शेख हसीना के तख्तापलट पर बड़ा खुलासा: मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाने के पक्ष में नहीं थे आर्मी चीफ जनरल वकार, फिर ऐसे बदली बात
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट और उसके बाद बनी अंतरिम सरकार को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और नया खुलासा सामने आया है। तत्कालीन अंतरिम सरकार में कानून और न्याय मामलों के सलाहकार रहे प्रोफेसर आसिफ नजरुल ने एक साक्षात्कार में बड़ा दावा किया है कि बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान शुरुआत में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने के बिल्कुल पक्ष में नहीं थे। उन्होंने यूनुस के नाम पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
आर्मी चीफ जनरल वकार ने क्यों जताई थी आपत्ति?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिफ नजरुल ने एक प्रतिष्ठित बांग्लादेशी अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया कि शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद जब वह आर्मी हेडक्वार्टर गए, तो जनरल वकार ने छात्रों के संघर्ष की सराहना की और पूछा कि देश की कमान किसे सौंपी जानी चाहिए। जब नजरुल ने छात्रों की पसंद के रूप में मोहम्मद यूनुस का नाम आगे बढ़ाया, तो आर्मी चीफ ने दो बड़ी आपत्तियां दर्ज कराईं। जनरल वकार का कहना था कि यूनुस को श्रम कानूनों (लेबर लॉ) के उल्लंघन के मामले में सजा सुनाई जा चुकी है और उनके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप भी हैं, ऐसे में क्या किसी ऐसे व्यक्ति को देश की कमान देना सही होगा।
आखिरकार कैसे बदली स्थिति और कैसे बने यूनुस प्रमुख?
सेना प्रमुख की आपत्तियों के बाद स्थिति को संभालते हुए आसिफ नजरुल ने उन्हें समझाया कि मोहम्मद यूनुस के खिलाफ दर्ज ये दोनों मामले पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित थे और पिछली शेख हसीना सरकार ने उन्हें निशाना बनाने के लिए ये मुकदमे दर्ज कराए थे। इस तर्क और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमान संतुष्ट हुए और छात्रों की मांग पर सहमति जताते हुए मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने के लिए राजी हो गए, जिसके बाद बांग्लादेश की सत्ता में एक नया दौर शुरू हुआ।