गोरखनाथ मंदिर से भव्य विजयादशमी शोभायात्रा: सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे अगुवाई
गोरखपुर की पावन धरा पर स्थित युगों पुरानी गोरक्षपीठ विजयादशमी यानी दशहरा के महापर्व पर अपनी ऐतिहासिक विरासत, सनातन चेतना, जन-कल्याण और सामाजिक समरसता की एक अनोखी मिसाल पेश करने जा रही है। मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 को गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का वैदिक विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न करने के बाद गोरखनाथ मंदिर परिसर से निकलने वाली सदियों पुरानी पारंपरिक विजयादशमी विजय शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह विजय यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के सामाजिक ताने-बाने को एक सूत्र में पिरोने और सनातन संस्कृति की सहिष्णुता व सौहार्द का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु रही है। नगाड़ों, तुरही, शंखध्वनि और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच निकलने वाली इस भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु गोरखपुर पहुंचे हैं।
सुबह शिवावतार गुरु गोरखनाथ का महापूजन, दोपहर में तिलकोत्सव कार्यक्रम में भक्तों को मिलेगा आशीर्वाद
विजयादशमी के पावन अवसर पर दिन की शुरुआत गोरक्षपीठ के कठोर आध्यात्मिक नियमों और साधना के साथ हुई। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में शिवावतार भगवान गुरु गोरखनाथ का षोडशोपचार विधि से विशेष अनुष्ठान और पूजन-अर्चन किया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित सभी देवी-देवताओं के विग्रहों, अखंड ज्योति और शक्तिपीठ के विशिष्ट प्रतीकों की विधिवत अर्चना की गई। अनुष्ठान के बाद मध्याह्न काल में मंदिर के मुख्य सभागार में पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम का विशाल आयोजन रखा गया। इस अनुष्ठान के दौरान नाथपंथ के संतों, पुजारियों, योगियों और दूर-दराज से आए सामान्य श्रद्धालुओं ने गोरक्षपीठाधीश्वर को तिलक लगाकर उनका वंदन किया, जिसके प्रत्युत्तर में पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सभी श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर सुख-समृद्धि, आरोग्य और रक्षा का मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
नाथपंथ की दिव्य वेशभूषा में सजेगा रथ, मानसरोवर मंदिर में महादेव की पूजा और रामलीला मैदान में राज्याभिषेक
विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर नाथपंथ की विशिष्ट पारंपारिक पोशाक और वेशभूषा धारण करते हैं। गुरु गोरखनाथ जी के चरण पादुका का पूजन कर और उनका दिव्य आशीर्वाद लेकर योगी आदित्यनाथ सायंकाल ठीक 4:00 बजे अपने विशेष सुसज्जित रथ पर सवार होंगे। सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंधों और हजारों उत्साही भक्तों के जयघोष के बीच यह विजय शोभायात्रा मंदिर परिसर से प्रस्थान करेगी। शोभायात्रा का पहला मुख्य पड़ाव गोरक्षपीठ से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा मानसरोवर मंदिर होगा। मानसरोवर मंदिर में पहुंचकर गोरक्षपीठाधीश्वर देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक और विशेष आरती करेंगे। इसके उपरांत यह विशाल कारवां मानसरोवर रामलीला मैदान की ओर अग्रसर होगा, जहां ऐतिहासिक रामलीला मंचन के अंतिम दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और भक्त शिरोमणि हनुमान जी के स्वरूपों की महाआरती की जाएगी। इसके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर प्रभु श्रीराम का पारंपरिक राजतिलक कर उनका राज्याभिषेक संपन्न करेंगे और विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विजयादशमी के पावन संदेश को साझा करेंगे।
मुस्लिम समुदाय करता है पुष्पवर्षा से भव्य स्वागत, गंगा-जमुनी तहजीब और समरसता की जीवंत मिसाल
गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली विजयादशमी विजय शोभायात्रा की सबसे बड़ी और दिल छू लेने वाली खासियत इसका सर्वसमावेशी और समरसतावादी स्वरूप है। जब यह शोभायात्रा गोरखनाथ मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर निकलती है, तो अल्पसंख्यक मुस्लिम और बुनकर समुदाय के लोग इसके स्वागत के लिए घंटों पहले से सड़क के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े रहते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार से थोड़ी दूरी पर उर्दू बाजार और आसपास के अल्पसंख्यक व्यापारी व नागरिक फूलमालाओं, पुष्पगुच्छों और इत्र के साथ गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का भव्य इस्तकबाल करते हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि गोरक्षपीठ का सरोकार किसी जाति, पंथ या मजहब के भेद से परे हटकर समूचे समाज की भलाई, सुरक्षा और विकास से जुड़ा हुआ है।
रात में होगा पारंपरिक समरसता सहभोज, बिना किसी जाति-भेद के एक पंगत में बैठेंगे हजारों श्रद्धालु
शोभायात्रा और प्रभु श्रीराम के राजतिलक के बाद देर शाम गोरखनाथ मंदिर परिसर में विशाल पारंपरिक विजयादशमी सहभोज का आयोजन किया जाएगा। गोरक्षपीठ की यह परंपरा सामाजिक समरसता का सर्वोच्च शिखर मानी जाती है, जहां समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ भोजन ग्रहण करते हैं। इस भंडारे में अमीर-गरीब, अगड़े-पिछड़े और किसी भी जातिगत भेदभाव के बिना समाज के हर तबके के लोग एक ही पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर स्वयं सभी संतों, विद्वानों और आम जनता के बीच उपस्थित रहकर इस सामाजिक एकात्मता के पर्व का अवलोकन करते हैं, जिससे यह संदेश पूरे देश में जाता है कि भारत की सनातन शक्ति उसके आंतरिक सद्भाव और सामाजिक एकता में ही समाहित है।