त्योहारी सीजन से पहले हवाई यात्रियों को बड़ा झटका: Air India और AI Express ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

त्योहारी सीजन से पहले हवाई यात्रियों को बड़ा झटका: Air India और AI Express ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले हवाई यात्रा करने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। इंडिगो के बाद अब टाटा समूह की प्रमुख एयरलाइंस एयर इंडिया (Air India) और उसकी किफायती इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) बढ़ाने की घोषणा कर दी है।

यह संशोधित शुल्क 9 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत घरेलू उड़ानों के लिए यात्रियों को दूरी के हिसाब से ₹400 से लेकर ₹1,200 तक का अतिरिक्त सरचार्ज चुकाना होगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह भार $55 से लेकर $215 (लगभग ₹4,500 से ₹18,000) तक होगा।

घरेलू रूट्स पर दूरी के हिसाब से कितना बढ़ा सरचार्ज?

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा तय किए गए नए स्लैब के अनुसार घरेलू उड़ानों पर टिकट की दूरी के आधार पर अतिरिक्त चार्ज वसूला जाएगा:

यात्रा की दूरी (किलोमीटर में) नया फ्यूल सरचार्ज (प्रति यात्री)
500 किमी तक ₹400
501 से 1,000 किमी ₹600
1,001 से 1,500 किमी ₹900
1,501 से अधिक किमी ₹1,200

इसके चलते दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु, मुंबई-कोलकाता और लखनऊ-मुंबई जैसे व्यस्त घरेलू रूट्स पर सीधे तौर पर टिकट की कुल लागत बढ़ जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बड़ा भार

विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी लंबी दूरी की उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में भारी बढ़ोतरी की गई है:

  • पश्चिम एशिया/खाड़ी देश (Gulf/Middle East): $55 (करीब ₹4,600) प्रति टिकट।

  • यूरोप और अमेरिका/लंबी दूरी (Long-haul): विभिन्न रूट्स और दूरी के आधार पर अधिकतम $215 (करीब ₹18,000) तक का अतिरिक्त सरचार्ज वसूला जाएगा।

एयरलाइंस ने क्यों बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज? क्या है वजह?

एयर इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हाल ही में आई भारी उछाल के कारण करनी पड़ी है:

  • एटीएफ की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी: 1 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों ने जेट फ्यूल के दाम में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है, जिससे एक लीटर एटीएफ की कीमत ₹121 से उछलकर ₹137 पर पहुंच गई है।

  • ऑपरेटिंग लागत का 40% हिस्सा ईंधन: किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में अकेले जेट फ्यूल की हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत होती है।

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थिरता का सीधा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ा है।

त्योहारी सीजन में घर जाने के लिए पहले से ही महंगे हो रहे हवाई किरायों के बीच इस अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज से आम मुसाफिरों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा।