'बीजेपी आरएलडी को 120 सीटें दे, नहीं तो यह चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का अपमान होगा': 'चवन्नी' विवाद पर अखिलेश यादव का करारा पलटवार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'चवन्नी को रुपया बना दिया' वाली टिप्पणी को लेकर छिड़ा सियासी महासंग्राम अब एक नए और बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी द्वारा इसे 'जाट समाज का अपमान' बताए जाने और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती द्वारा सार्वजनिक माफी की मांग किए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जोरदार पलटवार किया है।
लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर बड़ा सियासी पासा फेंका है। अखिलेश ने भाजपा को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा सचमुच अपने सहयोगियों का सम्मान करती है, तो वह आगामी विधानसभा चुनाव में जयंत चौधरी की पार्टी को कम से कम 120 सीटें दे, और यदि भाजपा ऐसा नहीं करती है, तो यह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, चौधरी अजित सिंह और पूरे जाट समाज का सीधा अपमान माना जाएगा।
'हमने 30 दी थीं, तो भाजपा चार गुना यानी 120 सीटें दे': अखिलेश का गणित
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के सीट फॉर्मूले की याद दिलाते हुए भाजपा के गठबंधन धर्म पर तीखा तंज कसा। सपा प्रमुख ने कहा कि जब राष्ट्रीय लोकदल उनके साथ गठबंधन में थी, तब समाजवादी पार्टी ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें 30 से अधिक सीटें दी थीं और उनके विधायकों को जिताने के साथ-साथ जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने का काम भी किया था।
अखिलेश ने कहा, "हम चाहते हैं कि भाजपा के सहयोगी दलों को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलें। हमने जिसे जितनी सीटें दी थीं, भाजपा को उसका कम से कम चार गुना हिस्सा देना चाहिए। इस हिसाब से भाजपा को आरएलडी को 120 सीटें देनी चाहिए। अगर भाजपा जयंत चौधरी को 120 सीटें नहीं देती है, तो इसका मतलब साफ है कि भाजपा किसानों, चौधरी चरण सिंह जी के विचारों और जाट समाज का अनादर कर रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल चुनाव जीतने के लिए छोटे दलों का इस्तेमाल करती है और बाद में उन्हें हाशिए पर धकेल देती है।
जयंत और मायावती के आरोपों पर बोले: 'सच कह दो तो लोग नाराज हो जाते हैं'
जयंत चौधरी के तीखे ट्वीट और मायावती द्वारा जाट समाज से माफी मांगने की मांग पर अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। अखिलेश ने कहा, "आज के दौर में सच बोलना सबसे बड़ा गुनाह हो गया है। सच बोल दो तो लोग नाराज हो जाते हैं। सच जानना है तो पूरा वीडियो संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी जाति या समाज के खिलाफ नहीं थी, बल्कि अवसरवादी राजनीति और गठबंधन छोड़कर जाने के राजनीतिक आचरण पर की गई एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह और किसान कौम का दिल से सम्मान किया है, लेकिन जब कुछ नेता अपने निजी स्वार्थ के लिए विचारधारा से समझौता कर लेते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
एनडीए में सहयोगियों की सीटों का दावा: राजभर, निषाद और अनुप्रिया पर भी साधा निशाना
प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने एनडीए के भीतर चल रहे आंतरिक घमासान और संभावित सीट शेयरिंग के फार्मूले को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने किसी भी सहयोगी दल को सम्मानजनक सीटें देने के मूड में नहीं है।
अखिलेश यादव ने दावा करते हुए कहा कि भाजपा के अंदरूनी सर्वे और बैठकों के मुताबिक, जयंत चौधरी की आरएलडी को मात्र 73 सीटें, ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) को 39 सीटें, डॉ. संजय निषाद की निषाद पार्टी को 31 सीटें और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की अपना दल (सोनेलाल) को केवल 19 सीटें देने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने इन सभी सहयोगी दलों को उनके वास्तविक प्रभाव से काफी कम सीटों पर समेटने की तैयारी में है, जिससे इन दलों के नेताओं का राजनीतिक वजूद खतरे में पड़ जाएगा।
'हम गठबंधन तोड़ने वाले नहीं, साथ निभाने वाले लोग हैं'
सपा मुखिया ने अपनी पार्टी के गठबंधन ट्रैक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी कभी किसी साथी को धोखा नहीं देती और न ही खुद होकर गठबंधन तोड़ती है।
उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी गठबंधन तोड़ने वाली पार्टी नहीं है। हम जब किसी के साथ हाथ मिलाते हैं, तो पूरी ईमानदारी और वफादारी के साथ उसे निभाते हैं। इतिहास उठाकर देख लीजिए, समाजवादी पार्टी को हमेशा लोग अपने फायदे के लिए छोड़कर गए हैं, हमने कभी किसी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया।" उन्होंने दोहराया कि सपा का वर्तमान 'इंडिया' गठबंधन पूरी तरह अटूट है और वे सभी लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष ताकतों को साथ लेकर 2027 के चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
पश्चिमी यूपी में जाट-किसान सियासत का केंद्र बिंदु और 2027 का सियासी रण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, बिजनौर, बुलंदशहर, मथुरा और अलीगढ़ जैसे जिले चुनावी दृष्टि से बेहद संवेदनशील और निर्णायक माने जाते हैं। इन इलाकों में जाट, मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का सामाजिक संतुलन किसी भी दल की जीत-हार तय करता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में जब सपा और रालोद एक साथ लड़े थे, तब पश्चिमी यूपी में एक मजबूत सामाजिक गठबंधन बना था, जिससे रालोद को 8 सीटों पर जीत मिली थी और सपा गठबंधन ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद का एनडीए में जाना और बागपत-बिजनौर लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करना इस बात का संकेत था कि जयंत चौधरी ने अपना पाला बदल लिया है। अब अखिलेश द्वारा 120 सीटों की मांग उछालने के पीछे पश्चिमी यूपी के जाट और किसान मतदाताओं के बीच यह संदेश देने की रणनीति है कि भाजपा के साथ रहकर रालोद को उसका वाजिब राजनीतिक हक कभी नहीं मिल सकता।
परिवारवाद और विपक्ष के हमलों पर अखिलेश का बेबाक तर्क
भाजपा द्वारा समाजवादी पार्टी पर लगातार लगाए जाने वाले 'परिवारवाद' के आरोपों पर अखिलेश यादव ने चुटीले अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों को तोड़ा जा रहा था, तब समाजवादी पार्टी इसलिए नहीं टूटी क्योंकि संगठन की रीढ़ बेहद मजबूत थी और परिवार के सदस्यों ने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखी।
उन्होंने कहा कि सपा में मुस्लिम, पिछड़े, दलित और निष्ठावान समाजवादी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एक साथ खड़े हैं। उन्होंने दोहराया कि सपा का 'पीडीए' (PDA) केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि 'प्रेम, दया और अपनापन' का ऐसा जन-आंदोलन है जो आने वाले समय में नफरत और विभाजनकारी राजनीति को पूरी तरह उखाड़ फेंकेगा।