योगी सरकार का माफिया पर प्रहार: बाहुबलियों से छुड़ाई 15 हजार करोड़ की जमीन पर गरीबों को मिली पक्की छत
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के मॉडल ने पिछले कुछ वर्षों में देशव्यापी ध्यान आकर्षित किया है। कभी प्रदेश में संगठित अपराध और बाहुबलियों का ऐसा दौर था जब सरकारी जमीनों, तालाबों, चारागाहों और गरीबों की पुश्तैनी संपत्तियों पर रातों-रात अवैध कब्जे हो जाया करते थे। आम नागरिक न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक जाता था, लेकिन बाहुबलियों के राजनीतिक रसूख के आगे प्रशासनिक अमला भी लाचार दिखता था। वर्ष 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत इस परिदृश्य को पूरी तरह पलट दिया। सरकार ने न केवल माफिया तंत्र की रीढ़ तोड़ी, बल्कि उनके अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई बेशकीमती जमीनों को सीधे जनहित के कार्यों में लगाकर सामाजिक न्याय का एक नया और अनूठा प्रयोग शुरू किया है।
प्रयागराज का कसारी-मसारी मॉडल: जहां कभी अतीक का खौफ था, वहां अब बच्चों की किलकारियां
माफिया के कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर गरीबों के पुनर्वास का सबसे ऐतिहासिक और जीवंत उदाहरण तीर्थराज प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में देखने को मिला। प्रयागराज के लूकरगंज और कसारी-मसारी में कभी कुख्यात माफिया अतीक अहमद का अवैध साम्राज्य फैला हुआ था। उस समय किसी साधारण व्यक्ति की तो दूर, सरकारी कर्मचारियों की भी उस जमीन की तरफ देखने की हिम्मत नहीं होती थी। योगी सरकार ने एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के जरिए अतीक अहमद के कब्जे से करोड़ों रुपये मूल्य की 1731 वर्ग मीटर जमीन को कानूनी प्रक्रिया के तहत खाली कराया।
खाली कराई गई इस जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बहुमंजिला आवासीय परियोजना शुरू की गई। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस सोसाइटी में 76 फ्लैट्स का निर्माण किया गया, जिसमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पार्क, बच्चों के खेलने का स्थान और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई। सबसे भावुक क्षण वह था जब स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से पात्र निर्धन परिवारों और महिलाओं को इन फ्लैटों की चाबियां सौंपीं। जिन परिवारों ने जीवनभर झुग्गियों या किराए के तंग कमरों में दिन गुजारे थे, उन्हें शहर के सबसे पॉश इलाके में अपना पक्का आशियाना मिला। यह केवल कंक्रीट की इमारत नहीं, बल्कि कानून के शासन और राज्य के कमजोर तबके के सम्मान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन गया।
15 हजार करोड़ की अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर: एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स का शिकंजा
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गैंगस्टर एक्ट और एंटी-भूमाफिया कानून के कड़े प्रावधानों के तहत अब तक राज्य भर के दुर्दांत माफियाओं, बाहुबलियों और उनके सिंडिकेट की ₹15,000 करोड़ से अधिक की काली कमाई और अचल संपत्तियों को कुर्क या ध्वस्त किया जा चुका है। प्रदेश स्तर पर गठित 4-स्तरीय एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स ने हजारों हेक्टेयर सरकारी और निजी भूमि को भूमाफियाओं के अवैध शिकंजे से मुक्त कराया है।
प्रशासन ने केवल बुलडोजर चलाकर इमारतों को गिराने तक सीमित रहने के बजाय उन जमीनों का विस्तृत लैंड-बैंक तैयार किया है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि मुक्त कराई गई जमीनों का उपयोग केवल तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए किया जाए: पहला, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए सस्ते और पक्के मकान बनाना; दूसरा, क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र या प्राथमिक विद्यालय स्थापित करना; और तीसरा, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस चौकियां या थाने स्थापित करना ताकि भविष्य में कोई दूसरा असामाजिक तत्व दोबारा उस जमीन पर नजर न गड़ा सके।
लखनऊ, मेरठ से लेकर बुंदेलखंड तक: पूरे प्रदेश में दोहराया जा रहा है यही मॉडल
प्रयागराज में कसारी-मसारी की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मॉडल को राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी लागू करने की व्यापक कार्ययोजना बनाई है। राजधानी लखनऊ के डालीबाग और गोमती नगर जैसे प्रमुख इलाकों में मुख्तार अंसारी और उसके गिरोह द्वारा नजूल व सरकारी भूमि पर बनाए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के बाद उन जमीनों पर सार्वजनिक उपयोगिताओं और आवासीय योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है।
इसी प्रकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और बुलंदशहर में शराब और भूमाफियाओं से खाली कराई गई जमीनों पर पुलिस थानों और खेल के मैदानों का निर्माण कराया जा रहा है। बुंदेलखंड और तराई के इलाकों में अवैध खनन और जमीनों की जालसाजी करने वाले बाहुबलियों की संपत्तियों पर सरकार ने बोर्ड लगाकर उन्हें सार्वजनिक संपत्ति घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि जिस भी जिले में माफिया से जमीन खाली कराई जाए, वहां की स्थानीय विकास प्राधिकरण तुरंत उसके जनहितकारी उपयोग का ब्लू प्रिंट तैयार करे।
पीड़ितों के जख्मों पर मरहम: सामाजिक और कानूनी संदेश
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार की इस पहल ने अपराध नियंत्रण को सीधे सामाजिक कल्याण से जोड़ दिया है। पारंपरिक रूप से अपराधियों की संपत्तियां सील होने के बाद सालों-साल कानूनी मुकदमों में उलझी रहती थीं और जमीनें बंजर पड़ी रहती थीं। योगी सरकार ने त्वरित अदालती प्रक्रियाओं और विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल के माध्यम से इन जमीनों का अधिग्रहण कर उन पर जनकल्याणकारी परियोजनाओं की नींव रखी।
यह रणनीति माफियाओं के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को तोड़ने में बेहद कारगर साबित हुई है। जब एक आम नागरिक देखता है कि जिस माफिया के नाम से पूरा इलाका कांपता था, आज उसी की अवैध जमीन पर किसी गरीब दिहाड़ी मजदूर, ई-रिक्शा चालक या विधवा महिला का पक्का मकान खड़ा है, तो इससे न्यायपालिका और शासन के प्रति जनता का विश्वास कई गुना बढ़ जाता है। 'बाहुबल की जमीन पर जनहित की छत' का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी कानून के राज और गरीबों के उत्थान का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।