6 महीने में 247% का मल्टीबैगर रिटर्न देने वाले डिफेंस शेयर को मिला NATO से 973 करोड़ रुपये का महा-ऑर्डर

6 महीने में 247% का मल्टीबैगर रिटर्न देने वाले डिफेंस शेयर को मिला NATO से 973 करोड़ रुपये का महा-ऑर्डर

भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता के माहौल के बीच डिफेंस सेक्टर की कंपनियों का दबदबा लगातार मजबूत बना हुआ है। इसी कड़ी में डिफेंस और एयरोस्पेस इक्विपमेंट बनाने वाली दिग्गज कंपनी सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Sigma Advanced Systems Limited) के शेयरों में मंगलवार को जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। बीएसई (BSE) पर कारोबार शुरू होते ही कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत के ऊपरी सर्किट (Upper Circuit) के साथ 862.20 रुपये के भाव पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह स्टॉक 821.15 रुपये पर बंद हुआ था। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस डिफेंस मल्टीबैगर स्टॉक ने पिछले केवल 6 महीनों की अवधि में अपने निवेशकों को 247% से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है।

नाटो (NATO) ग्राहक से मिला 973 करोड़ रुपये का विशालकाय अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर

शेयरों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे कंपनी को मिला एक ऐतिहासिक विदेशी रक्षा अनुबंध है। सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स ने एक्सचेंज फाइलिंग में औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि उसे एक नॉर्थ अमेरिकन नाटो (NATO) ग्राहक से लगभग 973 करोड़ रुपये (करीब 102.23 मिलियन डॉलर) का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर प्राप्त हुआ है। इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत कंपनी को 155mm आर्टिलरी एम्युनिशन (तोपखाने के गोला-बारूद) के लिए क्रिटिकल सबसिस्टम्स और बेस ब्लीड यूनिट्स (Base Bleed Units) का निर्माण और आपूर्ति करनी होगी। यह ऑर्डर सीधे तौर पर पश्चिमी सैन्य गठबंधनों में भारतीय रक्षा विनिर्माण की बढ़ती स्वीकार्यता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

155mm आर्टिलरी एम्युनिशन और बेस ब्लीड यूनिट्स की तकनीकी खासियत

आधुनिक युद्धक्षेत्र में 155 एमएम आर्टिलरी गन सबसे प्राथमिक और घातक हथियार प्रणाली मानी जाती है। इसमें लगने वाली 'बेस ब्लीड यूनिट' एक अत्याधुनिक एरोडायनामिक तकनीक है, जो गोले के पिछले हिस्से में हवा के खिंचाव (ड्रैग) को कम करके तोप के गोले की मारक दूरी (रेंज) को 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ा देती है। सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स भारत की उन चुनिंदा निजी रक्षा कंपनियों में शामिल है जो आर्टिलरी शेल्स, फ्यूज और बेस ब्लीड यूनिट्स का एंड-टू-एंड वर्टिकल इंटीग्रेशन के तहत स्वदेशी निर्माण करने की तकनीकी क्षमता रखती हैं। बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता खत्म होने से कंपनी की सप्लाई चेन मजबूत हुई है और वैश्विक रक्षा बाजार में इसका मार्जिन प्रोफाइल काफी सुधरा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से आता है 80-85% रेवेन्यू और मजबूत ऑर्डर बुक

कंपनी के वित्तीय और परिचालन प्रोफाइल की सबसे बड़ी ताकत इसका ग्लोबल रीच और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मॉडल है। सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स के कुल राजस्व का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों से प्राप्त होता है, जबकि घरेलू भारतीय रक्षा बाजार से कंपनी को 15 से 20 प्रतिशत राजस्व मिलता है। कंपनी के पास आधुनिक एवियोनिक्स, रडार, नेवल सिस्टम्स, म्यूनिशन्स और एयरो-इंजन कंपोनेंट्स का एक विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो मौजूद है। वर्तमान में कंपनी के पास घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई वर्षों की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो आने वाले समय में इसके रेवेन्यू और मुनाफे को तेज गति प्रदान करने की पूरी गारंटी देती है।

मेक इन इंडिया से डिफेंस एक्सपोर्ट का बढ़ता कद

भारत सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' को दिए जा रहे आक्रामक प्रोत्साहन के चलते भारतीय निजी रक्षा कंपनियों का लोहा अब दुनिया मान रही है। नाटो देशों द्वारा भारतीय निजी कंपनियों को 155mm एम्युनिशन का बड़ा ठेका दिया जाना यह साबित करता है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और मूल्य निर्धारण वैश्विक मानकों पर पूरी तरह खरे उतर रहे हैं। लगभग 16,338 करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स के लिए यह 973 करोड़ रुपये का ऑर्डर न केवल उसकी ऑर्डर बुक को मजबूत करता है, बल्कि आने वाले समय में अन्य पश्चिमी और यूरोपीय देशों से भी नए अरबों के सौदे मिलने के रास्ते खोलता है।