Homebuyers Fraud Case: घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में ED का बड़ा एक्शन

Homebuyers Fraud Case: घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में ED का बड़ा एक्शन

देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अपने सपनों का आशियाना खरीदने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने रियल एस्टेट क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (RDL), इसके प्रबंध निदेशक नवीन एम. रहेजा और उनके परिवार के प्रमुख सदस्यों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आरोपपत्र यानी चार्जशीट दाखिल कर दी है। नई दिल्ली की साकेत स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल इस अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) में जांच एजेंसी ने रहेजा समूह पर घर खरीदारों के लगभग ₹1,353.26 करोड़ रुपये के फंड की सुनियोजित मनी लॉन्ड्रिंग करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस कदम के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों और घर खरीदारों के पैसे को गैर-कानूनी ढंग से अन्यत्र डायवर्ट करने वाले बिल्डरों के बीच हड़कंप मच गया है।ईडी की यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और हरियाणा के गुरुग्राम पुलिस थानों में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के पीड़ित घर खरीदारों द्वारा दर्ज कराई गई दर्जनों एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि निवेशकों और बायर्स ने अपनी जीवनभर की पूंजी फ्लैटों और व्यावसायिक परिसरों की बुकिंग में लगा दी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद बिल्डर ने न तो परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया और न ही खरीदारों को कब्जा (Possession) अथवा जमा की गई मूल रकम वापस लौटाई।

चार्जशीट में प्रमोटर परिवार सहित 21 नामजद, गैर-जमानती वारंट की उठी मांग

जांच एजेंसी द्वारा विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट में कुल 21 व्यक्तियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। इनमें रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (RDL), कंपनी के एमडी नवीन एम. रहेजा, उनके बेटे नयन एन. रहेजा, बेटी नयना एन. सिंघानिया, पत्नी निर्मल रहेजा के साथ-साथ अरबटेक कंस्ट्रक्शन, रियासत पैलेसेज, एन.ए. बिल्डवेल और रहेजा आइकन एंटरटेनमेंट जैसी शेल व सहयोगी कंपनियां शामिल हैं। एजेंसी ने चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि इन सभी पर पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध करने का दोष है, जो धारा 4 के अंतर्गत कठोर कारावास और जुर्माने से दंडनीय है। ईडी के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि प्रमोटर नवीन रहेजा और उनके परिवार के सदस्यों ने जांच में सहयोग करने से लगातार परहेज किया। एजेंसी द्वारा पीएमएलए की धारा 50 के तहत जारी किए गए दर्जनों समन और तलाशी अभियानों की नोटिसों के बावजूद ये आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए। नयन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका को पहले ही साकेत विशेष अदालत और उसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किया जा चुका है। जांच से लगातार भाग रहे इन सभी चार मुख्य प्रमोटरों के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने और गिरफ्तारी के बाद तुरंत हिरासत में सौंपने की औपचारिक मांग की गई है।

₹2,699 करोड़ की वसूली और एस्क्रो खातों से ₹1,175 करोड़ का अवैध डायवर्जन

जांच एजेंसी की विस्तृत फोरेंसिक और वित्तीय जांच में बिल्डर द्वारा किए गए वित्तीय फर्जीवाड़े की परतें खुलकर सामने आई हैं। जांच के अनुसार, रहेजा समूह ने अपनी विभिन्न आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के नाम पर लगभग 4,600 से अधिक सीधे खरीदारों और निवेशकों से करीब ₹2,699.13 करोड़ की विशाल धनराशि जुटाई थी। रेरा (RERA) नियमों और अनुबंधों के मुताबिक इस पैसे को संबंधित प्रोजेक्ट्स के डेडिकेटेड एस्क्रो खातों में रखा जाना था, ताकि इसका इस्तेमाल केवल निर्माण कार्यों और जमीन के वैधानिक बकायों को चुकाने में हो सके। लेकिन जांच में पाया गया कि डेवलपर्स ने आपराधिक साजिश रचते हुए ₹1,175.86 करोड़ की भारी-भरकम राशि को प्रोजेक्ट और एस्क्रो खातों से अवैध रूप से बाहर निकाल लिया। इसके अलावा, फ्लैटों की बुकिंग और लेन-देन के दौरान ₹177.40 करोड़ की नकदी गैर-पंजीकृत समझौतों के जरिए जुटाई गई, जिसका कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं रखा गया। इस तरह कुल ₹1,353.26 करोड़ को आपराधिक आय (Proceeds of Crime) के रूप में चिह्नित किया गया, जिसे फर्जी कंपनियों, व्यक्तिगत खातों और संबंधित पक्षों के माध्यम से इधर-उधर घुमाकर निजी जमीनें खरीदने और अन्य संपत्तियां खड़ी करने में खपाया गया।

₹2,400 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, सरकारी जब्ती की अंतिम प्रक्रिया शुरू

मनी लॉन्ड्रिंग की इस विशाल राशि की भरपाई और पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए ईडी पहले ही रहेजा डेवलपर्स और उसके प्रमोटरों के खिलाफ कठोर संपत्ति जब्ती के कदम उठा चुकी है। एजेंसी ने 28 अप्रैल और 30 जुलाई को जारी अनंतिम कुर्की आदेशों (Provisional Attachment Orders) के तहत दिल्ली और हरियाणा में स्थित विशाल अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इन संपत्तियों का बही मूल्य (Book Value) लगभग ₹810.57 करोड़ है, जबकि मौजूदा बाजार मूल्य लगभग ₹2,399.65 करोड़ आंका गया है। पीएमएलए के तहत गठित न्यायाधिकरण (Adjudicating Authority) ने इन संपत्तियों की जब्ती को पूरी तरह वैध ठहराते हुए बरकरार रखने की मंजूरी दे दी है। अब अदालत में पेश की गई चार्जशीट के जरिए ईडी ने साकेत कोर्ट से यह औपचारिक गुहार लगाई है कि इन सभी कुर्क संपत्तियों को अंतिम रूप से केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त (Confiscate) करने का आदेश दिया जाए, ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर पीड़ितों और घर खरीदारों के नुकसान की भरपाई की जा सके।

'रहेजा रेवंता' समेत कई प्रोजेक्ट्स अधर में, पीड़ितों का सब्र टूटा

रहेजा डेवलपर्स के इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित वे आम नागरिक हुए हैं, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई और जीवनभर की बचत दिल्ली-एनसीआर में घर पाने के लिए लगा दी थी। गुरुग्राम के सेक्टर-78 स्थित बहुचर्चित 'रहेजा रेवंता' समेत समूह की कई प्रमुख परियोजनाएं पिछले कई वर्षों से अधूरी और वीरान पड़ी हैं। हालांकि, बिल्डर प्रबंधन ने पूर्व में यह दावा किया था कि परियोजनाओं में देरी बुनियादी नागरिक सुविधाओं और सरकारी अनुमतियों की कमी के कारण हुई, लेकिन जांच एजेंसी के वित्तीय सबूतों ने साबित कर दिया है कि परियोजनाएं धन की कमी से नहीं, बल्कि धन के जानबूझकर किए गए गबन के चलते रुकी थीं। घर खरीदारों के संघों ने ईडी की इस चार्जशीट का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि अदालत से सख्त आदेश आने के बाद न केवल प्रमोटरों पर कानूनी शिकंजा कसेगा, बल्कि उनकी कुर्क संपत्तियों के जरिए अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने या निवेशकों को उनका पैसा ब्याज समेत लौटाने की राह भी आसान हो सकेगी।