विमान क्रैश कराने पर आमादा था को-पायलट, भारतीय कैप्टन ने जान पर खेलकर टाली बड़ी त्रासदी

विमान क्रैश कराने पर आमादा था को-पायलट, भारतीय कैप्टन ने जान पर खेलकर टाली बड़ी त्रासदी

बीच आसमान में 35 हजार फीट की ऊंचाई पर सैकड़ों मुसाफिरों से भरा एक विमान उड़ रहा हो और अचानक उसी विमान का को-पायलट नियंत्रण छीनकर उसे जमीन पर पटकने की कोशिश करने लगे, तो मंजर कितना खौफनाक होगा, इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है। लेकिन मौत के इस साए के बीच भारतीय मूल के कैप्टन ने अदम्य साहस और पेशेवर निष्ठा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने एक अंतरराष्ट्रीय त्रासदी को टलने पर मजबूर कर दिया। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में जब सिरफिरे को-पायलट ने घातक इरादों के साथ विमान को क्रैश करने का प्रयास किया, तो मुख्य कैप्टन बिना अपनी जान की परवाह किए सीधे उससे भिड़ गए और अंतिम सांस तक कॉकपिट का कंट्रोल नहीं छोड़ा।

हवा में अचानक गोता खाने लगा विमान, कॉकपिट में छिड़ा खूनी संघर्ष

घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ जब बोइंग 737 मैक्स विमान अपने क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर सामान्य गति से आगे बढ़ रहा था। अचानक सह-पायलट का व्यवहार हिंसक हो गया और उसने कथित तौर पर विमान को सीधे क्रैश कराने के इरादे से कंट्रोल्स को तेजी से नीचे की ओर पुश कर दिया। ऊंचाई में अनियंत्रित और तीव्र गिरावट आते ही विमान के भीतर अफरा-तफरी मचने लगी।

खतरे की भयावहता को भांपते हुए भारतीय मूल के जांबाज कैप्टन एक सेकंड की भी देरी किए बिना हमलावर को-पायलट से भिड़ गए। हमलावर ने कैप्टन को रास्ते से हटाने के लिए उन पर घातक वार किए, जिसमें कैप्टन गंभीर रूप से जख्मी और लहूलुहान हो गए। इसके बावजूद, कैप्टन ने एक हाथ से हमलावर का मुकाबला जारी रखा और दूसरे हाथ से विमान के स्टीयरिंग व कंट्रोल कॉलम को थामकर उसे स्टॉल होने और हवा में बिखरने से बचाए रखा।

ट्रांसपोंडर से भेजा 'कोड 7500', क्रू की मदद से हमलावर को किया काबू

हमलावर के साथ मल्लयुद्ध लड़ते हुए भी कैप्टन ने अपनी पेशेवर ट्रेनिंग का अद्भुत परिचय दिया। उन्होंने तुरंत एविएशन के सबसे संवेदनशील आपातकालीन कोड '7500' (अवैध हस्तक्षेप / हाईजैक) और '7700' (जनरल इमरजेंसी) को ट्रांसपोंडर पर एक्टिवेट कर दिया, जिससे ग्राउंड रडार और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को तुरंत पता चल गया कि कॉकपिट के भीतर आपात स्थिति पैदा हो चुकी है।

कैप्टन द्वारा दिए गए सिग्नल और कॉकपिट के संघर्ष की आवाज सुनते ही केबिन क्रू ने आपातकालीन प्रोटोकॉल के जरिए फ्लाइट डेक का दरवाजा खोला और अंदर कूद पड़े। क्रू मेंबर्स ने खून से लथपथ कैप्टन की मदद करते हुए सिरफिरे को-पायलट को दबोच लिया और सुरक्षा बेल्ट्स व जिप-टाई से उसे सीट पर कसकर बांध दिया।

तबुक में कराई सेफ इमरजेंसी लैंडिंग, दुनिया कर रही सलाम

हमलावर को पूरी तरह काबू में करने के बाद, अत्यधिक दर्द और खून बहने के बावजूद कैप्टन ने होश नहीं खोया। उन्होंने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क साधा और विमान को निकटतम सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। रनवे पर सुरक्षित टचडाउन होते ही विमान में सवार 150 से अधिक यात्रियों ने राहत की सांस ली और उनकी आंखें नम हो गईं।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैप्टन ने कॉकपिट में उस क्षणिक हिचकिचाहट को भी हावी होने दिया होता या वे हमलावर के आगे झुक जाते, तो विमान को जमीन से टकराने में 60 सेकंड से भी कम का समय लगता। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती भारतीय कैप्टन की वीरता की कहानी अब पूरी दुनिया के विमानन गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां हर कोई इस जांबाज पायलट के फौलादी जज्बे को सलाम कर रहा है।