59% उछला बिड़ला ग्रुप की दिग्गज कंपनी हिंडाल्को का मुनाफा, मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज हुए लट्टू

59% उछला बिड़ला ग्रुप की दिग्गज कंपनी हिंडाल्को का मुनाफा, मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज हुए लट्टू

भारतीय शेयर बाजार में कॉर्पोरेट अर्निंग्स के मौजूदा सीजन के बीच आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख मेटल कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Hindalco Industries Ltd) ने अपने असाधारण वित्तीय परिणामों से निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को चौंका दिया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही के दौरान कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) में सालाना आधार पर 58.8 प्रतिशत यानी लगभग 59 फीसदी की जोरदार छलांग दर्ज की गई है। शेयर बाजार (BSE) को दी गई आधिकारिक वित्तीय सूचना के अनुसार, समीक्षाधीन तिमाही में हिंडाल्को का कुल शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹7,533 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा है, जबकि ठीक एक साल पहले समान तिमाही में यह आंकड़ा ₹4,741 करोड़ दर्ज किया गया था। वैश्विक स्तर पर मेटल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में कंपनी की इस जबरदस्त अर्निंग ग्रोथ ने यह साबित कर दिया है कि उसका एकीकृत बिजनेस मॉडल हर तरह के बाजार चक्र में मजबूत रिटर्न देने में पूरी तरह सक्षम है।

आय में 39% और एबिटा में 42% का उछाल: रिकॉर्ड पर पहुंचा वित्तीय प्रदर्शन

हिंडाल्को के सिर्फ मुनाफे में ही नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर की कमाई यानी रेवेन्यू में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी की कुल समेकित परिचालन आय सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर ₹92,651 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में ₹66,771 करोड़ के स्तर पर थी। परिचालन स्तर पर लाभप्रदता का पैमाना माने जाने वाले एबिटा (EBITDA) में 42 प्रतिशत का शानदार उछाल देखा गया और यह बढ़कर ₹13,757 करोड़ हो गया। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, इस सर्वकालिक श्रेष्ठ प्रदर्शन के पीछे प्राइमरी अपस्ट्रीम ऑपरेशंस और तेजी से बढ़ते डाउनस्ट्रीम कारोबार का संयुक्त तालमेल रहा है। घरेलू एल्युमीनियम की ठोस मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में धातु की सुधरी हुई कीमतों और लागत नियंत्रण के अनुशासित उपायों ने कंपनी की मार्जिन प्रोफाइल को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

कॉपर बिजनेस में ऑल-टाइम हाई मुनाफा और अमेरिकी सब्सिडियरी नोवेलिस की दमदार रिकवरी

कंपनी के प्रदर्शन का सबसे चमकता सितारा इसका तांबा कारोबार (Copper Business) बनकर उभरा। भारत की 50 प्रतिशत से अधिक तांबे की घरेलू मांग पूरी करने वाली हिंडाल्को के कॉपर डिवीजन ने अपने इतिहास का सबसे अधिक तिमाही एबिटा दर्ज किया है। गुजरात के दाहेज में स्थित अत्याधुनिक स्मेल्टर और रिफाइनरी परिसर से उच्च क्षमता पर उत्पादन और वैश्विक मांग के चलते कॉपर सेगमेन्ट ने कंपनी की समेकित बैलेंस शीट को बड़ा सहारा दिया। वहीं दूसरी ओर, हिंडाल्को की अमेरिकी सहायक कंपनी नोवेलिस (Novelis Inc.) ने भी अपने परिचालन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। ओस्वेगो (Oswego) स्थित प्लांट में आई तकनीकी बाधाओं के पूरी तरह सामान्य होने के बाद ऑटोमोटिव, कैन बॉडी शीट और एरोस्पेस सेगमेंट्स में एल्युमीनियम शीट की मांग पटरी पर लौट आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर कंपनी के राजस्व प्रवाह को गति मिली है।

नॉन-LME कारोबार का बढ़ता दायरा: लंदन मेटल एक्सचेंज के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा कवच

