मिताली राज को पछाड़ महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दुनिया की नंबर-1 बल्लेबाज बनीं स्मृति मंधाना

मिताली राज को पछाड़ महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दुनिया की नंबर-1 बल्लेबाज बनीं स्मृति मंधाना

भारतीय महिला क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में 3 सितंबर का दिन हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारतीय महिला टीम की उपकप्तान और धाकड़ बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों को मिलाकर सर्वाधिक रन बनाने का सर्वकालिक विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचते ही उन्होंने अपने ही देश की महान पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज मिताली राज को पीछे छोड़ दिया, जो लंबे समय से महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी के रूप में शीर्ष पर काबिज थीं। 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रनों के इस जादुई आंकड़े को पार करने के बाद दुनिया भर से मंधाना को बधाइयों का तांता लग गया है, लेकिन इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद भी इस भारतीय स्टार के पांव पूरी तरह जमीन पर टिके हुए हैं।

बीसीसीआई (BCCI) को दिए अपने विशेष और दिल खोलकर किए गए इंटरव्यू में स्मृति मंधाना ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बेहद परिपक्व और प्रेरणादायक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब वह मैदान पर बल्ला लेकर उतरती हैं, तो उनके दिमाग में कभी कोई व्यक्तिगत माइलस्टोन, शतक या रन संख्या का हिसाब-किताब नहीं चल रहा होता है। उनका मानना है कि एक खिलाड़ी का प्राथमिक कर्तव्य सिर्फ अपनी टीम को मैच जिताना होता है, और यदि आपकी प्राथमिकताएं राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं, तो व्यक्तिगत रिकॉर्ड अपने आप पीछे-पीछे चले आते हैं।

'नंबर्स के लिए कभी नहीं खेला, सिर्फ इंडिया को मैच जिताना मेरा काम': मंधाना का बेबाक अंदाज

रिकॉर्ड्स को लेकर अपनी सोच स्पष्ट करते हुए मंधाना ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे हमेशा यह लगता रहा है कि रन बनाना मेरा काम है। मैंने कभी यह सोचकर बल्ला नहीं उठाया कि मुझे फलां रिकॉर्ड तोड़ना है या किसी खास आंकड़े तक पहुंचना है। जब आप इंडिया की जर्सी पहनते हैं, तो आप सिर्फ और सिर्फ इस बारे में सोचते हैं कि अपनी टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा मुकाबले कैसे जीते जाएं। मैंने भी अपने पूरे करियर में इसके अलावा किसी दूसरी चीज के बारे में कभी नहीं सोचा। रिकॉर्ड्स सिर्फ एक पैमाना भर होते हैं। आप जब रिटायर होंगे तो यह साथ नहीं ले जाएंगे कि आपने कितने रन बनाए या कितने रिकॉर्ड तोड़े।"

मंधाना ने आगे कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं ज्यादा अहम यह होता है कि उसने अपने दौर में टीम के बाकी साथियों की कितनी मदद की। उन्होंने कहा, "एक चीज जिस पर मुझे वास्तव में गर्व महसूस होता है, वह है दूसरे बल्लेबाजों के लिए क्रीज पर मौजूद रहना, मुश्किल वक्त में उनकी मदद करना और टीम के माहौल को सकारात्मक बनाए रखना। असली संतुष्टि तब मिलती है जब आपकी मौजूदगी से टीम का दूसरा खिलाड़ी भी खुलकर अपना स्वाभाविक खेल खेल सके और देश को जीत दिला सके।"

'मेरे अकेले का वहां होना काफी नहीं': 10 हजार क्लब में 3-4 और भारतीय देखना चाहती हैं मंधाना

स्मृति मंधाना ने भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को लेकर जो सपना साझा किया, उसने यह साबित कर दिया कि उनकी सोच किसी भी साधारण खिलाड़ी से कहीं अधिक व्यापक और दूरदर्शी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,000 रनों के आंकड़े को छूने वाली बल्लेबाजों की सूची का जिक्र करते हुए मंधाना ने कहा कि वह इस मुकाम पर अकेले खड़े होकर खुश नहीं होना चाहतीं। वह चाहती हैं कि भारतीय क्रिकेट का ढांचा इतना मजबूत बने कि आने वाले वर्षों में विश्व क्रिकेट की इस एलीट लिस्ट में भारत का एकछत्र दबदबा दिखाई दे।

मंधाना ने कहा, "आप जानते हैं कि सिर्फ एक खिलाड़ी का शीर्ष पर होना काफी नहीं है। असली सफलता तब है जब आप अपने साथ तीन-चार अन्य खिलाड़ियों को भी उस ऊंचाई तक ले जाएं। मेरा सपना है कि आने वाले समय में जब दुनिया की टॉप-5 रन स्कोरर्स की लिस्ट देखी जाए, तो उसमें कम से कम तीन या चार भारतीय महिला बल्लेबाज शामिल हों। अगर हमारी टीम से और भी खिलाड़ी इस 10 हजार के क्लब में शामिल होते हैं, तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे गर्व का पल होगा। मैं अपने व्यक्तिगत करियर की सफलता को इसी बात से मापना पसंद करूंगी कि मेरे खेलने से भारतीय बल्लेबाजी कितनी मजबूत हुई और कितने नए सितारे तैयार हुए।"

