लद्दाख के मुकदमों के लिए सुप्रीम कोर्ट में बनेगी स्पेशल बेंच, दिल्ली आए बिना लेह-कारगिल से होगी वर्चुअल सुनवाई

लद्दाख के मुकदमों के लिए सुप्रीम कोर्ट में बनेगी स्पेशल बेंच, दिल्ली आए बिना लेह-कारगिल से होगी वर्चुअल सुनवाई

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के नागरिकों और अधिवक्ताओं के लिए एक ऐतिहासिक न्यायिक सुविधा की घोषणा की है। अब लेह और कारगिल के लोगों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपने मामलों की पैरवी करने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय करके दिल्ली नहीं आना पड़ेगा। सीजेआई ने ऐलान किया है कि सर्वोच्च न्यायालय में लद्दाख क्षेत्र के लंबित सभी मुकदमों की सुनवाई के लिए एक 'स्पेशल बेंच' (विशेष पीठ) का गठन किया जाएगा, जो एक ही दिन में इन सभी मामलों को सूचीबद्ध कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनेगी।

यह महत्वपूर्ण घोषणा सीजेआई सूर्यकांत ने लेह के मेलांगथांग में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की नई लद्दाख बेंच के उद्घाटन समारोह के दौरान की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, लद्दाख के उपराज्यपाल और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी उपस्थित थे। सीजेआई ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को नागरिकों की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को समझकर उनके करीब पहुंचना चाहिए, न कि लोगों को न्याय के लिए विषम परिस्थितियों से जूझने पर मजबूर किया जाए।

'वकील दिल्ली न आएं, लद्दाख से ही ऑनलाइन रखें अपना पक्ष'

सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया कि जब इस विशेष बेंच में लद्दाख के मुकदमों की सुनवाई होगी, तो वे चाहते हैं कि इन मामलों में लेह और कारगिल के स्थानीय वकील ही अदालत के समक्ष जिरह करें। इसके लिए स्थानीय अधिवक्ताओं को दिल्ली के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी; वे लेह स्थित हाई कोर्ट परिसर से सीधे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने पेश हो सकेंगे।

सीजेआई ने कहा, "इसका मकसद बिल्कुल स्पष्ट है। मैं चाहता हूं कि लेह और कारगिल बार का प्रत्येक सदस्य यह महसूस करे कि वे सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय बार से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। आप केवल एक दूरदराज के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि आप बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के योग्य प्रतिनिधि हैं। आपकी योग्यता, दक्षता और दलील पेश करने की क्षमता सुप्रीम कोर्ट बार के किसी भी सदस्य से कम नहीं है।" इस फैसले से स्थानीय वकीलों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें देश की शीर्ष अदालत में अपनी प्रतिभा दिखाने का सीधा अवसर मिलेगा।

लद्दाख के आम नागरिकों को भारी खर्च और कठिन यात्रा से मिलेगी मुक्ति

भौगोलिक रूप से लद्दाख देश के सबसे दुर्गम और विषम मौसम वाले इलाकों में गिना जाता है। सर्दियों के महीनों में भारी बर्फबारी और दर्रे बंद हो जाने के कारण लेह और कारगिल देश के बाकी हिस्सों से सड़क मार्ग से कट जाते हैं। ऐसे में दिल्ली आकर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ना आम गरीब वादियों के लिए आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन साबित होता था। हवाई यात्रा का भारी खर्च, दिल्ली में रहने-खाने की व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की भारी फीस की वजह से कई लोग शीर्ष अदालत तक पहुंच ही नहीं पाते थे।

सीजेआई द्वारा एक ही दिन में सारे मामले सूचीबद्ध करने और वर्चुअल सुनवाई की अनुमति देने से वादियों का भारी खर्च और समय बचेगा। अब वादकारी अपने स्थानीय वकील के माध्यम से ही लेह से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख सकेंगे। सीजेआई ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि "सच्चे न्याय की शुरुआत अदालत परिसर से नहीं, बल्कि फरियादी के दरवाजे से होती है। यदि नागरिक अदालत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर अदालत को उनके दरवाजे तक पहुंचना होगा।"

लेह में शुरू हुई देश की सबसे ऊंचाई पर स्थित हाई कोर्ट बेंच

सुप्रीम कोर्ट की इस घोषणा के साथ ही लेह में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की नियमित लद्दाख बेंच का भी औपचारिक उद्घाटन हो गया, जिसे देश की सबसे ऊंचाई पर स्थित संवैधानिक अदालत की पीठ माना जा रहा है। 21 अक्टूबर से यह बेंच नियमित रूप से कार्य करना शुरू कर देगी। राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना के बाद स्थापित यह बेंच शुरुआत में हफ्ते में दो दिन बैठेगी, जिसके लिए प्राथमिक तौर पर 75 मामलों की पहचान की जा चुकी है।

इस मौके पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "पहले लद्दाख के लोगों को अपनी अपीलों और मामलों की सुनवाई के लिए कठिन पहाड़ी दर्रे पार करके श्रीनगर या जम्मू की अदालत जाना पड़ता था। लेकिन आज हाई कोर्ट खुद पहाड़ों के दर्रों को पार करके लद्दाख के लोगों तक पहुंच गया है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस बेंच का फायदा केवल लेह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कारगिल और दूरदराज के सीमावर्ती गांवों के नागरिकों को भी विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) के जरिए घर-घर मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

डिजिटल न्याय प्रणाली की दिशा में भारतीय न्यायपालिका की बड़ी छलांग

सीजेआई सूर्यकांत द्वारा लद्दाख के लिए उठाया गया यह कदम भारतीय न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के समावेश और विकेंद्रीकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। कोरोना काल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाइब्रिड और वर्चुअल सुनवाई को अपनाया था, लेकिन किसी विशिष्ट केंद्र शासित प्रदेश के लिए समर्पित विशेष दिन तय कर स्थानीय बार को सीधे जोड़ने का यह अपने आप में अनूठा प्रयोग है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस पहल से पूर्वोत्तर राज्यों, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे अन्य दूरदराज के क्षेत्रों के लिए भी एक नया मॉडल तैयार होगा। तकनीक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्याय को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त करने का यह प्रयास न केवल मामलों के त्वरित निपटारे में मदद करेगा, बल्कि संविधान के 'समान न्याय और सुलभ न्याय' के वादे को जमीनी स्तर पर साकार करेगा।