'CID' जैसा ऐतिहासिक कल्ट शो बनाने वाले निर्माता-निर्देशक बीपी सिंह का निधन
भारतीय टेलीविजन जगत के इतिहास में अपराध कथाओं और जासूसी जॉनर को घर-घर तक पहुंचाने वाले दिग्गज निर्माता और निर्देशक बृजेंद्र पाल सिंह यानी बीपी सिंह (B. P. Singh) का निधन हो गया है। उनके जाने से छोटे पर्दे के एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय युग का अंत हो गया है। साल 1998 में शुरू हुआ उनका शो 'CID' सिर्फ एक टीवी धारावाहिक नहीं था, बल्कि दो दशकों से अधिक समय तक चलने वाला एक ऐसा सांस्कृतिक फिनोमिना बन गया, जिसने 90 के दशक के बच्चों से लेकर आज की युवा पीढ़ी तक को अपना दीवाना बनाए रखा। बीपी सिंह के निधन की खबर सामने आते ही पूरी मनोरंजन इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है और उनके साथ दशकों तक काम करने वाले कलाकारों की आंखें नम हैं।
दूरदर्शन के कैमरामैन से लेकर देश के सबसे बड़े टीवी डायरेक्टर तक का सफर
बीपी सिंह का टीवी की दुनिया में सफर बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन में एक न्यूज कैमरामैन के रूप में की थी। वहां 10 वर्षों तक काम करने के दौरान उन्होंने कैमरे की बारीकियों, विजुअल फ्रेमिंग और लाइट-शेड्स को गहराई से समझा। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी 'फायरवर्क्स प्रोडक्शंस' (Fireworks Productions) की नींव रखी। 1990 के दशक में उन्होंने मर्डर मिस्ट्री पर आधारित टेलीफिल्म 'सिर्फ चार दिन' बनाई, जिसके तकनीकी क्राफ्ट ने टीवी अधिकारियों को चौंका दिया। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 1997-98 में 'CID' की रूपरेखा तैयार की, जिसे सोनी टीवी पर प्रसारित किया गया और आगे चलकर इसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास के तमाम टीआरपी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा उन्होंने हॉरर जॉनर में 'आहट' (Aahat) जैसा कल्ट सीरियल बनाकर दर्शकों को रोंगटे खड़े कर देने वाला डर महसूस कराया था।
जब 111 मिनट का 'सिंगल टेक' शॉट लेकर लिम्का बुक में दर्ज कराया नाम
बीपी सिंह न केवल एक शानदार स्टोरीटेलर थे, बल्कि तकनीकी रूप से भी वे अपने समय से बहुत आगे की सोच रखते थे। साल 2004 में उन्होंने 'CID' के एक खास एपिसोड "द इनहेरिटेंस" (The Inheritance) का निर्देशन किया था। इस पूरे 111 मिनट लंबे एपिसोड को बिना किसी कट, बिना किसी एडिट और बिना किसी रीटेक के सिर्फ एक सिंगल कंटीन्यूअस शॉट (Single Take) में शूट किया गया था। इस असाधारण तकनीकी कारनामे को 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया था। यह कारनामा दुनिया के इतिहास में किसी टीवी सीरीज के लिए पहली बार हुआ था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीवी की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया।
चैनल के साथ गंभीर विवाद और एक्टर्स की अटूट वफादारी
'CID' के इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया जब शो के निर्माताओं और ब्रॉडकास्टर चैनल के बीच प्रसारण समय, रचनात्मक स्वतंत्रता और बजट को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया था। चैनल शो के टाइम स्लॉट को बदलना चाहता था और कई तरह के बदलावों का दबाव बना रहा था, जिससे बीपी सिंह पूरी तरह असहमत थे। यह टकराव इतना बढ़ गया कि एक समय शो को अचानक ऑफ-एयर करने की नौबत आ गई थी। उस कठिन दौर में टीवी इंडस्ट्री की सबसे दुर्लभ मिसाल देखने को मिली थी। शो के मुख्य सितारे—शिवाजी साटम (एसीपी प्रद्युम्न), आदित्य श्रीवास्तव (अभिजीत), दयानंद शेट्टी (दया) और दिनेश फडनीस (फ्रेडरिक्स)—ने चैनल के किसी भी लुभावने ऑफर को ठुकराते हुए बीपी सिंह के साथ खड़े रहने का फैसला किया।
एक्टर्स ने साफ कह दिया था कि 'CID' का मतलब केवल एक किरदार नहीं बल्कि बीपी सिंह का विजन है। अगर बीपी सिंह शो से हटेंगे, तो वे भी शो का हिस्सा नहीं रहेंगे। कलाकारों की इस अटूट निष्ठा और एकजुटता ने चैनल को झुकने पर मजबूर कर दिया था। बीपी सिंह अपनी टीम को एक क्रू नहीं बल्कि एक परिवार मानते थे, यही वजह थी कि 21 सालों से ज्यादा वक्त तक शो की पूरी स्टारकास्ट बिना किसी बड़े ईगो क्लैश के एक साथ मजबूती से टिकी रही।
खुद भी एसीपी के बॉस 'डीजीपी समशेर सिंह' बनकर जीते थे दिल
बीपी सिंह सिर्फ कैमरे के पीछे ही नहीं, बल्कि कई मौकों पर कैमरे के आगे भी नजर आए। शो के कई बेहद महत्वपूर्ण और क्रिटिकल केसेस में वे खुद डीआईजी/डीजीपी समशेर सिंह के रौबदार किरदार में स्क्रीन पर दिखाई देते थे। जब भी वे एसीपी प्रद्युम्न को सीधे निर्देश देने के लिए फ्रेम में आते, स्क्रीन पर एक अलग ही ऊर्जा और वजन देखने को मिलता था। भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने युवा सिनेमैटोग्राफर्स और डायरेक्टर्स को तराशने में अहम योगदान दिया। बीपी सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका रचा हुआ क्राइम यूनिवर्स और उनके गढ़े हुए अमर किरदार भारतीय टीवी के इतिहास में हमेशा जिंदा रहेंगे।