मिताली दी को देखकर बड़े हुए, कभी नहीं सोचा था उनसे आगे निकल पाऊंगी: पूर्व कप्तान को दिया सम्मान

अपनी सीनियर और महिला क्रिकेट की अग्रदूत मानी जाने वाली मिताली राज का रिकॉर्ड तोड़ने पर स्मृति मंधाना बेहद भावुक और विनीत नजर आईं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय मिताली राज द्वारा तैयार की गई उस मजबूत जमीन को दिया, जिस पर आज की पीढ़ी खुलकर खेल रही है। मंधाना ने कहा कि जब वह बचपन में क्रिकेट की बारीकियां सीख रही थीं, तब पूरे देश में सिर्फ एक ही नाम गूंजता था और वह नाम मिताली राज का था।

मंधाना ने कहा, "हम सभी मिताली दी को बल्लेबाजी करते हुए देखकर बड़े हुए हैं। मैं पूरे यकीन के साथ कहूंगी कि वह हम सभी के लिए, और देश की हर उभरती हुई महिला क्रिकेटर के लिए सबसे बड़ी आदर्श (Idol) रही हैं। उन्होंने उस दौर में भारतीय महिला क्रिकेट को संभाला जब सुविधाएं और पहचान आज जैसी नहीं थीं। जब मैंने शुरुआत की थी, तब मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी 10,000 रन बना पाऊंगी या कभी मिताली दी के बनाए रिकॉर्ड से आगे निकल जाऊंगी। लेकिन हां, उनके बनाए कीर्तिमान को छूना और उनसे आगे निकलना निश्चित रूप से एक सुखद एहसास है, जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगी।"

छक्के लगाने की कला में कर रहीं सुधार: लॉन्ग-ऑन और लॉन्ग-ऑफ को क्लियर करने का नया संकल्प

आधुनिक टी-20 और वनडे क्रिकेट की तेज रफ्तार को देखते हुए स्मृति मंधाना लगातार अपने तकनीकी तरकश में नए तीर जोड़ रही हैं। आमतौर पर कवर ड्राइव, बैकफुट पंच और नजाकत भरे कट्स के लिए मशहूर मंधाना ने बताया कि वह पिछले काफी समय से अपनी पावर-हिटिंग और हवाई शॉट्स पर कड़ा अभ्यास कर रही हैं। उनका लक्ष्य केवल टाइमिंग के सहारे चौके बटोरना नहीं, बल्कि किसी भी मैदान पर बड़े छक्के लगाने की क्षमता विकसित करना है।

अपनी बल्लेबाजी के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "मैं लगातार इस बात पर काम कर रही हूं कि छक्के मारने की अपनी काबिलियत को कैसे अधिक धारदार बना सकूं। मेरी कोशिश है कि मैं लॉन्ग-ऑफ और लॉन्ग-ऑन के ऊपर से बाउंड्री पार करने का पूरा आत्मविश्वास हासिल कर सकूं। जब आपके पास गेंद को 75-80 मीटर दूर फेंकने का भरोसा होता है, तो विरोधी कप्तान आपके खिलाफ आसानी से फील्ड सेट नहीं कर पाता। मैं चाहती हूं कि हर प्रारूप में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकूं और टीम को जिस स्ट्राइक रेट की जरूरत हो, उस गति से रन बना सकूं।"

'अगर 10% लड़कियां भी बल्ला उठा लें तो सफल हो जाएगा जीवन': अगली पीढ़ी के लिए संदेश

इंटरव्यू के सबसे मार्मिक क्षण में मंधाना ने बताया कि उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का सबसे बड़ा और गहरा मकसद क्या है। उन्होंने कहा कि कोई भी एथलीट केवल अपने लिए नहीं खेलता, बल्कि वह समाज के लिए एक रोल मॉडल की भूमिका निभाता है। खेल का असली प्रभाव तब दिखता है जब वह समाज की सोच और युवाओं के सपनों को नई उड़ान देता है।

मंधाना ने बेहद भावुक शब्दों में कहा, "देखिए, हम सभी हमेशा बल्ला उठाते हैं और मैदान पर पसीना बहाते हैं ताकि देश की और भी बेटियां प्रेरित हो सकें। हम चाहते हैं कि भारत के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों से लड़कियां बाहर निकलें, क्रिकेट खेलना चाहें, टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का सपना देखें और पूरी निष्ठा से देश की सेवा करें। हर किसी को अपना सर्वश्रेष्ठ वर्जन बनने की कोशिश करनी चाहिए। अगर मेरे इस सफर, मेरी मेहनत या मेरी किसी भी बात से प्रेरित होकर देश की महज 10 प्रतिशत लड़कियां भी हाथ में बैट और बॉल उठाकर मैदान की तरफ दौड़ पड़ती हैं, तो मुझे लगेगा कि मेरा क्रिकेट खेलना पूरी तरह सार्थक हो गया। यह एक ऐसी उपलब्धि होगी जिस पर मुझे अपने किसी भी रिकॉर्ड या शतक से कहीं ज्यादा गर्व और आत्मिक खुशी होगी।"