वाराणसी से दिल्ली जा रहे विमान में बीच आसमान बजा स्मोक अलार्म, लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग
उत्तर प्रदेश के आसमान में एक बड़ा विमान हादसा होने से उस वक्त टल गया, जब वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले एक यात्री विमान में तकनीकी खराबी के चलते अचानक स्मोक डिटेक्शन अलार्म बज उठा। विमान हवा में करीब हजारों फीट की ऊंचाई पर था, तभी कॉकपिट के सिस्टम कंसोल पर धुएं की चेतावनी देने वाला अलार्म बीप करने लगा। स्थिति की गंभीरता और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्य पायलट ने बिना एक पल की देरी किए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डे यानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी) के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से तत्काल संपर्क साधा और आपातकालीन लैंडिंग की अनुमति मांगी। लखनऊ एटीसी द्वारा तत्परता दिखाते हुए रनवे को तुरंत खाली कराया गया और पूरे एयरपोर्ट पर 'फुल इमरजेंसी' घोषित कर दी गई। विमान ने लखनऊ रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की, जिसके बाद विमान में सवार सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने राहत की सांस ली।
आसमान में दहशत के वे 20 मिनट: जब कॉकपिट में अचानक बीप करने लगा स्मोक अलार्म
वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट से निर्धारित समय पर विमान ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के शुरुआती 15 से 20 मिनट सब कुछ सामान्य था। विमान अपने क्रूजिंग एल्टीट्यूड की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक कॉकपिट में लगे एवियोनिक्स सिस्टम ने कार्गो होल्ड या केबिन सेक्शन के पास संभावित धुएं या तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि का सिग्नल दर्ज किया। कॉकपिट के मास्टर वार्निंग पैनल पर लाल बत्ती चमकने लगी और ऑडियो अलार्म गूंज उठा।
हवाई यात्रा के सुरक्षा प्रोटोकॉल में 'स्मोक वार्निंग' को सबसे संवेदनशील और गंभीर आपात स्थितियों में गिना जाता है। ऐसे हालात में विमान को हवा में ज्यादा देर तक रखना भारी जोखिम भरा हो सकता है। पायलटों ने निर्धारित 'क्विक रेफरेंस हैंडबुक' (QRH) की चेकलिस्ट का तेजी से पालन किया और तत्काल निर्णय लिया कि दिल्ली तक का सफर जारी रखने के बजाय सबसे नजदीकी सुसज्जित हवाई अड्डे पर लैंड करना ही समझदारी होगी। उस समय विमान लखनऊ एयरस्पेस के बेहद करीब था, लिहाजा पायलट ने फौरन लखनऊ एटीसी को 'पैन-पैन' अथवा आपातकालीन स्थिति की जानकारी देते हुए प्रायरिटी डाइवर्जन और लैंडिंग की मांग की।
लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट पर 'फुल इमरजेंसी' घोषित: रनवे पर दौड़ीं दमकल गाड़ियां और एंबुलेंस
जैसे ही लखनऊ के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को विमान में स्मोक अलार्म बजने और इमरजेंसी लैंडिंग के अनुरोध की सूचना मिली, एयरपोर्ट के इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी और सीआईएसएफ की टीमों ने तत्काल पूरे अमौसी एयरपोर्ट पर 'लोकल स्टैंडबाई' से आगे बढ़कर 'फुल एयरपोर्ट इमरजेंसी' लागू कर दी।
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत एयरपोर्ट फायर फाइटिंग सर्विसेज (ARFF) की कई अत्याधुनिक क्रैश फायर टेंडर्स तुरंत रनवे के समानांतर टैक्सीवे पर पोजीशन ले चुकी थीं। इसके साथ ही मेडिकल टीमों, डॉक्टरों और अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस एंबुलेंसों को रनवे के एग्जिट पॉइंट्स पर मुस्तैद कर दिया गया। अन्य सभी उड़ानों के टेकऑफ और लैंडिंग को कुछ मिनटों के लिए होल्ड पर डाल दिया गया ताकि आपात स्थिति में उतर रहे विमान को खाली और निर्बाध रनवे मिल सके। लखनऊ एटीसी के सटीक दिशा-निर्देशन के बाद पायलट ने अपने कौशल का परिचय देते हुए विमान को रनवे पर बेहद संतुलित तरीके से सुरक्षित उतार लिया।
सभी यात्री और क्रू सुरक्षित: प्लेन से सुरक्षित निकास और यात्रियों की आपबीती
विमान के रनवे पर टचडाउन करते ही फायर ब्रिगेड के वाहनों ने एहतियातन विमान को चारों तरफ से घेर लिया ताकि किसी भी तरह के आग या अत्यधिक धुएं की स्थिति में तुरंत फोम और पानी की बौछार की जा सके। हालांकि, रनवे पर विमान के रुकने के बाद बाहरी तौर पर कोई लपटें या घना धुआं नहीं दिखाई दिया, जिससे एयरपोर्ट प्रशासन ने भारी राहत महसूस की।
विमान को धीरे-धीरे मुख्य रनवे से सुरक्षित आइसोलेशन या एप्रन बे की तरफ ले जाया गया। वहां ग्राउंड स्टाफ की मदद से सीढ़ियां लगाई गईं और सभी यात्रियों को व्यवस्थित रूप से एक-एक करके बाहर निकाला गया। विमान में सवार यात्रियों में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हवा में जब पायलट की ओर से तकनीकी खराबी और डाइवर्जन की घोषणा की गई थी, तब केबिन के भीतर कुछ देर के लिए डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया था। कई यात्री अपनी सीटों पर हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करने लगे थे। लखनऊ की धरती पर कदम रखते ही यात्रियों ने पायलट की सूझबूझ और लखनऊ एयरपोर्ट प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया की मुक्तकंठ से सराहना की। सभी यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनल बिल्डिंग के सुरक्षा लाउंज में ले जाया गया, जहां उनके लिए जलपान और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई।
तकनीकी टीम की गहन जांच: क्या था अलार्म बजने का कारण—कार्गो होल्ड, एवियोनिक्स या फॉल्स वार्निंग?
