जब 34,000 फुट की ऊंचाई पर गोता खाने लगा विमान और गूंजी चीखें, फिर लहूलुहान भारतीय कैप्टन बने देवदूत

जब 34,000 फुट की ऊंचाई पर गोता खाने लगा विमान और गूंजी चीखें, फिर लहूलुहान भारतीय कैप्टन बने देवदूत

"हम सब मरने वाले हैं... भगवान हमें बचा लो!" 34 हजार फीट की ऊंचाई पर बादलों को चीरते हुए आगे बढ़ रहे एक कमर्शियल जेटलाइनर के भीतर जब अचानक मौत साक्षात नाचने लगे, तो यही अंतिम शब्द थे जो सहमे हुए मुसाफिरों की जुबान से निकल रहे थे। दुबई से तेल अवीव की नियमित उड़ान पर निकले फ्लाईदुबई के बोइंग 737 मैक्स विमान में सफर कर रहे डेढ़ सौ से अधिक यात्रियों को यह गुमान भी नहीं था कि जिस बंद कॉकपिट के भरोसे वे चैन की सांस ले रहे हैं, उसी कॉकपिट के भीतर एक सिरफिरा सह-पायलट पूरे विमान को जलती हुई कब्र बनाने की साजिश रच चुका है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; मौत और जिंदगी के इस खूनी खेल के बीच ढाल बनकर खड़े हो गए भारतीय मूल के मुख्य कैप्टन, जिन्होंने खुद लहूलुहान होकर भी 150 से अधिक बेगुनाहों की सांसों की डोर टूटने नहीं दी।

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला, फ्री-फॉल में गया विमान

30 सितंबर की उस मनहूस दोपहर उड़ान FZ1073 सामान्य रूप से अपने तय रूट पर आगे बढ़ रही थी। विमान जब लगभग 34,000 फीट के क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर था, तभी अचानक कॉकपिट के भीतर का माहौल हिंसक हो उठा। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, ओमानी मूल के को-पायलट ने अचानक मानसिक विक्षिप्तता और उग्रता दिखाते हुए विमान के कंट्रोल्स को झटके से नीचे की तरफ धकेल दिया और मुख्य कैप्टन पर जानलेवा वार कर दिया।

विमान सेकंडों के भीतर भयानक तरीके से अनियंत्रित होकर नीचे की ओर गोता (Rapid Descent) लगाने लगा। केबिन के भीतर ऑक्सीजन मास्क नीचे लटक गए, यात्रियों के हाथ से सामान छूटकर छतों से टकराने लगा और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। मुसाफिरों को लगने लगा कि विमान अब किसी भी पल जमीन से टकराकर आग का गोला बन जाएगा।

लहूलुहान होकर भी थामे रखा कंट्रोल, एक हाथ से लड़ी जिंदगी की जंग

उस दहला देने वाले मोड़ पर भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार ने जो शौर्य दिखाया, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। सिरफिरे सह-पायलट के लगातार हो रहे घातक प्रहारों से कैप्टन का चेहरा और शरीर लहूलुहान हो चुका था। असहनीय दर्द और खून बहने के बावजूद कैप्टन ने अपनी सुधबुध नहीं खोई। वे अच्छी तरह जानते थे कि अगर उनका हाथ कंट्रोल कॉलम से छूटा, तो विमान हवा में ही डिसइंटीग्रेट (टुकड़े-टुकड़े) हो जाएगा।

कैप्टन ने एक फौलादी योद्धा की तरह एक हाथ से हमलावर को पीछे धकेला और दूसरे हाथ से नियंत्रण थामकर डाइव करते विमान की नोज (अगला हिस्सा) को ऊपर खींचने का अमानवीय प्रयास किया। इसी दौरान उन्होंने ट्रांसपोंडर पर आपातकालीन कोड डायल कर ग्राउंड कंट्रोल को सूचित कर दिया कि कॉकपिट के भीतर हाईजैक या जानलेवा दखल (Squawk 7500) हो चुका है।

केबिन क्रू का धावा और हमलावर को बांधने का हैरतअंगेज ऑपरेशन

कॉकपिट से आपात संकेत मिलते ही केबिन क्रू के चार जांबाज सदस्य विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर फ्लाइट डेक का दरवाजा तोड़ते हुए भीतर दाखिल हुए। अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था—मुख्य कैप्टन खून से लथपथ थे और हमलावर को-पायलट विमान को गिराने पर आमादा था। क्रू मेंबर्स बिना एक पल गंवाए सीधे हमलावर पर टूट पड़े:

  • हाथ से छीने गए घातक उपकरण: क्रू ने अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावर के हाथ को मरोड़ा और उसे पायलट की सीट से दूर खींचा।

  • फ्लोर पर पटककर किया काबू: कड़े शारीरिक संघर्ष के बाद क्रू ने आरोपी को कॉकपिट के फर्श पर गिरा दिया।

  • सीट से कसकर बांधा: विमान में मौजूद 'केबिन रिस्ट्रेंट' और मजबूत केबल टाई की मदद से हमलावर के हाथ-पैर बांध दिए गए, जिससे वह दोबारा कंट्रोल्स तक न पहुंच सके।

तबुक में सुरक्षित लैंडिंग: जब यात्रियों के आंसुओं ने धो दी मौत की दहशत

हमलावर के निष्क्रिय होते ही कैप्टन स्मित ने सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क साधा और निकटतम तबुक हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। जब विमान के पहियों ने तबुक के रनवे को छुआ और जेटलाइनर सुरक्षित रूप से रुका, तब जाकर यात्रियों को यकीन हुआ कि वे साक्षात मौत के जबड़े से जिंदा बाहर निकल आए हैं।

विमान के दरवाजे खुलते ही कई यात्री घुटनों के बल बैठकर रोने लगे और ईश्वर का धन्यवाद करने लगे। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए गए भारतीय कैप्टन को जब यात्रियों ने स्ट्रेचर पर देखा, तो पूरा टर्मिनल तालियों और सिसकियों की आवाज से गूंज उठा। विमानन विशेषज्ञों का दो टूक कहना है कि 34,000 फीट पर अगर भारतीय कैप्टन ने 20 सेकंड की भी कमजोरी दिखाई होती, तो यह आधुनिक विमानन इतिहास का सबसे दर्दनाक हादसा बन चुका होता।