राम मंदिर दान चोरी मामला: चंपत राय के साथ डॉ. अनिल मिश्रा को भी SIT की बड़ी क्लीन चिट; सबसे ज्यादा लगे थे आरोप, जानें 500 पन्नों की रिपोर्ट का सच

राम मंदिर दान चोरी मामला: चंपत राय के साथ डॉ. अनिल मिश्रा को भी SIT की बड़ी क्लीन चिट; सबसे ज्यादा लगे थे आरोप, जानें 500 पन्नों की रिपोर्ट का सच

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के गर्भगृह और दान पेटियों से चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और चोरी के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट ने पूरे परिदृश्य को स्पष्ट कर दिया है। उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई इस विस्तृत जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के साथ-साथ वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को भी सभी आरोपों से पूरी तरह बरी करते हुए क्लीन चिट दे दी गई है।

गौरतलब है कि जब जून के महीने में मंदिर के दान प्रबंधन में वित्तीय हेरफेर और नकदी चोरी का विवाद सार्वजनिक हुआ था, तब विपक्षी दलों और आलोचकों के सबसे सीधे और तीखे निशाने पर डॉ. अनिल मिश्रा ही थे। अब एसआईटी द्वारा निष्पक्ष फोरेंसिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड के गहन परीक्षण के बाद दोनों प्रमुख पदाधिकारियों का नाम आरोपियों की सूची से बाहर रखे जाने से मंदिर के न्यासियों और समर्थकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

आरोपों के केंद्र में क्यों थे ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा?

राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही मंदिर परिसर के दैनिक प्रशासनिक कार्यों, सुरक्षा समन्वय, दर्शन व्यवस्था और गर्भगृह से जुड़े प्रबंधन की जमीनी निगरानी में डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका बेहद केंद्रीय रही थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और पूर्व प्रांत कार्यवाह रहे डॉ. मिश्रा अयोध्या में रहकर ही ट्रस्ट के ज्यादातर स्थानीय ऑपरेशन्स को संभाल रहे थे।

जब दान पेटियों से नोटों की गड्डियां गायब होने और दान गणना कक्ष (Cash Counting Room) में अनियमितताओं की खबरें सामने आईं, तो विरोधी खेमों ने डॉ. मिश्रा पर सीधे तौर पर लापरवाही बरतने और दान पेटियों के प्रबंधन तंत्र में पारदर्शिता न रखने के गंभीर आरोप लगाए थे। यहां तक कि राजनीतिक मंचों से उनकी सीधी संलिप्तता के दावे भी किए गए थे। इन्हीं विवादों और आरोपों के चलते नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 27 जून को चंपत राय के साथ डॉ. अनिल मिश्रा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और निष्पक्ष एजेंसी से स्वतंत्र जांच की खुली मांग की थी।

एसआईटी की 500 पन्नों की सघन पड़ताल में क्या निकला?

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय एसआईटी ने लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार की सदस्यता में अयोध्या में लगातार कई दिनों तक कैंप किया।

एसआईटी ने मंदिर के स्ट्रांग रूम, दान पात्रों से नकदी संग्रहण (Collection), गणना कक्ष में प्रवेश-निकास रजिस्टर, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों के ड्यूटी रोस्टर और 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के 40 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के सैकड़ों घंटों के फुटेज का फ्रेम-दर-फ्रेम तकनीकी विश्लेषण किया। जांच दल ने लगभग 500 पन्नों की अपनी विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मंदिर के किसी भी शीर्ष ट्रस्टी या पदाधिकारी का इस संगठित चोरी में न तो कोई व्यक्तिगत लाभ था और न ही कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता पाई गई।

70 बार हुई नकदी चोरी, 8 कर्मचारियों पर गिरी कानूनी गाज

एसआईटी की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दान गणना कक्ष में तैनात कुछ कर्मचारियों और आउटसोर्स सहायकों ने मिलीभगत करके 27 अप्रैल से 5 जून के बीच लगभग 70 अलग-अलग मौकों पर नकदी की गड्डियों से नोट चुराए।

जांच में यह पाया गया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ट्रस्ट द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की भारी अनदेखी की गई थी। गणना कक्ष के मुख्य गेट पर सघन फ्रिस्किंग (बॉडी सर्च) न होना, ढीले कपड़ों में प्रवेश की अनुमति और गणना के समय पर्यवेक्षकों की शिथिलता का फायदा उठाकर इन आरोपियों ने अपराध को अंजाम दिया। एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और निम्नलिखित 8 मुख्य आरोपियों को जेल भेजा गया:

  • अविनाश शुक्ला (आउटसोर्स कर्मचारी)

  • अनुकल्प मिश्रा (गणना सहायक)

  • लवकुश मिश्रा (सहयोगी)

  • मनीष कुमार यादव (कैश हैंडलिंग कर्मी)

  • करुणेश पांडेय (सहायक)

  • रमाशंकर मिश्रा (सुरक्षा व गणना स्टाफ)

  • सुभाष श्रीवास्तव (गणना कर्मी)

  • राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू (सहयोगी)

इन सभी 8 अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और फॉरेंसिक सबूत जुटा लिए गए हैं और पुलिस अब इनके खिलाफ न्यायालय में कठोर धाराओं में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर एसआईटी का निष्कर्ष

एसआईटी ने अपनी अंतिम आख्या में विशेष रूप से रेखांकित किया है कि जैसे ही दान गणना के दैनिक आंकड़ों और बैंक में जमा होने वाली कुल राशि में मामूली अंतर (Mismatch) दर्ज होना शुरू हुआ, वैसे ही सबसे पहले चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने ही आंतरिक सतर्कता दल को सक्रिय किया था।

ट्रस्ट के इन पदाधिकारियों ने ही तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाकर सीसीटीवी कैमरों के बैकअप की जांच करवाई थी, जिसके बाद यह चोरी पकड़ी गई। एसआईटी ने निष्कर्ष दिया कि ट्रस्टियों द्वारा तत्काल पुलिस को सूचित करने और जांच में पूरा सहयोग देने का आचरण यह सिद्ध करता है कि वे स्वयं इस गड़बड़ी को उजागर करने वाले पक्ष थे, न कि षड्यंत्रकारी।

₹3,300 करोड़ की निर्माण निधि का स्वतंत्र ऑडिट भी रहा बेदाग

इस पूरे विवाद के दौरान जब मंदिर को मिले ऐतिहासिक ₹3,300 करोड़ के दान पर सवाल उठाए जा रहे थे, तब देश की प्रतिष्ठित थर्ड-पार्टी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म मेसर्स वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी (M/S V Sankar Aiyer & Co.) द्वारा राम मंदिर निर्माण निधि का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया गया।

इस ऑडिट में क्राउडफंडिंग, प्रत्यक्ष दान, चेक, ड्राफ्ट और ऑनलाइन माध्यमों से आए एक-एक पैसे का मिलान मंदिर निर्माण के खर्चों से शत-प्रतिशत सही पाया गया। ऑडिट रिपोर्ट में मंदिर के खातों में किसी भी तरह के वित्तीय गबन या बड़े हेरफेर की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया गया।

मंदिर में लागू हुई अभेद्य त्रिस्तरीय सुरक्षा और नया एसओपी

एसआईटी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित सुरक्षा ऑडिट के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दान प्रबंधन में ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं:

  • एकल शिफ्ट गणना: चढ़ावे की गिनती अब दो पालियों के बजाय सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक केवल एक ही पाली में होती है।

  • सख्त फ्रिस्किंग और बायोमेट्रिक एंट्री: काउंटिंग रूम में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बैंक कर्मी और सहायक की मेटल डिटेक्टर व बायोमेट्रिक स्कैनिंग अनिवार्य कर दी गई है।

  • पॉकेटलेस विशेष यूनिफॉर्म: गणना कक्ष के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली विशेष पोशाक (Pocketless Apron) अनिवार्य कर दी गई है।

  • नया ड्रेस कोड: गर्भगृह और पूजा व्यवस्था से जुड़े अर्चकों व पुजारियों के लिए 15 अगस्त से निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया जा चुका है।

  • पेशेवर सीईओ की नियुक्ति: मंदिर के संपूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और लॉजिस्टिक संचालन को संभालने के लिए एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर नियुक्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

संत समाज में खुशी की लहर, राजनीतिक विवादों पर लगा विराम

डॉ. अनिल मिश्रा और चंपत राय को क्लीन चिट मिलने के बाद अयोध्या के प्रमुख संतों, अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों और रामभक्तों ने संतोष व्यक्त किया है। संतों का कहना है कि जिन्होंने अपने पूरे जीवन को राम मंदिर आंदोलन और निर्माण के लिए समर्पित कर दिया, उन पर बेबुनियाद आरोप लगाकर मंदिर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया था, जो अब एसआईटी की रिपोर्ट से पूरी तरह विफल हो गया है।

वर्तमान में चातुर्मास के एकांतवास और 6 घंटे के मौन व्रत में लीन चंपत राय तथा स्थानीय व्यवस्थाओं से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा के इस निष्कलंक निष्कासन के बाद ट्रस्ट की आगामी बैठक में मंदिर की भावी योजनाओं और सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।