'पहले रामभक्तों से माफी मांगें, फिर आएं अयोध्या...' अखिलेश यादव के रामलला दर्शन प्लान पर सीएम योगी का तीखा हमला

'पहले रामभक्तों से माफी मांगें, फिर आएं अयोध्या...' अखिलेश यादव के रामलला दर्शन प्लान पर सीएम योगी का तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा आगामी 12 दिसंबर को पत्नी डिंपल यादव और बच्चों के साथ अयोध्या जाकर रामलला व हनुमानगढ़ी के दर्शन करने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। सपा प्रमुख के इस प्रस्तावित दौरे पर अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सीधा और बेहद तल्ख बयान सामने आया है। सीएम योगी ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को 'चुनावी पाखंड' और 'अवसरवादिता' करार देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम की पावन नगरी में कदम रखने से पहले समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को 1990 में अयोध्या की पावन धरा पर निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाने के पाप के लिए देश और रामभक्तों से खुले मंच से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।

'जब मंदिर का निमंत्रण ठुकराया, तब कहां थी आस्था?': मुख्यमंत्री के तीखे सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख के पुराने रुख पर जमकर निशाना साधा।

सीएम योगी ने कहा:

  • प्राण प्रतिष्ठा का बहिष्कार: जब 22 जनवरी को पूरी दुनिया रामलला के भव्य गर्भगृह में विराजमान होने का उत्सव मना रही थी, तब समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट के विधिवत और ससम्मान भेजे गए निमंत्रण पत्र को यह कहकर ठुकरा दिया था कि वे बाद में जाएंगे।

  • वोट बैंक की तुष्टीकरण की राजनीति: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा को सदैव एक खास वर्ग के वोट बैंक के खिसकने का डर सताता रहा। जब तक सत्ता का स्वार्थ सधता रहा, तब तक इन्होंने राम मंदिर आंदोलन को बदनाम किया, भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों का समर्थन किया और रामचरितमानस की प्रतियों को जलाने वालों को संरक्षण दिया।

  • चुनावी आहट और हृदय परिवर्तन का ढोंग: सीएम योगी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और प्रदेश की जनता ने लोकसभा चुनाव के बाद सनातन विरोधी ताकतों को पहचान लिया है, तो अचानक सपा नेतृत्व को रामलला की याद सताने लगी है। उन्होंने कहा कि आस्था दिखावे का विषय नहीं है, और यदि मन में तनिक भी पश्चाताप है, तो अयोध्या आने से पहले रामभक्तों से क्षमा याचना करनी चाहिए।

1990 की कारसेवा और गोलीकांड का सियासी जिन्न फिर बाहर

सीएम योगी के इस बयान ने अयोध्या में अक्टूबर-नवंबर 1990 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान कारसेवकों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और गोलीकांड की घटनाओं को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। भाजपा शुरू से ही इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरती रही है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि जिस पार्टी के शासनकाल में सरयू का जल कारसेवकों के खून से लाल हुआ था और संतों को जेलों में ठूंसा गया था, उसके मौजूदा मुखिया बिना किसी प्रायश्चित के केवल वोट बैंक की खातिर रामलला के दरबार में मत्था टेकने का दिखावा कर रहे हैं।

सपा का पलटवार: 'राम किसी दल की निजी संपत्ति नहीं, योगी जी सर्टिफिकेट बांटना बंद करें'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े प्रहार के बाद समाजवादी पार्टी ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए पलटवार किया है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेताओं ने सीएम योगी के बयान को राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया।

सपा नेताओं का कहना है:

  • भगवान राम सबके हैं: प्रभु श्रीराम कण-कण में विद्यमान हैं और वे समूचे ब्रह्मांड के आराध्य हैं। किसी भी नागरिक या भक्त को अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए भारतीय जनता पार्टी या मुख्यमंत्री के 'सर्टिफिकेट' या अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

  • आस्था पर एकाधिकार की कोशिश: सपा का आरोप है कि भाजपा धर्म और आस्था को अपनी निजी जागीर समझती है। अखिलेश यादव और उनका परिवार सदैव धार्मिक अनुष्ठानों, शिव आराधना और कथाओं में श्रद्धापूर्वक शामिल होता रहा है।

  • असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल: सपा प्रवक्ताओं ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कानपुर में एंबुलेंस जाम से सिपाही की मौत और ध्वस्त कानून-व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री हर बार 35 साल पुराने मुद्दों और धर्म की आड़ लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।

12 दिसंबर के दौरे से पहले अयोध्या से लखनऊ तक चढ़ा सियासी पारा

अखिलेश यादव के 12 दिसंबर के अयोध्या आगमन को लेकर जहां समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय भव्य स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं संतों के बीच भी दोफाड़ राय देखने को मिल रही है। अयोध्या के कुछ प्रमुख संतों ने कहा है कि रामलला के द्वार सभी के लिए खुले हैं और कोई भी सनातनी दर्शन के लिए आ सकता है, जबकि कुछ धर्माचार्यों ने सीएम योगी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि सपा को कारसेवकों के प्रति अपने ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर खेद अवश्य प्रकट करना चाहिए। साफ है कि 12 दिसंबर तक अयोध्या का यह धार्मिक दौरा पूरी तरह से चुनावी अखाड़े में तब्दील रहने वाला है।