11 महीने के नोटरी वाले झंझट से मिलेगी मुक्ति, स्टांप ड्यूटी में भारी कटौती से मकान मालिक और किराएदारों की मौज

11 महीने के नोटरी वाले झंझट से मिलेगी मुक्ति, स्टांप ड्यूटी में भारी कटौती से मकान मालिक और किराएदारों की मौज

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में किराए पर रहने वाले लाखों किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने रेंट और लीज एग्रीमेंट पर लगने वाले भारी-भरकम स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन चार्ज के ढांचे को बदलते हुए इसमें ऐतिहासिक कटौती को मंजूरी दी है। अभी तक लोग केवल रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी से बचने के लिए 11 महीने का नोटरी एग्रीमेंट बनवाते थे, क्योंकि 12 महीने या उससे अधिक अवधि के एग्रीमेंट पर कानूनी रूप से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है और उस पर भारी शुल्क लगता था।

11 महीने का यह नोटरी एग्रीमेंट कानूनी रूप से बेहद कमजोर होता है और किसी भी विवाद की स्थिति में कोर्ट में ठोस साक्ष्य के रूप में टिक नहीं पाता। अब सरकार ने 10 साल तक के रेंट एग्रीमेंट के लिए स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को घटाकर मामूली स्लैब में बदल दिया है, जिससे लोग 11 महीने के जुगाड़ू समझौते को छोड़कर लंबे समय का रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए प्रेरित होंगे।

नए नियमों के तहत स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की नई दरें

सरकार द्वारा मंजूर की गई नई व्यवस्था में स्टांप ड्यूटी मकान के सालाना औसत किराए और एग्रीमेंट की अवधि (टेन्योर) के आधार पर तय की गई है। इसमें रजिस्ट्रेशन फीस भी स्टांप शुल्क के बराबर ही रखी गई है:

  • 2 लाख रुपये तक का सालाना किराया: 1 साल तक की अवधि के लिए केवल ₹1,000 स्टांप ड्यूटी और ₹1,000 रजिस्ट्रेशन चार्ज (कुल ₹2,000) देना होगा। 1 से 5 साल तक की अवधि के लिए यह स्टांप शुल्क ₹2,000 और 5 से 10 साल के लिए ₹4,000 तय किया गया है।

  • 2 लाख से 6 लाख रुपये तक का सालाना किराया: 1 साल तक के लिए ₹3,000, 1 से 5 साल के लिए ₹6,000 और 5 से 10 साल के लिए ₹8,000 स्टांप शुल्क लगेगा।

  • 6 लाख से 10 लाख रुपये तक का सालाना किराया: 1 साल तक के लिए ₹4,500, 1 से 5 साल के लिए ₹10,000 और 5 से 10 साल के लिए ₹13,000 शुल्क निर्धारित किया गया है।

यदि किसी संपत्ति का सालाना किराया ₹10 लाख से अधिक है, तो छूट केवल पहले ₹10 लाख तक ही मिलेगी और उससे अधिक की राशि पर पुरानी व्यवस्था के तहत शुल्क देय होगा। इसके अलावा खनन और टोल-टैक्स से जुड़े लीज पर यह रियायत लागू नहीं होगी।

जेब पर कितना पड़ेगा असर? जानिए बचत का सीधा गणित

पहले की व्यवस्था में रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर कराने पर सालाना किराए और डिपॉजिट के आधार पर लगभग 2% स्टांप शुल्क और अलग से रजिस्ट्रेशन चार्ज चुकाना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर, यदि नोएडा में किसी फ्लैट का किराया ₹15,000 प्रति माह (सालाना ₹1.80 लाख) है, तो पुराने नियमों के तहत 1 साल के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पर करीब ₹10,000 तक का खर्च आ जाता था। इसी भारी खर्च से बचने के लिए किराएदार ₹100 के स्टांप पेपर पर नोटरी करवाकर काम चलाते थे।

नए नियमों के लागू होने के बाद उसी ₹1.80 लाख सालाना किराए वाले मकान का 1 साल का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सिर्फ ₹2,000 (₹1,000 स्टांप + ₹1,000 रजिस्ट्रेशन) में तैयार हो जाएगा। इससे सीधे तौर पर करीब 80 प्रतिशत यानी लगभग ₹8,000 की नकद बचत होगी। वहीं 3 से 5 साल के लंबी अवधि के पट्टे (लीज) के लिए जहां पहले लाखों रुपये तक का शुल्क बन जाता था, अब वह घटकर कुछ हजार रुपयों में सिमट जाएगा।

मकान मालिकों और किराएदारों को क्या-क्या होगा सीधा फायदा?

इस नए नियम से किराएदारी बाजार में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • हर साल रिन्यूअल के झंझट से आजादी: 11 महीने का एग्रीमेंट खत्म होते ही हर साल नया एग्रीमेंट बनवाना पड़ता था। अब कम खर्च के कारण लोग 2 से 3 साल या 5 साल का एग्रीमेंट एक साथ बनवा सकेंगे, जिससे बार-बार के ब्रोकरेज और कागजी झंझट से मुक्ति मिलेगी।

  • विवादों में मजबूत कानूनी सुरक्षा: रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट एक पुख्ता कानूनी दस्तावेज होता है। मकान मालिक को यह डर नहीं रहेगा कि किराएदार संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लेगा, और किराएदार को यह सुरक्षा रहेगी कि मकान मालिक बीच में अचानक बिना नोटिस दिए घर खाली नहीं करा सकता या मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकता।

  • सरकारी योजनाओं और पते के प्रमाण में मान्यता: नोटरी वाले 11 महीने के एग्रीमेंट को पासपोर्ट, बैंक खाता, आधार कार्ड अपडेट या बच्चों के स्कूल एडमिशन में आसानी से मान्यता नहीं मिलती। रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट हर जगह वैध एड्रेस प्रूफ के रूप में स्वीकार किया जाता है।

  • ऑनलाइन और पेपरलेस प्रक्रिया: राज्य सरकार इस पूरी व्यवस्था को आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल के जरिए आधार आधारित ई-हस्ताक्षर (Aadhaar eSign) से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, जिससे सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के चक्कर लगाए बिना घर बैठे डिजिटल एग्रीमेंट तैयार हो सकेगा।

उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम (UP Tenancy Rules) के तहत रेंट एग्रीमेंट का औपचारिक पंजीकरण अनिवार्य करने की दिशा में यह शुल्क कटौती एक बड़ा कदम है। इससे न केवल आम जनता की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि किरायेदारी का पूरा बाजार कानूनी और पारदर्शी दायरे में आ सकेगा।