीधे उच्चतम स्तर पर आकर मैच विनर बन रहे हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तान में युवा खिलाड़ियों को न तो आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं और न ही उन्हें मानसिक मजबूती देने वाला कोई पेशेवर कोचिंग सेटअप उपलब्ध है।

टी20 और आधुनिक क्रिकेट में पाकिस्तान की पिछड़ती बल्लेबाजी

वसीम अकरम ने यह भी चेतावनी दी कि आधुनिक व्हाइट-बॉल क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है, जहां पहले ओवर से ही गेंदबाजों पर हावी होने वाले बल्लेबाजों की जरूरत होती है। पाकिस्तान की मौजूदा बल्लेबाजी आज भी 90 के दशक की पुरानी, धीमी और टुक-टुक शैली में फंसी हुई है, जहां 120-130 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए जा रहे हैं।

अकरम ने पीसीबी को नसीहत देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी खोई हुई साख वापस पानी है, तो उसे कुर्सी की सियासत और आपसी गुटबाजी छोड़कर भारत के मॉडल से सीख लेनी होगी। स्कूल और जिला स्तर पर स्काउटिंग नेटवर्क मजबूत करना होगा ताकि गलियों में खेलने वाले हुनरमंद बच्चों को ढूंढकर वैभव सूर्यवंशी की तरह विश्व स्तरीय मंच के लिए तराशा जा सके।