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज की रणनीति का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब उसकी कुल कमाई का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा नॉन-एलएमई (Non-LME) यानी गैर-लंदन मेटल एक्सचेंज से जुड़े उत्पादों से आ रहा है। इसका सीधा लाभ यह होता है कि जब लंदन मेटल एक्सचेंज पर कच्चे एल्युमीनियम के वैश्विक दामों में भारी गिरावट या अस्थिरता आती है, तब भी कंपनी के मुनाफे पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। हिंडाल्को अब केवल कच्ची धातु निकालने वाली कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह ईवी बैटरी फॉइल, इनर ग्रूव्डेड ट्यूब्स, रेलवे और पैकेजिंग के लिए विशेष फ्लैट-रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) जैसे उच्च मार्जिन वाले डाउनस्ट्रीम उत्पादों का तेजी से विस्तार कर रही है। अमेरिका में निर्माणाधीन मेगा बे मिनेट (Bay Minette) परियोजना के पूरी तरह चालू होने के बाद यह नॉन-एलएमई योगदान और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कंपनी के कैश फ्लो को लंबी अवधि का रक्षा कवच मिलेगा।

इनपुट कॉस्ट और कोयले की कीमतों पर प्रबंधन का बयान: Q3 में दबाव, Q4 से राहत

नतीजों के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक (MD) सतीश पाई ने आगामी तिमाहियों के लिए लागत परिदृश्य पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में भारत के एल्युमीनियम उत्पादन की लागत में दूसरी तिमाही के मुकाबले लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका मुख्य कारण उत्तर भारत में कोयले की कीमतों का ऊंचा रहना और घरेलू कोयला आपूर्ति में अस्थायी जकड़न (Tightness) है, जिसके चलते कुछ संयंत्रों में कोयला इन्वेंट्री सामान्य स्तर से लगभग आधी रह गई है। हालांकि, ओडिशा स्थित सुविधाओं में कोयले का स्टॉक सामान्य बना हुआ है। सतीश पाई ने विश्वास जताया कि सर्दियों के आगमन और उत्तरी राज्यों में बिजली की मांग घटने के साथ ही चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) से कोयले की उपलब्धता सुधरेगी और उत्पादन लागत में दोबारा गिरावट शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही कंपनी नोवेलिस के नेट-डेट-टू-एबिटा अनुपात को मौजूदा 4.7 से घटाकर लंबी अवधि में 2.5 के सुरक्षित स्तर पर लाने के वित्तीय लक्ष्य पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।

ब्रोकरेज हुए बुलिश: रेटिंग 'BUY' बरकरार, टारगेट बढ़ाकर ₹1,184 किया

मजबूत नतीजों, नकदी प्रवाह में सुधार और कर्ज कटौती के स्पष्ट रोडमैप को देखते हुए प्रमुख घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज हाउसेज ने हिंडाल्को के शेयरों पर अपना भरोसा जताया है। ब्रोकरेज फर्म्स ने शेयर की रेटिंग को 'बाय' (Buy) पर बरकरार रखते हुए इसके पूर्व निर्धारित टारगेट प्राइस को ₹1,108 से बढ़ाकर ₹1,184 प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज विश्लेषकों का मानना है कि कॉपर कारोबार में रिकॉर्ड मार्जिन, डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स का तेजी से क्रियान्वयन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) व इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से एल्युमीनियम की बढ़ती दीर्घकालिक खपत हिंडाल्को के वैल्यूएशन को मल्टी-ईयर री-रेटिंग प्रदान करेगी।

शेयर बाजार में एक्शन: पिछले 2 हफ्तों में 11% से ज्यादा चढ़ा स्टॉक

नतीजों की पूर्व संध्या और ऐलान के दिन दलाल स्ट्रीट पर हिंडाल्को के शेयरों में जबर्दस्त खरीदारी देखने को मिली। शुक्रवार को कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती के साथ ₹957.70 पर बंद हुआ। पिछले एक सप्ताह के भीतर इस शेयर ने 7.25 प्रतिशत और बीते दो हफ्तों में 11.30 प्रतिशत से अधिक का सॉलिड रिटर्न दिया है। वहीं एक साल के नजरिए से देखें तो यह शेयर 21.53 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज कर चुका है। मौजूदा समय में यह शेयर अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर ₹1,179.35 के नजदीक जाने की कोशिश कर रहा है। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि बुनियादी रूप से मजबूत आंकड़ों और ब्रोकरेज के बढ़े हुए टारगेट के चलते मौजूदा स्तरों से यह शेयर लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन का एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।