TAX कटौती का असर! कार खरीदने वालों का लगा तांता, अक्टूबर में 12.4% बढ़ी कारों की बिक्री
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अक्टूबर का महीना एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड और बंपर खुशियां लेकर आया है। देश के प्रमुख कार निर्माताओं, ऑटो एक्सपर्ट्स और डीलरशिप संघों द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कारों की बिक्री में 12.4 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री के पीछे केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में की गई टैक्स कटौती (GST/Cess Adjustments) और नवरात्रि से लेकर दीपावली-धनतेरस तक चले त्योहारी सीजन की भारी मांग को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। सरकार द्वारा कारों पर मिलने वाली टैक्स राहत के कारण गाड़ियों की ऑन-रोड कीमतों में काफी गिरावट देखने को मिली, जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिला है। शोरूम्स के बाहर नई कार की डिलीवरी लेने वालों का तांता लगा हुआ है और ऑटो कंपनियों के प्लांट पूरी क्षमता के साथ गाड़ियों का उत्पादन करने में जुटे हुए हैं।
पैसेंजर व्हीकल्स और एसयूवी सेगमेंट ने मचाया गदर, मारुति, हुंडई, टाटा और महिंद्रा के शोरूम्स पर उमड़ी ग्राहकों की भीड़
अक्टूबर महीने में दर्ज की गई इस 12.4% की सालाना बढ़त में सबसे बड़ा योगदान स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (SUV) और कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट का रहा है। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी से लेकर हुंडई मोटर इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा तक, सभी दिग्गज कंपनियों के पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है। महिंद्रा की थार, स्कॉर्पियो-एन और एक्सयूवी700 के साथ-साथ टाटा की नेक्सॉन व पंच और मारुति की ब्रेजा व फ्रोंक्स जैसे मॉडल्स की मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कई लोकप्रिय गाड़ियों का वेटिंग पीरियड कुछ ही हफ्तों में दोगुना हो गया है। ऑटोमोबाइल डीलरशिप एसोसिएशन (FADA) के प्रतिनिधियों का कहना है कि टैक्स में राहत मिलते ही जो ग्राहक लंबे समय से अपनी पुरानी कार को बदलने या नई कार खरीदने का प्लान टाल रहे थे, उन्होंने त्योहारी सीजन का मुहूर्त देखकर तुरंत बुकिंग और डिलीवरी ले ली।
टैक्स राहत ने बढ़ाई ग्राहकों की क्रय शक्ति, ऑटो सेक्टर और अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा
वित्त मंत्रालय और जीएसटी परिषद द्वारा ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिए गए टैक्स डिस्काउंट और इंसेंटिव्स ने भारतीय ऑटो बाजार के समीकरण को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। टैक्स दरें कम होने से न केवल प्रीमियम एसयूवी बल्कि एंट्री-लेवल हैचबैक और सेडान कारों के दाम भी काफी किफायती हो गए हैं। इस वजह से मध्यमवर्गीय परिवारों और पहली बार कार खरीदने वाले युवाओं के लिए अपने सपनों की कार घर लाना काफी आसान हो गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की यह बंपर बिक्री देश की समग्र आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) को भी एक नई दिशा और गति प्रदान करेगी। कारों की मांग बढ़ने से कलपुर्जे बनाने वाले ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स और डीलरशिप नेटवर्क में भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और बाजार में पैसों का लिक्विडिटी फ्लो बढ़ा है।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों ने भी पकड़ा जोर, ईवी सेगमेंट में भी देखने को मिली रिकॉर्ड वृद्धि
अक्टूबर के इस रिकॉर्ड सेल्स आंकड़े में केवल पेट्रोल और डीजल इंजन वाली कारें ही आगे नहीं रहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Hybrid) कारों की बिक्री में भी उछाल दर्ज किया गया है। ईवी खरीदारों को मिलने वाली अतिरिक्त टैक्स छूट और राज्य सरकारों द्वारा दी जा रही सब्सिडी के चलते टाटा पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी और एमजी कॉमेट जैसी गाड़ियों को भी भारी संख्या में ग्राहक मिले हैं। वहीं हाइब्रिड टेक्नोलॉजी में मारुति ग्रैंड विटारा और टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर की जबरदस्त बिक्री देखी गई है। यह रुझान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय ग्राहक अब ईंधन की बचत और पर्यावरण के प्रति जागरूक होते हुए आधुनिक तकनीकों को भी तेजी से अपना रहे हैं।