कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध टूटने से हाहाकार: ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CM योगी

कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध टूटने से हाहाकार: ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CM योगी

पड़ोसी देश नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश और भारी जलप्रपात के चलते उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सोमवार देर रात भीषण प्राकृतिक आपदा आ गई। जिले के जवहीं दयाल (चैनपट्टी) क्षेत्र के ततवा टोला के पास नारायणी नदी (गंडक) का एपी तटबंध (AP Embankment) अचानक टूट गया, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया और चारों तरफ त्राहिमाम मच गया। इस गंभीर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को खुद सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के साथ-साथ बस्तियों में पैदल जाकर पीड़ितों का दर्द बांटा और उन्हें प्रशासन की ओर से त्वरित राहत व पुनर्वास का भरोसा दिलाया।

सोमवार रात जैसे ही तटबंध टूटने की सूचना मिली, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ से ही पूरी स्थिति पर सीधी निगरानी रखनी शुरू कर दी थी और संबंधित जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दे दिए थे। मंगलवार को गोरखपुर में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को पूरा करते ही मुख्यमंत्री सीधे कुशीनगर के प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गए। उनके साथ जलशक्ति मंत्री और स्थानीय प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

तटबंध के टूटने से 15 से 16 गांवों में घुसा पानी, फसलों और मकानों को भारी नुकसान

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य दिनों में नारायणी नदी में तीन से चार लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होता है, लेकिन नेपाल में अचानक हुई अतिवृष्टि के कारण यह जलस्तर बढ़कर सीधे साढ़े पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। इस भारी जलप्रवाह के दबाव को एपी तटबंध सहन नहीं कर सका और इसका एक हिस्सा टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप तटबंध से सटे करीब 15 से 16 गांवों में पानी भर गया। इन गांवों में धान की लहलहाती फसलें, गन्ने के खेत और हरी सब्जियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण अपने घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।

स्थिति की नजाकत को भांपते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की दो-दो टीमों के साथ-साथ प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) की फ्लड यूनिट को भी राहत और बचाव कार्यों में झोंक दिया है। स्थानीय सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, सांसद विजय दूबे और क्षेत्र के विधायक लगातार प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर राहत सामग्रियों के वितरण और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के कार्य में जुटे हुए हैं।

सीएम योगी का ऐलान: आपदा पीड़ितों को मिलेगा चार लाख मुआवजा और तुरंत नए आवास

सेवरही क्षेत्र के इंटर कॉलेज बेदुपार में बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री वितरित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार इस संकट की घड़ी में प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को तत्काल 50-50 किलो वजन के राहत सामग्री के पैकेट वितरित किए जाएं, जिसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 2 किलो दाल, आलू, तेल, मसाला, नमक और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री शामिल हैं।

इसके अलावा, सरकार ने घोषणा की है कि इस प्राकृतिक आपदा में यदि किसी व्यक्ति की जनहानि होती है, तो उसके परिजनों को तत्काल 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जिन लोगों के मकान बाढ़ के पानी से पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर तत्काल नया मकान उपलब्ध कराया जाएगा। जिन घरों को आंशिक क्षति पहुंची है, उनकी मरम्मत के लिए भी शासन स्तर से वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों के भीतर फसलों और संपत्तियों के नुकसान का विस्तृत सर्वे कराकर पीड़ितों को मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं और भविष्य के बचाव कार्यों को लेकर सख्त निर्देश

बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में अगले 5 से 6 दिनों तक लगातार विशेष मेडिकल कैंप संचालित किए जाएं। जलजनित बीमारियों, डायरिया और संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयों का वितरण करने को कहा गया है। साथ ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में एंटी-स्नेक वेनम (सर्पविष रोधी इंजेक्शन) और एंटी-रेबीज के टीके अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी नागरिक के जीवन पर कोई संकट न आए।

भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने जलशक्ति विभाग और सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद नारायणी नदी की वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग (Dredging) और चैनेलाइजेशन का कार्य कराया जाए, जिससे नदी का प्रवाह सुगम हो सके और तटबंध सुरक्षित रहें। टूटे हुए एपी तटबंध की युद्धस्तर पर मरम्मत कर उसे और अधिक मजबूत बनाने का कार्य भी तुरंत शुरू करने को कहा गया है।