GST नियमों में हुआ ऐतिहासिक बदलाव: टैक्स अफसरों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म, अब 10 दिन में एक्नॉलेज होगा रिफंड क्लेम
देश के व्यापारिक जगत और करदाताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक नीतिगत सुधारों को मंजूरी दे दी गई है। काउंसिल द्वारा लिए गए सबसे बड़े फैसले के तहत अब जीएसटी टैक्स अधिकारियों के पास किसी भी करदाता या कारोबारी को सीधे गिरफ्तार करने की शक्ति नहीं होगी। जीएसटी कानून के तहत अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों (Arrest Powers) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
इसके साथ ही आपराधिक मुकदमों (Prosecution) को लेकर भी नियमों में बड़ा लचीलापन लाया गया है। पहले जहां 1 करोड़ रुपये की कथित कर गड़बड़ी पर कानूनी मुकदमा शुरू करने का प्रावधान था, वहीं अब इस सीमा को पांच गुना बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। न्यूनतम सजा का अनिवार्य प्रावधान भी हटा दिया गया है, जिससे जुर्माना या सजा तय करने का अधिकार अब पूरी तरह न्यायिक विवेक (Judicial Discretion) पर निर्भर करेगा। जहां कोई विशेष जुर्माना तय नहीं था, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी को भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
रिफंड प्रक्रिया हुई बेहद आसान: 10 दिन में अनिवार्य एक्नॉलेजमेंट और ऑटोमैटिक सैंक्शन
जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल को जाम होने से बचाने के लिए रिफंड प्रक्रिया को सुपरफास्ट बनाने का निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत रिफंड क्लेम की पावती (Acknowledgement) जारी करने की समयसीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। यदि निर्धारित 10 दिनों के भीतर संबंधित टैक्स अधिकारी कोई पावती या डेफिशिएंसी मेमो (Deficiency Memo) जारी नहीं करता है, तो आवेदन को स्वतः स्वीकृत यानी 'डीम्ड एक्नॉलेज्ड' मान लिया जाएगा।
नई ऑटोमेटेड प्रणाली के अंतर्गत रिस्क असेसमेंट पूरा होते ही 90 प्रतिशत पात्र रिफंड क्लेम सिस्टम द्वारा स्वतः मंजूर (Automatically Sanctioned) कर दिए जाएंगे। इसके लिए रिफंड आदेश जारी करने की अवधि भी 7 कार्यदिवसों से घटाकर मात्र 3 कार्यदिवस कर दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी अब पूरी तरह से मानवीय हस्तक्षेप के बिना सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा। इन तकनीकी बदलावों से निर्यातकों और मैन्युफैक्चरर्स को महीनों तक टैक्स दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स सेलर्स को मिला कंप्लायंस का सुरक्षा कवच
छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए अनुपालन का बोझ हल्का करने के उद्देश्य से 5 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले उन कारोबारियों के लिए वैकल्पिक वार्षिक रिटर्न (Annual Return) योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है जो सीधे उपभोक्ताओं (B2C) को माल बेचते हैं। ऐसे व्यापारी साल में केवल एक बार वार्षिक रिटर्न भर सकेंगे और टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर कर सकेंगे।
काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों द्वारा भेजे जाने वाले गैर-जरूरी शो-कॉज नोटिसों पर भी लगाम लगाई है। अब कम से कम 10,000 रुपये से कम की राशि के लिए कोई शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया जा सकेगा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उत्पाद बेचने वाले छोटे व्यापारियों को किसी दूसरे राज्य में काम करने के लिए अलग से भौतिक दुकान या कार्यालय खोलने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है; वे प्लेटफॉर्म ऑपरेटर के वेयरहाउस को ही अपना मुख्य कारोबारी ठिकाना दर्ज करा सकेंगे।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य-जीवन बीमा पर मिलेगा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)
काउंसिल की बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे को बढ़ाते हुए कंपनियों के लिए बड़ा आर्थिक लाभ तय किया गया है। अब कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए खरीदी जाने वाली ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर चुकाए गए टैक्स का पूरा आईटीसी क्लेम कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त टेलीकॉम टावर्स, कुछ विशिष्ट पाइपलाइनों और कारोबार में बांटे जाने वाले मुफ्त सैंपल्स पर भी आईटीसी की अनुमति दी गई है।
काउंसिल ने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर भी रिफंड देने का रास्ता साफ कर दिया है, जो 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। वहीं प्लांट और मशीनरी पर रिफंड का लाभ 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा। सप्लायर की गलती के कारण वास्तविक खरीदारों का आईटीसी रोके जाने की समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है जो तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत सिफारिशें सौंपेगी।