वोटर लिस्ट विवाद में कांग्रेस की कानूनी धमकी के बाद हरकत में चुनाव आयोग: पीलीभीत मामले में दिए जांच के आदेश

वोटर लिस्ट विवाद में कांग्रेस की कानूनी धमकी के बाद हरकत में चुनाव आयोग: पीलीभीत मामले में दिए जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) में भारी गड़बड़ी के आरोपों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली का दावा करते हुए निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि केवल एक विधानसभा क्षेत्र में कुल 16,554 मतों से जुड़ी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।

कांग्रेस का दावा है कि 13,150 मतदाताओं के वोटर आईडी कार्ड (EPIC) नंबर और क्रम संख्या बिल्कुल समान रखे गए, लेकिन उनके नाम पूरी तरह बदल दिए गए। इसके अलावा, 884 ऐसे स्थानीय मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए जो उसी क्षेत्र में निवास करते हैं, जबकि 2,600 ऐसे फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए जिनका संबंधित इलाके से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस ने याद दिलाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पीलीभीत सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी ने महज 6,930 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी, ऐसे में 16 हजार से ज्यादा वोटों की हेराफेरी सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की साजिश है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी: 'सॉफ्टवेयर से मनमाने बदलाव, एसआईआर रद्द हो'

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, इमरान मसूद और आराधना मिश्रा ने साझा बयान में चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम पर सवाल उठाए। श्रीनेत ने दावा किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अंतिम मसौदा सूची जारी होने के बाद भी सॉफ्टवेयर के जरिए मतदाताओं के नाम, फोटो और विवरणों में चुपचाप बदलाव किए गए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि एक ही पहचान पत्र नंबर पर पहले 35 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ का नाम था, जिसे बाद में बदलकर उसी नंबर पर हसरत कर दिया गया।

पार्टी ने दावा किया कि जब स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उप जिलाधिकारी (SDM) और जिलाधिकारी (DM) स्तर के अधिकारी भी इस सॉफ्टवेयर में फेरबदल की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की सीधी हत्या करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत निष्पक्ष कदम नहीं उठाए, तो पार्टी इस पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करेगी। इसके साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे आयोग की वेबसाइट पर अपने ईपीआईसी नंबर डालकर अपने विवरण की खुद पड़ताल करें।

कांग्रेस के कड़े रुख के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) का एक्शन, जांच के आदेश

कांग्रेस द्वारा मीडिया के सामने सबूत रखने और अदालत जाने की चेतावनी देने के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय हरकत में आ गया। विपक्षी दलों के तीखे तेवरों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत सदर सीट से जुड़े सभी आरोपों की बिंदुवार और समयबद्ध जांच के सख्त आदेश दिए हैं। आयोग ने जिला निर्वाचन तंत्र को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची में दर्ज किए गए किसी भी बदलाव, नाम विलोपन (Deletion) और नए नामों के जोड़े जाने (Addition) के पूरे ऑडिट ट्रेल की तुरंत समीक्षा की जाए।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने इस प्रक्रिया से जुड़े सभी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, एसडीएम, तहसीलदार और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि सत्यापन प्रक्रिया में कोई भी लापरवाही, जानबूझकर की गई त्रुटि या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत सख्त दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार तय समय सीमा के भीतर किए जाएंगे ताकि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे।