शिवा हत्याकांड: 'मैं बेगुनाह हूं', नागपुर के फ्लैट से 50-50 हजार की इनामी श्रद्धा दुबे

शिवा हत्याकांड: 'मैं बेगुनाह हूं', नागपुर के फ्लैट से 50-50 हजार की इनामी श्रद्धा दुबे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित और सनसनीखेज युवा कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार चल रही मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी सगी बहन रश्मि दुबे और निजी ड्राइवर दानिश को पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के नागपुर से धर दबोचा है। पिछले 11 दिनों से लगातार पुलिस की आंखों में धूल झोंक रही पचास-पचास हजार रुपये की इनामी श्रद्धा दुबे के ठिकाने पर जब लखनऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने नागपुर पुलिस के सहयोग से एक गुप्त फ्लैट पर दबिश दी, तो वह पुलिस बल को अचानक सामने देखकर बुरी तरह घबरा गई। पुलिस गिरफ्त में आते ही उसने चीखते हुए पुलिस अधिकारियों के सामने खुद को बेगुनाह बताना शुरू कर दिया और कहा कि उसका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस के पास उसके खिलाफ तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की लंबी फेहरिस्त मौजूद है, जिसके आधार पर उसे हिरासत में लेकर लखनऊ लाया जा रहा है।

नागपुर के फ्लैट में छिपी थी श्रद्धा दुबे, 19 अक्टूबर की दोपहर मिली थी पुख्ता लोकेशन

राजधानी पुलिस और सर्विलांस सेल की टीम पिछले कई दिनों से आरोपियों के मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट कॉलिंग और करीबियों के संपर्कों को गहनता से ट्रैक कर रही थी। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों को 19 अक्टूबर की दोपहर ही श्रद्धा दुबे और उसके सहयोगियों की सटीक लोकेशन नागपुर के एक रिहायशी इलाके में मिल गई थी। लोकेशन की पुष्टि होते ही लखनऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम को फौरन नागपुर के लिए रवाना किया गया। इसके साथ ही लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थानीय नागपुर पुलिस प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और हत्याकांड से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां साझा करते हुए फ्लैट का घेराव करने की योजना बनाई। मंगलवार सुबह पुख्ता घेराबंदी के बाद संयुक्त टीम ने फ्लैट पर छापा मारा, जहां से श्रद्धा, रश्मि और उनके ड्राइवर दानिश को बिना किसी विरोध का मौका दिए गिरफ्तार कर लिया गया।

हजरतगंज कोतवाली में दर्ज हुआ था बीएनएस धारा 103(1) के तहत मुकदमा, घोषित था 50 हजार का इनाम

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा इस बहुप्रतीक्षित गिरफ्तारी के बाद एक विस्तृत आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया गया है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को मृतक शिवा शर्मा की परिजन रंजना शर्मा द्वारा हजरतगंज कोतवाली में दी गई लिखित तहरीर के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 216/2026 दर्ज किया गया था। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) यानी हत्या के गंभीर प्रावधानों के तहत पंजीकृत हुआ था। घटना के बाद से ही तीनों नामजद आरोपी पुलिस को लगातार चकमा देकर फरार चल रहे थे, जिसके चलते लखनऊ पुलिस कमिश्नर द्वारा अभियुक्त श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश की गिरफ्तारी पर 50,000-50,000 रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था। लखनऊ पुलिस, क्राइम ब्रांच और यूपी एसटीएफ की संयुक्त टीम ने नागपुर पुलिस के सक्रिय सहयोग से तीनों इनामी अभियुक्तों को सफलतापूर्वक दबोच लिया।

11 दिन तक नेपाल और आगरा में काटी फरारी, अग्रिम जमानत की फिराक में थी मुख्य आरोपी

वारदात को अंजाम दिए जाने के बाद से ही आरोपी बेहद शातिर तरीके से ठिकाने बदल रहे थे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि घटना के तुरंत बाद श्रद्धा सीमा पार कर नेपाल में शरण लेने की जुगत में थी। इसके बाद वह कुछ दिनों तक आगरा में एक सुरक्षित ठिकाने पर रुकी और फिर वहां से सड़क और रेल मार्ग के जरिए महाराष्ट्र के नागपुर पहुंची। नागपुर में उसके ठहरने के लिए पहले से ही एक फ्लैट की गोपनीय व्यवस्था की गई थी। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य भी उजागर हुआ है कि श्रद्धा दुबे गिरफ्तारी से बचने के लिए वकीलों के संपर्क में थी और अदालत से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) हासिल करने की पूरी फिराक में थी। दूसरी ओर, मृतक शिवा शर्मा का परिवार और स्थानीय व्यापारी वर्ग आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार धरने और प्रदर्शन पर अड़ा हुआ था, जिससे पुलिस पर भारी दबाव था।

ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाए जा रहे आरोपी, हत्या की असली वजहों से उठेगा पर्दा

नागपुर की स्थानीय अदालत में नियमानुसार विधिक औपचारिकताएं और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा वाली टीम तीनों आरोपियों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो चुकी है। लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां पुलिस मामले की तह तक पहुंचने और इस्तेमाल किए गए साक्ष्यों की बरामदगी के लिए उनकी पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा होगा कि इस हत्याकांड की असली साजिश किसने रची, हत्या के पीछे कारोबारी लेनदेन या व्यक्तिगत रंजिश क्या थी और फरारी के दौरान किन-किन रसूखदार लोगों ने इन तीनों को आर्थिक मदद और पनाह मुहैया कराई थी।