विमान से यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने के तुरंत बाद एयरलाइन के वरिष्ठ इंजीनियरों और एयरपोर्ट की टेक्निकल टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू कर दी। तकनीकी विशेषज्ञों की प्राथमिक टीम ने विमान के कार्गो कम्पार्टमेंट, केबिन एयर सर्कुलेशन डक्ट्स, ऑक्जिलरी पावर यूनिट (APU) और एवियोनिक्स बे का गहन मुआयना किया।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक वाणिज्यिक विमानों में स्मोक डिटेक्शन सिस्टम बेहद संवेदनशील ऑप्टिकल और आयनाइजेशन सेंसर्स पर काम करते हैं। कई बार कार्गो होल्ड में रखे किसी सामान से निकलने वाली अत्यधिक नमी, धूल के सूक्ष्म कण, केमिकल वेपर या किसी इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट में मामूली हीटिंग की वजह से भी सेंसर ट्रिगर हो जाते हैं, जिसे एविएशन की भाषा में 'फॉल्स स्मोक वार्निंग' कहा जाता है। हालांकि, जब तक हर एक इलेक्ट्रिकल सर्किट, वायरिंग लूम और सेंसर की कम्प्यूटरीकृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी तकनीकी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। तकनीकी टीम यह जांचने में जुटी है कि क्या यह वास्तविक शॉर्ट सर्किट था या सेंसर मालफंक्शन के कारण कंप्यूटर ने गलत चेतावनी जारी की थी।
डीजीसीए का कड़ा रुख और एयरलाइन का कदम: वैकल्पिक विमान से दिल्ली रवाना करने की व्यवस्था
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। विमानन नियामक के नियमों के मुताबिक, हवा में स्मोक अलार्म बजने की हर घटना की एक अनिवार्य विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है। लखनऊ में उतरा यह विमान अब पूरी तकनीकी क्लीयरेंस और डीजीसीए के एयरवर्दीनेस अधिकारियों की हरी झंडी मिलने तक उड़ान नहीं भर सकेगा। एयरलाइन के संबंधित इंजीनियरों को विमान का डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) डेटा का तकनीकी विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया है।
दूसरी ओर, लखनऊ में फंसे यात्रियों की असुविधा को देखते हुए एयरलाइन प्रबंधन ने तत्काल बैकअप प्लान पर काम शुरू किया। यात्रियों को उनके गंतव्य यानी दिल्ली तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए या तो दिल्ली/मुंबई से एक वैकल्पिक खाली विमान (फेरी फ्लाइट) लखनऊ भेजा जा रहा है, या फिर लखनऊ से दिल्ली जाने वाली अन्य नियमित उड़ानों में यात्रियों को समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन यात्रियों ने यात्रा रद्द करने की इच्छा जताई, उन्हें पूरा रिफंड और बाकी यात्रियों को कनेक्टिंग इंटरनेशनल व डोमेस्टिक उड़ानों के लिए री-बुकिंग की सुविधा प्रदान की गई।
एविएशन सेफ्टी और इमरजेंसी प्रोटोकॉल: पायलट की मुस्तैदी ने टाला बड़ा खतरा
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और पायलटों की ट्रेनिंग का स्तर कितना उच्च है। आसमान में किसी भी चेतावनी को नजरअंदाज न करते हुए तुरंत निकटतम रनवे का रुख करना और प्रोटोकॉल के तहत निर्णय लेना ही सुरक्षित विमानन संचालन की पहली शर्त है।
यदि पायलट इस अलार्म को केवल तकनीकी गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज करता और विमान को दिल्ली तक ले जाने का प्रयास करता, तो हवा में किसी वास्तविक खराबी की स्थिति में संकट कई गुना गहरा सकता था। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर समय रहते ली गई लैंडिंग और स्थानीय प्रशासन की चौकसी ने सैकड़ों यात्रियों की जान पर आए संभावित खतरे को पूरी तरह टाल दिया। अब सभी की निगाहें डीजीसीए और एयरलाइन की अंतिम तकनीकी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि वाराणसी के आसमान में विमान के भीतर स्मोक अलार्म आखिर किस तकनीकी वजह से बजा था।