कानपुर में जाम से सिपाही की मौत पर भड़कीं नेहा बोरा, CM योगी से पूछा- क्या अब चेक देकर फोटो खिंचवाने जाएंगे?

कानपुर में जाम से सिपाही की मौत पर भड़कीं नेहा बोरा, CM योगी से पूछा- क्या अब चेक देकर फोटो खिंचवाने जाएंगे?

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सड़क हादसे में घायल 22 वर्षीय पुलिस सिपाही प्रांशु सचान की एंबुलेंस में तड़प-तड़प कर हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गंभीर रूप से घायल बेटे को बचाने के लिए पिता रास्ते भर लोगों और ट्रैफिक पुलिस के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन शहर में राजनीतिक रैली के चलते लगे भीषण जाम के कारण एंबुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और सिपाही ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना को लेकर आइसा (AISA) से जुड़ी छात्र नेता नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। नेहा बोरा ने तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि क्या सरकार में बैठे लोग अब इस जवान के परिवार को चेक सौंपते हुए फोटो खिंचवाने जाएंगे?

'यह एक ऐसी मौत, जिसे रोका जा सकता था': नेहा बोरा का तीखा प्रहार

नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पर कानपुर की इस दर्दनाक घटना का हवाला देते हुए लिखा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना से हुई मौत नहीं है, बल्कि एक ऐसी मौत है जिसे अगर व्यवस्था चाहती तो आसानी से रोका जा सकता था।

नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश भाजपा को टैग करते हुए सवाल दागा:

"कानपुर में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली के कारण लगे भयंकर ट्रैफिक जाम में एंबुलेंस करीब डेढ़ से दो घंटे तक फंसी रही। 22 साल का सिपाही प्रांशु सचान एंबुलेंस के भीतर खून से लथपथ तड़पता रहा और उसके पिता बाहर सड़क पर लोगों के आगे हाथ जोड़कर रास्ता मांगते रहे। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उस नौजवान की सांसें थम गईं। योगी आदित्यनाथ जी और यूपी भाजपा, क्या अब आप पीड़ित परिवार के घर सांत्वना देने और चेक सौंपते हुए अपनी फोटो खिंचवाने जाएंगे?"

नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि सत्ता के शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक रैलियों के लिए आम जनता और आपातकालीन सेवाओं को बंधक बना देना अमानवीयता की पराकाष्ठा है।

क्या है कानपुर का पूरा मामला? पिता की आंखों के सामने बुझा घर का चिराग

मृतक सिपाही प्रांशु सचान कानपुर के घाटमपुर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम मोतीपुर के रहने वाले थे और वर्ष 2025 बैच के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती अंबेडकरनगर जिले के डांडा कोतवाली में थी।

  • हादसा कैसे हुआ: प्रांशु कोर्ट समन तामील कराने के सिलसिले में निकले थे और रास्ते में पिता प्रमोद सचान को बाइक पर साथ लेकर फतेहपुर जा रहे थे। फतेहपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में बक्सर मोड़ के पास एक तेज रफ्तार अनियंत्रित डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे में प्रांशु डंपर के पहिये के नीचे आकर गंभीर रूप से कुचल गए।

  • रेफर और जाम का चक्रव्यूह: प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत कानपुर के हैलट (LLR) अस्पताल रेफर कर दिया। पिता बेटे को एंबुलेंस में लेकर कानपुर पहुंचे, लेकिन शहर के व्यस्त टाटमिल चौराहे पर एंबुलेंस भीषण जाम में फंस गई।

  • हाथ जोड़ते रहे पिता, नहीं मिला रास्ता: परिजनों का आरोप है कि भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा और रैली के चलते पूरे क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं। पिता प्रमोद सचान रोते हुए एंबुलेंस से नीचे उतरकर लोगों से रास्ता देने की गुहार लगाते रहे। यातायात पुलिस के प्रयास के बावजूद एंबुलेंस लगभग डेढ़ घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसी रही। जब तक एंबुलेंस हैलट अस्पताल पहुंची, डॉक्टरों ने प्रांशु को मृत घोषित कर दिया।

प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठ रहे गंभीर सवाल

इकलौते बेटे की इस तरह तड़प-तड़प कर हुई मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। इस घटना का वीडियो और पिता की बेबसी की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष और नागरिक समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब भी वीआईपी मूवमेंट या राजनीतिक रैलियां होती हैं, तो आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' या सुरक्षित निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?

नेहा बोरा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां एक तरफ लोग प्रशासनिक लापरवाही और रैलियों के चलते लगने वाले जाम पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घटना की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।