इमरान खान के समर्थन में फिर गूंजी पुराने साथी की आवाज: पूर्व करीबी नेता का भावुक बयान, कहा- 'उन्हें हर पल याद करता हूं'

इमरान खान के समर्थन में फिर गूंजी पुराने साथी की आवाज: पूर्व करीबी नेता का भावुक बयान, कहा- 'उन्हें हर पल याद करता हूं'

पाकिस्तान की राजनीति में भारी दबाव, मुकदमों और सैन्य प्रतिष्ठान के कड़े रुख के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में एक बार फिर उनके पुराने राजनीतिक साथी ने खुलकर आवाज उठाई है। इमरान खान के लंबे समय तक विश्वासपात्र रहे पूर्व वरिष्ठ सहयोगी ने एक भावुक बयान देते हुए कहा है कि वे पार्टी और विचारधारा से दूर होने या अलग रास्ते पर चलने के बावजूद इमरान खान को हर पल याद करते हैं। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 72 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर व राजनेता के समर्थन में आए इस बयान ने पाकिस्तानी सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है, खासकर तब जब कई नेता पार्टी छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी पुरानी वफादारी और सहानुभूति व्यक्त कर रहे हैं।

'राजनीतिक मतभेद अपनी जगह, लेकिन उन्हें हर पल याद करता हूं': पूर्व साथी का छलका दर्द

इमरान खान के पुराने सहयोगी ने हालिया मीडिया साक्षात्कार के दौरान खुलकर अपने दिल की बात रखी। उन्होंने कहा कि इमरान खान के साथ गुजारे गए दशकों लंबे संघर्ष, पार्टी की स्थापना और सरकार में साथ काम करने के पलों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, "राजनीति में रणनीतियों और फैसलों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन निजी स्तर पर और एक नेता के रूप में इमरान खान की जगह कोई नहीं ले सकता। मैं उन्हें हर दिन और हर पल याद करता हूं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इमरान खान का मौजूदा समय में जेल की सलाखों के पीछे होना न केवल उनके समर्थकों के लिए पीड़ादायक है, बल्कि यह पाकिस्तान में लोकतंत्र और कानून के शासन पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।

9 मई की हिंसा के बाद अलग हो गए थे कई करीबी, अब बदल रहा मिजाज

गौरतलब है कि 9 मई 2023 को हुई देशव्यापी हिंसा और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना और शहबाज शरीफ सरकार के भारी दबाव के चलते पीटीआई के दर्जनों शीर्ष नेताओं—जिनमें फवाद चौधरी, परवेज खटक, असद उमर, शिरीन मजारी और अली जैदी जैसे कद्दावर नाम शामिल थे—ने या तो राजनीति से संन्यास ले लिया था या अपनी अलग पार्टियां बना ली थीं। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में जैसे-जैसे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बदहाल हुई है और जनता में इमरान खान की लोकप्रियता का ग्राफ ऊंचा बना रहा, कई पूर्व सहयोगी अब धीरे-धीरे अपने बयानों में नरमी ला रहे हैं और इमरान खान के प्रति अपनी पुरानी निष्ठा को सार्वजनिक करने से नहीं हिचक रहे हैं।

अदियाला जेल में बंद हैं इमरान खान: दर्जनों मुकदमों में जमानत के बावजूद रिहाई नहीं

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। तोशाखाना, सिफर (सीक्रेट डिप्लोमैटिक केबल) और निकाह मामले में निचली अदालतों से मिली सजाओं को या तो उच्च न्यायालयों द्वारा निलंबित किया जा चुका है या वे बरी हो चुके हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) और 9 मई हिंसा से जुड़े दर्जनों नए मामलों में उन्हें अदियाला जेल में ही रोके रखा गया है। पीटीआई का आरोप है कि शहबाज शरीफ और आसिफ अली जरदारी की गठबंधन सरकार, सेना के इशारे पर इमरान खान को किसी भी कीमत पर जेल से बाहर नहीं आने देना चाहती, क्योंकि उनकी रिहाई से मौजूदा सरकार के अस्तित्व पर सीधा खतरा मंडराने लगेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना: पुराने साथियों का एक साथ आना नया संकेत

पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुराने नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से इमरान खान के प्रति संवेदना और याद जताए जाने के पीछे गहरा राजनीतिक गणित है। वर्तमान गठबंधन सरकार आम जनता के बीच महंगाई, बिजली बिलों और बेरोजगारी के मुद्दों पर भारी अलोकप्रियता का सामना कर रही है। ऐसे में जो नेता दबाव में पीटीआई से अलग हुए थे, वे भी अब महसूस कर रहे हैं कि पाकिस्तान के जमीनी जनमत में इमरान खान का कद कमजोर नहीं हुआ है। पुराने साथियों की यह आवाज इस बात का भी संकेत हो सकती है कि आने वाले दिनों में बैक-चैनल वार्ताओं के जरिए पीटीआई के असंतुष्ट धड़ों को फिर से एक मंच पर लाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।