Sensex 1 Lakh Nifty 30000: अगले साल 1 लाख के पार जाएगा सेंसेक्स और 30 हजारी बनेगा निफ्टी

Sensex 1 Lakh Nifty 30000: अगले साल 1 लाख के पार जाएगा सेंसेक्स और 30 हजारी बनेगा निफ्टी

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अस्थिरता के बाद अब एक नए ऐतिहासिक बुल रन की शुरुआत के ठोस संकेत मिलने लगे हैं। घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से आ रहे सुधार के बीच प्रमुख ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स (Anand Rathi) ने भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी को लेकर बेहद उत्साहजनक और बड़ा अनुमान जारी किया है। आनंद राठी के इक्विटी रिसर्च (AVP) गणेश डोंगरे के ताजा तकनीकी और बुनियादी विश्लेषण के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में अगले एक साल के भीतर 20 फीसदी से अधिक की जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि अगली दिवाली तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 30,000 अंक के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर सकता है, वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सामान्य परिस्थितियों में 90,000 अंक और अनुकूल बुल-केस परिदृश्य (Bull Case) में 1,05,000 अंक के जादुई स्तर को छूने का पूरा दम रखता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा स्तरों से सेंसेक्स में 20,000 से 24,000 अंक और निफ्टी में लगभग 5,000 अंक का जबरदस्त उछाल आने की पूरी संभावना बन रही है।

घरेलू निवेशकों (DII) की ताकत और विदेशी निवेशकों (FII) की संभावित महा-वापसी

ब्रोकरेज फर्म के इस मजबूत आउटलुक के पीछे सबसे बड़ा आधार भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों का लगातार बढ़ता वित्तीय पराक्रम है। पिछले दो वर्षों के दौरान जब भी वैश्विक आर्थिक तनाव, युद्ध की आशंकाओं या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से लाखों करोड़ रुपये की आक्रामक बिकवाली की, तब घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंडों में हर महीने आने वाले रिकॉर्ड एसआईपी (SIP) निवेश ने बाजार को चट्टान की तरह संभाले रखा। अब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नरमी आने, डॉलर इंडेक्स पर दबाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होने से विदेशी निवेशक एक बार फिर भारत जैसे सबसे तेजी से बढ़ते उभरते बाजार (Emerging Market) की ओर रुख करने को तैयार हैं। वैश्विक संस्थागत निवेशकों की संभावित वापसी भारतीय इक्विटी बाजारों में नई पूंजी का ऐसा सैलाब ला सकती है, जो इंडेक्स को आसानी से नई बुलंदियों पर पहुंचा देगा।

वैश्विक आर्थिक समीकरणों में बदलाव: ट्रंप, डेमोक्रेट्स और कच्चे तेल की गिरावट का सहारा

आनंद राठी के विश्लेषकों का मानना है कि हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में मजबूत माहौल तैयार किया है। अमेरिका में राजनीतिक संतुलन बदलने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी आने के साथ ही अमेरिकी बॉन्ड बाजार से निवेशकों का ध्यान हटकर इक्विटी की ओर लौट रहा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई स्थिरता और गिरावट भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी साबित हो रही है। सस्ता कच्चा तेल भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को कम करता है, महंगाई के दबाव को नियंत्रित रखता है और कंपनियों के परिचालन मार्जिन को बेहतर बनाता है। जब डॉलर कमजोर होता है और तेल सस्ता रहता है, तो भारतीय बाजार की आकर्षण क्षमता विदेशी फंड मैनेजरों की नजर में कई गुना बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर निफ्टी और सेंसेक्स के वैल्यूएशन मल्टीपल पर देखने को मिलता है।

शुक्रवार के कारोबारी सत्र में दिखा तूफानी ट्रेलर: 81 हजार के पार सेंसेक्स, निफ्टी 25,000 पर

इस संभावित तेजी की पहली झलक हालिया कारोबारी सत्रों में साफ तौर पर देखने को मिली है। बीते शुक्रवार को दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा लिवाली का ऐसा तूफान आया कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर दिन के उच्चतम स्तर 81,028.02 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 25,030.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते नौ महीनों का उसका सबसे मजबूत बंद स्तर था। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी और कैपिटल गुड्स जैसे प्रमुख सेक्टरों में संस्थागत स्तर पर हुई आक्रामक खरीदारी यह दर्शाती है कि स्मार्ट मनी पहले से ही बाजार के इस अगले अप-लेग के लिए अपनी पोजिशनिंग मजबूत कर रही है। सेंसेक्स का सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) 86,159.02 अंक रहा है, और मौजूदा स्तरों से यह अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने से मात्र कुछ ही हजार अंक दूर है।

सिर्फ आनंद राठी ही नहीं, मॉर्गन स्टेनली जैसी वैश्विक एजेंसियां भी हैं पूरी तरह बुलिश

भारतीय बाजार के 1 लाख के स्तर को छूने का भरोसा केवल घरेलू ब्रोकरेज तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित निवेश फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भी अपने दीर्घावधि विश्लेषण में सेंसेक्स के लिए बुल-केस में 1,00,000 अंक का विशाल टारगेट तय कर रखा है। वैश्विक ब्रोकरेज का मानना है कि भारत की मजबूत जनसांख्यिकी (Demographic Dividend), कॉर्पोरेट सेक्टर की ठोस अर्निंग ग्रोथ, बुनियादी ढांचे पर सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से बढ़ता निजी निवेश देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा। जब किसी देश की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हो, तो कंपनियों के राजस्व और लाभ में 15 से 18 प्रतिशत की चक्रवृद्धिक वृद्धि (Compounding) स्वाभाविक होती है, जो अल्टीमेटली शेयर इंडेक्स को 30,000 और 1,00,000 के जादुई स्तरों तक ले जाने का सबसे मजबूत ईंधन बनती है।

खुदरा और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या है जानकारों की सीधी सलाह?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब बाजार 1 लाख और 30 हजार जैसे ऐतिहासिक पड़ावों की ओर बढ़ रहा हो, तो आम निवेशकों को टाइमिंग के चक्कर में पड़ने के बजाय 'टाइम इन द मार्केट' यानी अनुशासित निरंतरता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गिरावट के दौर में घबराहट में बिकवाली करने के बजाय सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लार्ज-कैप, मल्टी-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंडों में निवेश बनाए रखना सबसे सुरक्षित रणनीति है। इसके अतिरिक्त, लार्ज-कैप दिग्गज शेयर जैसे बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और कंजम्पशन सेक्टर की अग्रणी कंपनियां इस रैली की अगुवाई करेंगी। यदि वैश्विक अनिश्चितताएं अप्रत्याशित रूप से नहीं बढ़ती हैं, तो अगले 12 से 18 महीनों के भीतर भारतीय शेयर बाजार का 1 लाख और 30 हजार के स्तर को छूना भारतीय अर्थव्यवस्था की आर्थिक संप्रभुता और समृद्धि का सबसे स्वर्णिम प्रमाण साबित होगा।