SBI ग्राहकों को झटका: फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज बढ़ाने के मूड में नहीं बैंक
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India - SBI) के खाताधारकों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए निराशाजनक खबर सामने आई है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत रेपो दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि कमर्शियल बैंक भी अपनी जमा दरों में इजाफा करेंगे। हालांकि, एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने साफ कर दिया है कि बैंक फिलहाल अगले दो से तीन महीनों तक अपने सेविंग्स या टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों को बढ़ाने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
बैंक प्रबंधन की ओर से आए इस बयान ने उन करोड़ों आम और वरिष्ठ नागरिक निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जो अपने अतिरिक्त फंड को ऊंची ब्याज दरों पर फिक्स्ड डिपॉजिट में लॉक करने की योजना बना रहे थे। बैंक के शीर्ष नेतृत्व के अनुसार, मौजूदा समय में बैंक की वित्तीय स्थिति ऐसी है कि उसे जमा पूंजी आकर्षित करने के लिए दरों में आक्रामक बदलाव करने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है।
चेयरमैन सी एस शेट्टी ने बताई ब्याज न बढ़ाने की असली वजह
एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बैंकिंग प्रणाली में मौजूदा वक्त में पर्याप्त नकदी (Surplus Liquidity) उपलब्ध है। जब किसी बैंक के पास पहले से ही पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद होती है, तो उसे नए डिपॉजिट जुटाने के लिए ऊंची ब्याज दरों की पेशकश करने का दबाव नहीं झेलना पड़ता। इसी नकदी संतुलन के चलते बैंक ने अगले क्वार्टर तक ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने का फैसला किया है।
इसके साथ ही चेयरमैन ने बैंक की क्रेडिट ग्रोथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि एसबीआई चालू वित्त वर्ष में अपने लोन पोर्टफोलियो में 14 से 15 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने रेखांकित किया कि बैंक की लोन ग्रोथ देश की जीडीपी की नॉमिनल ग्रोथ रेट से कम से कम 2 से 3 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए, और बैंक का मौजूदा लिक्विडिटी बेस इस क्रेडिट डिमांड को बिना डिपॉजिट रेट्स बढ़ाए भी आसानी से पूरा कर सकता है।
मौजूदा एफडी स्कीम्स और निवेशकों पर पड़ने वाला असर
एसबीआई की मौजूदा ब्याज दरों की बात करें तो बैंक आम नागरिकों को विभिन्न अवधियों के लिए 3.05% से लेकर 6.45% तक का अधिकतम ब्याज दे रहा है। बैंक की चर्चित 444 दिन वाली 'अमृत वृष्टि' (Amrit Vrishti) स्कीम के तहत सामान्य निवेशकों को 6.45% और वरिष्ठ नागरिकों को 6.95% की दर से रिटर्न मिल रहा है। इसके अलावा 5 साल से 10 साल की टैक्स-सेविंग एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 'एसबीआई वीकेयर' के तहत अधिकतम 7.05% तक ब्याज ऑफर किया जा रहा है।
चेयरमैन के इस रुख के बाद निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है कि यदि वे एसबीआई में अपनी एफडी को मैच्योर होने पर रिन्यू कराने जा रहे हैं, तो उन्हें निकट भविष्य में अधिक ब्याज दर का फायदा नहीं मिलने वाला है। वित्तीय विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर निवेशक अधिक रिटर्न पाना चाहते हैं, तो वे छोटे फाइनेंस बैंकों या अन्य प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना कर सकते हैं, जिन्होंने हालिया रेपो रेट हाइक के बाद अपनी दरों में 40 बेसिस प्वाइंट्स तक की बढ़ोतरी शुरू कर दी है।
लोन ग्राहकों के लिए क्या हैं संकेत?
जमाकर्ताओं के लिए भले ही यह खबर उत्साहजनक न हो, लेकिन लोन ग्राहकों के लिए स्थिति अलग है। रेपो रेट से जुड़े एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स (EBLR) में आरबीआई के फैसले के बाद स्वतः बढ़ोतरी होने से होम लोन और कार लोन की ईएमआई पर पहले ही दबाव बन चुका है। ऐसे में डिपॉजिट पर ब्याज न बढ़ाने से एसबीआई के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर लागत का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा, जिससे भविष्य में लेंडिंग दरों में गैर-जरूरी बढ़ोतरी को थामने में मदद मिल सकती है।